अजाक्स विवाद में नहीं थम रहा अध्यक्ष पद का टकराव
समझें क्या है पूरा मामला
- कोर्ट ने FIR दर्ज करने के निर्देश दिए।
- ₹17.95 लाख की राशि पर सवाल उठे।
- ₹12.94 लाख की दूसरी राशि भी विवादित है।
- सदस्यता खत्म होने के बाद दस्तावेजों पर सवाल हैं।
- मामले की जांच अब पुलिस करेगी।
अजाक्स नाम-लेटरहेड के इस्तेमाल पर रोक
संतोष वर्मा ने बताया कि भोपाल में मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ (अजाक्स) से जुड़े विवाद ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, भोपाल के 1 सितंबर 2026 के आदेश के बाद थाना टीटी नगर को संबंधित आरोपों में FIR दर्ज कर न्यायालय को सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं। इसी आदेश के पालन की मांग को लेकर अजाक्स प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस महानिदेशक को ज्ञापन सौंपा है।
मामला संगठनात्मक विवाद से आगे क्यों पहुंचा?
अजाक्स की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक विवाद की शुरुआत सदस्यता और संघ की वित्तीय गतिविधियों से हुई। संघ का दावा है कि मुकेश मौर्य की सदस्यता पात्रता पर सवाल उठे और बाद में वित्तीय लेन-देन का हिसाब भी विवाद का विषय बना।
परिवाद में आरोप लगाया गया है कि प्रांतीय कार्यालय से प्राप्त रसीद कट्टों के जरिए करीब 17.95 लाख की राशि सदस्यों से ली गई, लेकिन उसे संघ के खाते में जमा नहीं कराया गया।
इसके अलावा स्थानीय स्तर पर कथित रूप से जारी रसीद बुक के माध्यम से करीब 12.94 लाख प्राप्त करने और उसका अपेक्षित लेखा-जोखा प्रांतीय कार्यालय में प्रस्तुत नहीं करने का भी आरोप है।
सदस्यता खत्म होने के बाद दस्तावेजों का विवाद
अजाक्स के मुताबिक जवाब और हिसाब देने के अवसर दिए जाने के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं हुई। इसके बाद 30 जुलाई 2023 को राज्य कार्यकारिणी की बैठक में मुकेश मौर्य की प्राथमिक सदस्यता समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
इसके बाद कथित तौर पर अजाक्स के लेटरहेड और दूसरे दस्तावेजों का इस्तेमाल कर खुद को संगठन का अध्यक्ष निर्वाचित बताए जाने का मामला सामने आया।
परिवाद में दस्तावेजों में जनरल मीटिंग की तारीख को लेकर भी विरोधाभास का आरोप है। एक दस्तावेज में बैठक 30 जुलाई 2023, जबकि दूसरे में 29 जुलाई 2023 बताई गई है। अजाक्स ने इसी आधार पर दस्तावेजों की प्रामाणिकता की जांच की मांग की है।
रजिस्ट्रार कार्यालय की भूमिका भी जांच के दायरे में
विवाद में फर्म्स एवं सोसाइटीज के रजिस्ट्रार और सहायक रजिस्ट्रार की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। अजाक्स का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों को संगठन की वास्तविक कार्यकारिणी और मुकेश मौर्य की सदस्यता समाप्त किए जाने की जानकारी थी। इसके बावजूद कथित दस्तावेजों और अध्यक्ष पद के दावे पर हुई कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। हालांकि, संबंधित अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर कोई स्वतंत्र पक्ष इस सामग्री में उपलब्ध नहीं है। इसलिए उनकी भूमिका को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए, दोष सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं।
कोर्ट के आदेश के बाद अब पुलिस की भूमिका
