आलीराजपुर बना शराब तस्करी का अड्डा, रोज गुजरात जा रही 10 हजार पेटी शराब, ये 5 लोग संभाल रहे सिंडिकेट...

Aman Vaishnav | Nov 06, 2026, 09:37 IST
आलीराजपुर सीमा पर खुले मैदान में ट्रकों से शराब उतारकर बाइक-स्कूटी पर लादते तस्कर, जहां से रोज 10 हजार पेटी शराब गुजरात भेजी जा रही है।
Alirajpur to Gujarat illegal liquor smuggling racket using two wheelers on border routes
खातेगांव के टीआई दिलीप पुरी की हत्या का मामला अभी पूरे प्रदेश में चर्चा में है। इसी बीच सीमावर्ती जिले आलीराजपुर से गुजरात में शराब की तस्करी का बड़ा मामला सामने आया है। तस्करों ने यहां बेलार फलिया (झाड़ोली) को शराब तस्करी का अड्डा बना लिया है। गुजरात में शराबबंदी का फायदा उठाकर तस्कर यहां खुले मैदानों में शराब की पेटियां जमा कर रहे हैं।

बड़े ट्रकों और कंटेनरों से शराब की खेप उतारी जाती है। इसके बाद दोपहिया वाहनों से शराब को बेखौफ गुजरात की सीमा पार पहुंचाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार रोजाना 10 हजार शराब की पेटी गुजरात पहुंचाई जा रही है। खुलेआम चल रहे इस कारोबार से स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।



बाइक-स्कूटी वाहिनी और 2500 रुपए का लालच

जानकारी के अनुसार तस्करों ने शराब को सीमा पार पहुंचाने के लिए एक नया तरीका निकाला है। वे बड़े वाहनों के बजाय दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।



  • आदिवासी युवाओं का इस्तेमाल: स्थानीय बेरोजगार और गरीब युवाओं को पैसों का लालच देकर इस काम में झोंका जा रहा है।
  • प्रति फेरा कमाई: एक बाइक या स्कूटी पर 10 से 12 शराब की पेटियां बांधी जाती हैं। इसे गुजरात पहुंचाने के लिए 2500 रुपए प्रति फेरा दिया जाता है।
  • सैकड़ों वाहनों का पहरा: रोज करीब 100 से 200 बाइक, स्कूटी और कई ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की मदद से यह अवैध माल भेजा जाता है।
  • असली खिलाड़ी बच निकलते हैं: पुलिस कार्रवाई में अक्सर सिर्फ छोटे वाहन चालक ही पकड़े जाते हैंजबकि पर्दे के पीछे बैठकर नेटवर्क चलाने वाले सरगना बच निकलते हैं।

5 माफिया चला रहे पूरा सिंडिकेट

इस गैरकानूनी कारोबार को सुचारू रूप से चलाने के लिए माफियाओं ने आपस में इलाके बांट रखे हैं। अखबार में छपी खबर के मुताबिक इन 5 प्रमुख लोगों के नाम सामने आए हैं...



  • मुकेश रजक और सेवलाभाई: यह दोनों झाड़ोली और बेलार फलिया के मुख्य नेटवर्क को संभालते हैं।
  • चका भाई: इनके जिम्मे छकतला क्षेत्र का पूरा जिम्मा है।
  • अलकेश: यह दाहोद और गोधरा पट्टी के इलाके में शराब की खेप पहुंचाने का काम देखते हैं।
  • जयेश पिता संन्या: इनका मुख्य काम वाहनों की व्यवस्था और उनकी सुरक्षित आवाजाही को देखना है।

गुजरात तक पहुंचने के लिए इन 3 रास्तों का इस्तेमाल

तस्कर पुलिस से बचने के लिए तय किए गए तीन खास गलियारों का इस्तेमाल करते हैं।



  • पहला रूट (अहमदाबाद बेल्ट): यह रास्ता छकतला से शुरू होकर कवाट और जसवाड़ी होते हुए सीधे अहमदाबाद के मुख्य अड्डों तक जाता है।
  • दूसरा रूट (इंडस्ट्रियल रूट): यह चांदपुर दुकान और बडोली से होकर छोटा उदयपुर, वाघोडिया और हलोल के रास्ते वडोदरा पहुंचता है।
  • तीसरा रूट (दाहोद-गोधरा पट्टी): यह रास्ता कट्टीवाड़ा के जंगलों और गांवों से होते हुए दाहोद व गोधरा की ओर माल उतारता है।

आबकारी विभाग का क्या कहना है?

लगातार उठ रहे सवालों के बीच जिला आबकारी अधिकारी राधेश्याम राय ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि विभाग अवैध शराब के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा है। रात में और तड़के 4 बजे भी गश्त लगाई जा रही है। झाड़ोली इलाके में दो बार दबिश दी जा चुकी है और पिछले महीने की कार्रवाई में 50 बल्क लीटर शराब जब्त भी की गई थी। अधिकारियों का कहना है कि इसी कानूनी दबाव के कारण अब तस्कर जंगलों और सुनसान रास्तों की तरफ भाग रहे हैं।

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