एम्स भोपाल को मिले नए डायरेक्टर, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल नरेंद्र कोटवाल को कमान

Jitendra Shrivastava | Aug 08, 2026, 18:12 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. एम्स भोपाल को स्थायी नेतृत्व मिला। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल नरेंद्र कोटवाल 3 साल के लिए एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नियुक्त, एएफएमसी पुणे में डायरेक्टर रह चुके हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • एम्स भोपाल को मिला पहला स्थायी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर।
  • रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल संभालेंगे एम्स भोपाल की कमान।
  • तीन साल की नियुक्ति, लेवल-15 वेतनमान तय।
  • सेना के पूर्व अफसर बने अस्पताल के नए मुखिया।
  • अतिरिक्त प्रभार खत्म, अब मिला पूर्णकालिक प्रमुख।

एम्स भोपाल को पहली बार स्थायी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मिला है। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल नरेंद्र कोटवाल की नियुक्ति को केंद्र सरकार ने मंजूरी दी।



नियुक्ति तीन साल के लिए, अनुबंध के आधार पर हुई है। कोटवाल पहले एएफएमसी पुणे के डायरेक्टर रह चुके हैं। अब तक यह पद एम्स दरभंगा के अधिकारी के पास अतिरिक्त प्रभार में था।



भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स को लंबे इंतजार के बाद अपना स्थायी प्रमुख मिल गया है। केंद्र सरकार की नियुक्ति समिति ने रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल नरेंद्र कोटवाल को एम्स भोपाल का एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है।



केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग यानी डीओपीटी (DoPT – Department of Personnel and Training) ने इस बारे में आदेश जारी कर दिया है। नियुक्ति अनुबंध के आधार पर की गई है। इस फैसले से संस्थान के प्रशासनिक कामकाज में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।



देश के सभी बड़े एम्स संस्थानों में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर का पद केंद्र सरकार की कैबिनेट नियुक्ति समिति यानी एसीसी (ACC – Appointments Committee of Cabinet) की सीधी मंजूरी से भरा जाता है।



यह प्रक्रिया आमतौर पर लंबी चलती है, क्योंकि उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि और अनुभव की बारीकी से जांच होती है। एम्स भोपाल के मामले में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई।



तीन साल के लिए मिली नियुक्ति

आदेश के मुताबिक नरेंद्र कोटवाल की नियुक्ति तीन साल के लिए हुई है। उनका कार्यकाल कार्यभार संभालने वाले दिन से शुरू माना जाएगा। हालांकि दो शर्तें भी साथ में जुड़ी हैं। वे 70 साल की उम्र पूरी होने तक ही पद पर रहेंगे। या फिर केंद्र सरकार का अगला आदेश आने तक, जो भी पहले हो।



उन्हें लेवल-15 वेतन मैट्रिक्स के अनुसार वेतन मिलेगा। यह सरकारी सेवा में सबसे वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों को मिलने वाला वेतनमान है। इससे साफ है कि सरकार इस पद को कितनी गंभीरता से देख रही है। अनुबंध आधारित नियुक्ति होने से तय समय पर समीक्षा की भी गुंजाइश बनी रहती है।



सेना की चिकित्सा सेवा में लंबा अनुभव

नरेंद्र कोटवाल का करियर सैन्य चिकित्सा प्रशासन में बीता है। वे पुणे स्थित आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल कॉलेज यानी एएफएमसी (AFMC – Armed Forces Medical College) के डायरेक्टर और कमांडेंट रह चुके हैं। यह देश के सबसे प्रतिष्ठित सैन्य चिकित्सा संस्थानों में गिना जाता है। वहां उन्होंने प्रशासन और चिकित्सा शिक्षा, दोनों क्षेत्रों में काम किया।



रिटायरमेंट के बाद फिलहाल वे पंचकूला स्थित पारस हेल्थ में एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के डायरेक्टर के तौर पर कार्यरत हैं। यानी क्लिनिकल फील्ड से भी उनका जुड़ाव लगातार बना रहा है। सेना और निजी अस्पताल, दोनों जगह का अनुभव उन्हें एम्स भोपाल के लिए मजबूत उम्मीदवार बनाता है।



बड़े सरकारी अस्पतालों में प्रशासनिक अनुभव और क्लिनिकल समझ, दोनों का होना जरूरी माना जाता है। कोटवाल के करियर में यह दोनों पहलू साफ नजर आते हैं, जिसके चलते उनकी नियुक्ति को उचित माना जा रहा है।



अब तक अतिरिक्त प्रभार में चल रहा था संस्थान

एम्स भोपाल में अभी तक स्थायी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नहीं था। यह जिम्मेदारी अतिरिक्त प्रभार के तौर पर एम्स दरभंगा के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. माधवानंद के पास थी। किसी भी संस्थान के लिए अतिरिक्त प्रभार वाली व्यवस्था लंबे समय तक चलाना आसान नहीं होता।



नियमित प्रमुख न होने से बड़े फैसले अक्सर अटक जाते हैं। अब कोटवाल की नियुक्ति के साथ ही यह अस्थायी व्यवस्था खत्म हो जाएगी। संस्थान को पहली बार अपना पूर्णकालिक और स्थायी प्रशासनिक प्रमुख मिलेगा।



प्रशासनिक कामकाज को मिलेगी रफ्तार

एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर किसी भी एम्स संस्थान में सबसे बड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाता है। सभी विभागों के बीच तालमेल बिठाना, बड़े फैसले लेना और मरीजों की सुविधाओं का विस्तार करना, यह सब इसी पद के दायरे में आता है। ऐसे में नए डायरेक्टर की नियुक्ति से रुके हुए कामों को गति मिलने की संभावना है।



एम्स भोपाल में पिछले कुछ समय से मरीजों की सुविधाओं का विस्तार करने पर काम चल रहा है। साथ ही प्रशासनिक ढांचे को भी मजबूत करने की कोशिशें जारी हैं। सैन्य पृष्ठभूमि से आने वाले अधिकारी की नियुक्ति से अनुशासन और बेहतर समन्वय की उम्मीद जताई जा रही है।



स्टाफ के बीच भी इस नियुक्ति को लेकर सकारात्मक माहौल है। कई कर्मचारियों का मानना है कि स्थायी नेतृत्व मिलने से रोजमर्रा के प्रशासनिक फैसले तेजी से हो सकेंगे, जो अतिरिक्त प्रभार व्यवस्था में अक्सर लंबित रह जाते थे।



कब संभालेंगे कार्यभार

फिलहाल नियुक्ति समिति की मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन कोटवाल के कार्यभार संभालने की तारीख अभी तय नहीं हुई है। संस्थान और केंद्र सरकार, दोनों स्तर पर इसकी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। तारीख तय होते ही वे अपना पदभार ग्रहण कर लेंगे।



मध्य प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में गिने जाने वाले एम्स भोपाल के लिए यह नियुक्ति अहम मानी जा रही है। मरीजों और स्टाफ, दोनों को उम्मीद है कि स्थायी नेतृत्व मिलने से संस्थान का कामकाज और बेहतर तरीके से चलेगा। आने वाले महीनों में नई प्रशासनिक व्यवस्था का असर संस्थान की सेवाओं में दिखने की उम्मीद है।



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