अल नीनो के कारण देश के 315 जिलों पर सूखे का खतरा, MP और राजस्थान के जिले भी शामिल

Aman Vaishnav | Jun 25, 2026, 13:15 IST
मानसून की धीमी रफ्तार
अल नीनो के कारण मध्य प्रदेश, राजस्थान और देश के कई राज्यों में मानसून की रफ्तार धीमी हो गई है। कम बारिश से खरीफ फसलों पर असर पड़ रहा है। इसके लिए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को क्याएक बड़ी सलाह दी है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्यप्रदेश में इस साल मानसून 9 दिन देरी से पहुंचा है।
  • अल नीनो के असर से देश के 315 जिलों में कमजोर बारिश का अनुमान है।
  • IMD ने कहा है कि इस बार सामान्य से 8 फीसदी कम बारिश होगी।
  • इससे खरीफ फसलों की बुवाई पिछड़ रही है।
  • कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को कम पानी वाली फसलें लगाने की सलाह दी है।

MP में मानसून क्यों हुआ लेट

इस साल मानसून केरल में 4 दिन देरी से पहुंचा था। उसके बाद भी रफ्तार धीमी रही। एमपी में मानसून हर साल 15 से 16 जून के बीच दस्तक देता है।



वहीं इस बार 26 जून तक भी प्रदेश के कई हिस्सों में मानसून नहीं पहुंचा था। 9 दिन की यह देरी किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है।



अभी तक देश में सामान्य से करीब 43 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक 2 जुलाई तक के सप्ताह में भी बारिश कमजोर ही रहने की आशंका है।



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315 जिलों पर मंडरा रहा खतरा

कृषि मंत्रालय और ICAR (Indian Council of Agricultural Research) ने मिलकर देश के उन जिलों का सर्वे किया जहां कम बारिश का सबसे ज्यादा असर होगा। इसमें 315 जिले सामने आए हैं।



इनमें से 111 जिले सबसे संवेदनशील हैं। इन जिलों में सिंचाई का दायरा 25 फीसदी से भी कम है। 76 जिलों में 25 से 50 फीसदी तक सिंचाई की व्यवस्था है। बाकी 128 जिलों में डैम और दूसरे साधनों से थोड़ी बेहतर स्थिति है।



इन 315 जिलों में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और गुजरात के सबसे ज्यादा जिले शामिल हैं।



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MP के किसानों पर क्या असर पड़ेगा

मध्यप्रदेश की खेती बड़े पैमाने पर मानसून पर निर्भर है। देरी और कम बारिश का सीधा असर खरीफ फसलों पर पड़ रहा है। राज्य में दलहन और कपास की बुवाई में पहले ही गिरावट दिख रही है। जिन इलाकों में सिंचाई के साधन नहीं हैं वहां हालत और बुरी है।



कृषि वैज्ञानिक साधुराम शर्मा के मुताबिक आगे की स्थिति पूरी तरह जुलाई और अगस्त में होने वाली बारिश पर निर्भर करेगी। अगर बारिश कमजोर रही तो बुवाई का दायरा और उत्पादन दोनों घटेंगे।



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किसान क्या करें, वैज्ञानिकों की सलाह

कृषि वैज्ञानिक ने कहा कि कम बारिश के अनुमान को देखते हुए किसानों को पूरी जमीन पर धान लगाने से बचना चाहिए। धान बहुत ज्यादा पानी मांगता है। कम पानी में तैयार होने वाली फसलें ज्यादा फायदेमंद रहेंगी। उन्होंने बाजरा और ज्वार जैसी फसलों को अपनाने की सलाह दी। मूंग और उड़द भी कम समय में तैयार होती हैं और कम बारिश में भी अच्छा उत्पादन देती हैं।



फसल विविधीकरण जरूरी है

शर्मा ने कहा कि किसानों को एक ही फसल पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। इंटर-क्रॉपिंग और मिश्रित खेती अपनाने से नुकसान का खतरा कम होता है। अगर एक फसल खराब हो तो दूसरी से आय बनी रहती है।



कृषि वैज्ञानिक ने श्री अन्न यानी मिलेट्स पर जोर दिया। दलहन और तिलहन भी कम नमी में बेहतर काम करती हैं। ये फसलें मिट्टी की सेहत के लिए भी अच्छी हैं।



IMD की चेतावनी पर ध्यान दें

IMD (India Meteorological Department) ने पहले ही अनुमान जताया है कि इस बार देश में सामान्य का केवल 92 फीसदी मानसून बारिश होगी। यह लगातार तीसरा साल है जब अल नीनो का असर (Effect of El Nino) मानसून पर दिख रहा है। ऐसे में किसानों को अभी से तैयारी करनी होगी।



अल नीनो क्या होता है?

अल नीनो (El Niño) प्रशांत महासागर में उत्पन्न होने वाली एक प्राकृतिक और मौसमी जलवायु घटना है, जो हर दो से सात साल में घटित होती है। इसके दौरान मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से काफी अधिक हो जाता है। इससे पूरी दुनिया का मौसम चक्र गड़बड़ा जाता है।



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