अजाक्स भवन बना राजनीति का अखाड़ा, कोर्ट के आदेश के बाद भी क्यों नहीं थमा विवाद

Ramanand Tiwari | Sept 06, 2026, 20:48 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. भोपाल के अजाक्स भवन को लेकर मुकेश मौर्य और संतोष वर्मा गुट आमने-सामने हैं। करीब छह महीने से चल रही खींचतान अब शिकायत, कोर्ट के निर्देश और पुलिस सुरक्षा तक पहुंच गई है। सवाल है कि विवाद का स्थायी समाधान कब होगा?

ऐसे समझें मामला...

  • छह महीने से दोनों गुट आमने-सामने।
  • भवन के कब्जे को लेकर शिकायत।
  • कोर्ट के निर्देश का हवाला।
  • पुलिस ने बढ़ाई भवन की सुरक्षा।
  • टकराव की आशंका ने बढ़ाई चिंता।

भोपाल का अजाक्स भवन अब सिर्फ संगठन के कार्यालय का विवाद नहीं रह गया है। करीब छह महीने से अध्यक्ष पद और संगठन के नियंत्रण को लेकर चल रही मुकेश मौर्य और आईएएस संतोष वर्मा गुट की खींचतान अब भवन के कब्जे, कोर्ट के निर्देश और पुलिस कार्रवाई तक पहुंच गई है।



एक पक्ष कोर्ट के आदेश के पालन की मांग कर रहा है, तो दूसरा पक्ष अपने संगठनात्मक अधिकारों का दावा कर रहा है। भवन के बाहर बैरिकेडिंग और सुरक्षा बढ़ाए जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है, आखिर यह विवाद कब थमेगा और कहीं अगला कदम किसी बड़े टकराव की वजह तो नहीं बनेगा?



छह महीने की खींचतान अब सड़क तक

अजाक्स यानी मध्य प्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ में नेतृत्व को लेकर विवाद नया नहीं है। मुकेश मौर्य और आईएएस संतोष वर्मा, दोनों ही अपने-अपने तरीके से संगठन के नेतृत्व का दावा करते रहे हैं। जून 2026 में भी दोनों गुटों के बीच अध्यक्ष पद और संगठन के लेटरहेड को लेकर विवाद सामने आया था।



अब यही अंदरूनी खींचतान अजाक्स भवन तक पहुंच गई है। एक गुट का आरोप है कि भवन पर कब्जा बरकरार है और अदालत के निर्देश के बावजूद उसे खाली नहीं कराया जा रहा।



कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस तक मामला

अजाक्स से जुड़े प्रतिनिधियों ने पुलिस को शिकायत देकर न्यायालय के निर्देश के अनुसार कार्रवाई की मांग की है। उनका दावा है कि भोपाल कोर्ट ने मुकेश मौर्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।



हालांकि, इन आरोपों और न्यायालय के आदेश की मूल प्रति के आधार पर ही अंतिम कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल इतना जरूर है कि विवाद अब थाने की दहलीज तक पहुंच चुका है। हालिया रिपोर्ट में भी पुलिस द्वारा भवन के बाहर सुरक्षा बढ़ाए जाने और बैरिकेडिंग किए जाने की जानकारी सामने आई है।



अब सबसे बड़ा सवाल टकराव का

विवाद लंबा खिंचने के साथ चिंता सिर्फ भवन के मालिकाना हक तक सीमित नहीं है। सवाल कानून-व्यवस्था का भी है। यदि दोनों पक्ष अपने-अपने दावे पर कायम रहते हैं और आमने-सामने आते हैं तो स्थिति बिगड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।



इसी वजह से भवन के आसपास पुलिस की मौजूदगी और बैरिकेडिंग को महज सुरक्षा व्यवस्था के तौर पर नहीं देखा जा रहा। यह इस बात का संकेत भी है कि प्रशासन किसी अप्रिय स्थिति को पहले ही रोकना चाहता है।



3.5 करोड़ के भवन पर खींचतान क्यों?

अजाक्स का यह चार मंजिला भवन करीब 3.5 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ है। सेकंड स्टॉप के पास संगठन को करीब 10 हजार वर्गफीट जमीन आवंटित किए जाने की जानकारी दी गई है। करीब 5 हजार वर्गफीट क्षेत्र में भवन का निर्माण हुआ है।



भवन में प्रशिक्षण हॉल, सभागार, कंप्यूटर कक्ष, लाइब्रेरी, डोरमेट्री और पदाधिकारियों के लिए कार्यालय जैसी सुविधाएं हैं। यानी यह सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि संगठन की गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र है।



सरकार क्यों थोपना चाहती है दूसरा अध्यक्ष?: संतोष वर्मा

अजाक्स का अध्यक्ष होने का दावा कर रहे आईएएस संतोष वर्मा ने कहा कि मुकेश मौर्य के खिलाफ यदि न्यायालय का विधिवत आदेश है तो पुलिस को उसका पालन करना चाहिए।



वर्मा ने कहा कि स्थिति अराजकता की ओर जा रही है और उन्हें समझ नहीं आ रहा कि मुकेश मौर्य के मामले में पुलिस क्यों सहयोग कर रही है।


वर्मा ने सवाल उठाया कि करीब डेढ़ लाख कर्मचारियों वाले संगठन पर सरकार आखिर दूसरा अध्यक्ष क्यों थोपना चाहती है।



मुकेश मौर्य बोले- मुझे किसी कार्रवाई की सूचना नहीं

अपने आपको अजाक्स का अध्यक्ष बताने वाले मुकेश मौर्य से जब इस मामले में बात की गई तो उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ इस तरह की किसी कार्रवाई की उन्हें कोई सूचना नहीं मिली है।



संतोष वर्मा जो आरोप लगा रहे हैं, उसकी जानकारी भी उन्हें नहीं है। मौर्य ने कहा कि जब उन्हें किसी कार्रवाई या न्यायालय के आदेश की विधिवत सूचना मिलेगी, तब वे आगे की न्यायिक कार्रवाई करेंगे।



संतोष वर्मा के इस आरोप पर कि पुलिस मुकेश मौर्य का सहयोग कर रही है और सरकार किसी दूसरे व्यक्ति को अध्यक्ष बनाना चाहती है, मौर्य ने कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं है।



चौधरी मुकेश मौर्य ने वर्मा के आरोपों को फिजूल की बातें बताते हुए कहा कि अजाक्स के अध्यक्ष वे ही हैं और सरकारी दस्तावेजों में भी उनका नाम अध्यक्ष के तौर पर दर्ज है।



असली सवाल अब समाधान का

अजाक्स का विवाद पहले भी शिकायतों और एफआईआर तक पहुंच चुका है। नेतृत्व को लेकर दोनों पक्षों के दावे सार्वजनिक हो चुके हैं। जून में भी दोनों गुटों के बीच अध्यक्ष पद और संगठन की वैधता को लेकर तीखे आरोप-प्रत्यारोप सामने आए थे।



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