उच्च शिक्षा में बेटियों ने लड़कों को पछाड़ा, पिछले 10 साल में 62% तक बढ़ी भागीदारी

Aman Vaishnav | Sept 03, 2026, 10:25 IST
उच्च शिक्षा में बेटियों ने लड़कों को पछाड़ा
केंद्र सरकार की AISHE 2023-24 रिपोर्ट के मुताबिक 10 साल में कुल नामांकन 3.42 करोड़ से बढ़कर 4.50 करोड़ हो गया है। वहीं पिछले 10 सालों में उच्च शिक्षा में एडमिशन लेने वाले कुल नए विद्यार्थियों में से 62% केवल लड़कियां हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • देश में उच्च शिक्षा लेने वाली बेटियों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
  • केंद्र सरकार की AISHE रिपोर्ट 2023-24 में यह जानकारी सामने आई है।
  • दस साल में उच्च शिक्षा नामांकन 1.08 करोड़ बढ़ा है।
  • इसमें अकेले 67 लाख छात्राएं शामिल हैं जबकि लड़कों की संख्या 41 लाख बढ़ी।
  • मध्यप्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में अब भी लड़कों को बढ़त हासिल है।

देश में उच्च शिक्षा की तस्वीर बदल रही है। यह बदलाव सिर्फ कॉलेजों की बढ़ती संख्या में नहीं दिखता। असली बदलाव उन लाखों बेटियों में दिखता है जिन्होंने बीते एक दशक में स्कूली पढ़ाई के बाद कॉलेज का रुख किया है।



केंद्र सरकार के ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन 2023-24 के आंकड़े यह साफ बताते हैं। 2014-15 में उच्च शिक्षा में 3.42 करोड़ विद्यार्थी दर्ज थे। 2023-24 तक यह संख्या बढ़कर 4.50 करोड़ हो गई। यानी कुल 1.08 करोड़ नए विद्यार्थी जुड़े।



बेटियों की भागीदारी बढ़ी

इस दौरान करीब 67 लाख लड़कियां पहली बार उच्च शिक्षा से जुड़ीं। वहीं लड़कों की संख्या में करीब 41 लाख की बढ़ोतरी हुई। यानी नए विद्यार्थियों में 62 प्रतिशत हिस्सा लड़कियों का रहा। यह आंकड़ा साफ इशारा करता है कि बेटियां अब पढ़ाई में पीछे नहीं हैं।



GER अब भी सिर्फ 30%

पहुंच बढ़ने के बावजूद तस्वीर पूरी तरह उजली नहीं है। 18 से 23 साल के युवाओं का सकल नामांकन अनुपात 2023-24 में सिर्फ 30 प्रतिशत रहा। मतलब इस आयु वर्ग के करीब 70 प्रतिशत युवा अब भी कॉलेज की दहलीज तक नहीं पहुंच पा रहे।



पढ़ाई की राह में बाधाएं

विशेषज्ञों के अनुसार कई कारण युवाओं को उच्च शिक्षा से दूर रखते हैं।



फीस, किताबें, हॉस्टल और परिवहन का खर्च कमजोर परिवारों पर भारी पड़ता है। कई घरों में बच्चों को जल्दी कमाई शुरू करनी पड़ती है।



साथ ही 12वीं के बाद कॉलेज की दूरी और दाखिले की प्रक्रिया भी बड़ी बाधा बनती है। परीक्षा में लगातार खराब प्रदर्शन भी ड्रॉपआउट की वजह बनता है।



लड़कियों के लिए दिक्कतें कुछ अलग हैं। घरेलू जिम्मेदारियां, कम उम्र में शादी और सुरक्षा को लेकर चिंता उनकी पढ़ाई रोक देती है। परिवार अक्सर बेटों की पढ़ाई को प्राथमिकता देते हैं।



टॉप 10 जिले कौन से

सबसे ज्यादा कॉलेजों वाले जिलों में बेंगलूरु शहर पहले नंबर पर है। यहां 1,148 कॉलेज हैं। इसके बाद जयपुर में 742, पुणे में 517 और हैदराबाद में 465 कॉलेज हैं। प्रयागराज, सीकर, गाजीपुर, नागपुर, रंगारेड्डी और भोपाल भी टॉप 10 में शामिल हैं। भोपाल में 327 कॉलेज हैं।



MP-राजस्थान का हाल

कॉलेज ज्यादा होने का मतलब यह नहीं कि नामांकन भी ज्यादा हो। राजस्थान के जयपुर और सीकर में सैकड़ों कॉलेज हैं। फिर भी राज्य का कुल उच्च शिक्षा नामांकन 27.4 लाख ही है। यहां छात्राओं का नामांकन छात्रों से कम है।



मध्यप्रदेश की स्थिति भी लगभग वैसी ही है। यहां भी छात्रों की संख्या छात्राओं से ज्यादा है। राज्य का कुल नामांकन 27.6 लाख के आसपास है। साफ है कि सिर्फ कॉलेज खोलने से पहुंच सुनिश्चित नहीं होती।



डिग्री के बाद नौकरी जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि नामांकन बढ़ाने के लिए शिक्षा को रोजगार से जोड़ना जरूरी है। अगर डिग्री के बाद नौकरी की स्पष्ट उम्मीद न दिखे, तो परिवार तीन-चार साल पढ़ाई में समय और पैसा लगाने से हिचकते हैं। यही वजह है कि कई युवा 12वीं के बाद ही पढ़ाई छोड़ देते हैं।



देशभर में विश्वविद्यालयों की संख्या 760 से बढ़कर 1,289 हो गई है, यानी 69.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी। कॉलेजों की संख्या में 25.3 प्रतिशत और स्टैंडअलोन संस्थानों में 24 प्रतिशत इजाफा हुआ है।



इसके बावजूद कुल नामांकन में बढ़ोतरी सिर्फ 31.5 प्रतिशत रही, जबकि छात्रा नामांकन में यह बढ़ोतरी 42.2 प्रतिशत रही।



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