न्यायालय के आदेश के बाद अजाक्स ने पुलिस से संबंधित धाराओं में FIR दर्ज कर निष्पक्ष विवेचना की मांग की है। ज्ञापन में कथित कूटरचित दस्तावेज, रसीद पुस्तिकाएं, बैंक रिकॉर्ड, सदस्यता दस्तावेज और रजिस्ट्रार कार्यालय में जमा रिकॉर्ड की जांच की मांग भी की गई है।
अजाक्स का कहना है कि मामला केवल संगठन के भीतर का विवाद नहीं रह गया है। इसमें कथित वित्तीय अनियमितता, धोखाधड़ी, दस्तावेजों की कूटरचना और आपराधिक षड्यंत्र जैसे आरोप सामने आए हैं।
अजाक्स के नाम के इस्तेमाल पर भी रोक
संतोष वर्मा ने बताया कि न्यायालयीन आदेश के अनुसार मुकेश मौर्य के अजाक्स भवन, भोपाल में प्रवेश पर प्रतिबंध बताया गया है। साथ ही संगठन के नाम, पंजीयन क्रमांक और लेटरहेड के इस्तेमाल पर भी रोक का उल्लेख किया गया है।
अजाक्स का आरोप है कि प्रतिबंध के बावजूद संगठन के नाम या दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया तो यह न्यायालयीन आदेश की अवहेलना का विषय बन सकता है।
DGP से जल्द कार्रवाई का आश्वासन
अजाक्स प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस महानिदेशक, भोपाल को ज्ञापन देकर न्यायालय के आदेश का जल्द पालन कराने की मांग की। संघ के अनुसार DGP स्तर से न्यायालयीन आदेश के अनुपालन में FIR और वैधानिक कार्रवाई का आश्वासन मिला है।
प्रतिनिधिमंडल में अजाक्स प्रांताध्यक्ष IAS संतोष वर्मा, कार्यवाहक प्रांताध्यक्ष इंजीनियर एसएल सूर्यवंशी, प्रांतीय महासचिव गौतम पाटिल, राजवीर अग्निहोत्री, संयुक्त सचिव अशोक वेन, जिलाध्यक्ष विनोद बट्टी सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
आगे की तस्वीर पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया से साफ होगी। FIR दर्ज होने के बाद दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के बयानों की जांच महत्वपूर्ण होगी। आरोप सही हैं या नहीं, इसका अंतिम निर्धारण सक्षम जांच और अदालत की प्रक्रिया से ही होगा।
कानून सभी के लिए समान : संतोष वर्मा
वहीं इस मामले में अजाक्स प्रांताध्यक्ष आईएएस संतोष वर्मा का कहना है कि अध्यक्ष पद और संगठन से जुड़े विवाद में न्यायालय की ओर से आदेश पारित किया जा चुका है। उनका सवाल है कि आदेश के बावजूद पुलिस प्रशासन अपेक्षित कार्रवाई और सहयोग क्यों नहीं कर रहा है। वर्मा के मुताबिक कानून सभी के लिए समान है और न्यायालय के आदेश का पालन होना चाहिए।
क्या बोले मुकेश मौर्य?
वहीं इस मामले में चौधरी मुकेश मौर्य ने कहा कि उन्हें फिलहाल ऐसी कोई जानकारी या दस्तावेज नहीं मिले हैं, जिससे यह स्पष्ट हो कि न्यायालय ने उनके खिलाफ कोई अंतिम निर्णय दिया है।
उनका कहना है कि जब संबंधित दस्तावेज उनके सामने आएंगे, तभी वह इस पूरे मामले पर अपना विस्तृत पक्ष रख पाएंगे। मौर्य का दावा है कि उन्हें शासन की ओर से अजाक्स का अध्यक्ष बनाया जा चुका है। उनका कहना है कि इसके बावजूद संतोष वर्मा उनके खिलाफ आरोप लगा रहे हैं।
मौर्य ने कहा कि यह अब कानूनी लड़ाई है और न्यायालय में जो अंतिम निर्णय होगा, वही उनके लिए मान्य होगा। उनका कहना है कि फिलहाल उनके पास मामले से संबंधित पर्याप्त दस्तावेज या जानकारी नहीं है, इसलिए वह आरोपों पर विस्तृत टिप्पणी नहीं कर सकते।
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