एम्स भोपाल में पहली बार ट्रांसजेंडर सर्जरी: 8 घंटे चला ऑपरेशन, 5 और मरीज इलाज के लिए पहुंचे

Arohi Raj | Oct 13, 2026, 18:26 IST
भोपाल एम्स में चार विभागों के एक्सपर्ट डॉक्टर्स की टीम ने 8 घंटे में जेंडर चेंज सर्जरी की।
एम्स भोपाल में पहली बार जेंडर अफर्मिंग की सर्जरी की गई। करीब 8 घंटे तक चले इस ऑपरेशन में 4 विभागों के एक्टपर्ट्स डॉक्टर शामिल रहे। सर्जरी एक ट्रांसजेंडर मरीज की लैंगिक पहचान के अनुरूप की गई। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत ठीक रही और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। एम्स के मुताबिक, 5 अन्य मरीज भी इस सर्जरी के लिए पहुंचे हैं।
Gender-affirming surgery was performed for the first time at AIIMS Bhopal. Experts from four departments participated in the operation, which lasted approximately eight hours. The surgery was conducted to align with the transgender patient's gender identity.

चार विभागों की टीम ने किया ऑपरेशन

सर्जरी के दौरान पुरुष जननांगों (Male Reproductive Organs) में बदलाव कर फिमेल रिप्रोडक्टिव आर्गन जैसी संरचना बनाई गई। इस ऑपरेशन का नेतृत्व बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने किया। इसमें विभाग के प्रमुख डॉ. मनाल खान और सहायक प्राध्यापक डॉ. अभिनव सिंह ने अहम भूमिका निभाई।



वहीं, एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. अनुज जैन ने मरीज को बेहोश करने की जिम्मेदारी संभाली। स्त्री रोग विभाग के डॉ. अरुण कुमार डोरा और यूरोलॉजी विभाग के डॉ. देवाशीष कौशल भी टीम में शामिल रहे। ऑपरेशन में रेजिडेंट डॉक्टरों ने भी सहयोग किया।



नोट- बॉटम सर्जरी जननांगों से जुड़ी सर्जरी को कहते हैं। वहीं, जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी का मतलब व्यक्ति की लैंगिक पहचान के अनुरूप शरीर में बदलाव करना है।



जेंडर अफर्मिंग सर्जरी सफल होने पर क्या बोले डायरेक्टर

सर्जरी क्यों हर किसी के लिए जरूरी नहीं

जेंडर अफर्मिंग बॉटम सर्जरी का मकसद शारीरिक बनावट को लैंगिक पहचान के अनुरूप बनाना है। बोलचाल में लोग इसे ट्रांसजेंडर सर्जरी (transgender surgery) भी कहते हैं।



डॉक्टरों का कहना है कि हर ट्रांसजेंडर व्यक्ति के लिए सर्जरी जरूरी नहीं होती। फैसला व्यक्ति की इच्छा, सहमति और चिकित्सकीय आकलन से होता है। इलाज का रास्ता जांच से शुरू होता है। फिर काउंसलिंग आती है। उसके बाद सर्जरी और फॉलोअप होता है।



क्या सर्जरी के साथ इलाज खत्म हो जाता है?

नहीं, आपको बता दें कि ऐसी सर्जरी के बाद संक्रमण और खून बह सकते हैं। घाव भरने में देरी और यूरिन संबंधी परेशानियां भी हो सकती हैं। इसलिए नियमित फॉलोअप और चिकित्सकीय निगरानी जरूरी है। साथ ही सर्जरी के बाद हार्मोन थेरेपी हो सकती है। कुछ मामलों में आईवीएफ (In Vitro Fertilization) यानी शरीर के बाहर निषेचन भी ऑप्शन हो सकता है।



ट्रांसजेंडर होना मानसिक बीमारी नहीं

5 और मरीज ऐसी सर्जरी के लिए पहुंचे एम्स

एम्स भोपाल में इस तरह की सर्जरी कराने के लिए 5 और मरीज पहुंचे हैं। पहली सर्जरी कराने वाला मरीज इसके नतीजे से खुश है। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी मरीज को नियमित जांच के लिए डॉक्टर के पास जाना होगा।



खबर क्यों जरूरी है?



यह खबर इसलिए अहम है, क्योंकि हर व्यक्ति को सम्मान के साथ इलाज मिलना जरूरी है। एम्स भोपाल में हुई यह सर्जरी इसी दिशा में एक कदम है। डॉक्टरों के मुताबिक, सर्जरी का फैसला मरीज की सहमति से होना चाहिए।



FAQs



  1. क्या जेंडर अफर्मिंग सर्जरी हर ट्रांसजेंडर व्यक्ति के लिए जरूरी होती है?
    नहीं, जेंडर अफर्मिंग बॉटम सर्जरी हर ट्रांसजेंडर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं होती। यह फैसला व्यक्ति की इच्छा, सहमति और चिकित्सकीय आकलन पर निर्भर करता है।
  2. ऑपरेशन का नेतृत्व किस विभाग ने किया और इसमें कौन-कौन से विशेषज्ञ शामिल थे?
    ऑपरेशन का नेतृत्व बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने किया, जिसमें डॉ. मनाल खान और डॉ. अभिनव सिंह शामिल थे। अन्य विभागों में एनेस्थीसिया, स्त्री रोग, और यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टर भी शामिल रहे।
  3. क्या जेंडर अफर्मिंग सर्जरी के बाद इलाज का रास्ता खत्म हो जाता है?
    नहीं, जेंडर अफर्मिंग सर्जरी के बाद नियमित फॉलोअप और चिकित्सकीय निगरानी आवश्यक होती है, क्योंकि सर्जरी के बाद संक्रमण और अन्य समस्याएं हो सकती हैं।
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