एमपी हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस बने अल्पेश कोगजे, कहा-जनता की आवाज है प्राथमिकता
समझें क्या है पूरा मामला
- जस्टिस अल्पेश कोगजे ने शुक्रवार को एमपी हाईकोर्ट की कमान संभाली।
- एक दिन पहले उन्होंने राजभवन में चीफ जस्टिस पद की शपथ ली थी।
- स्वागत समारोह में उन्होंने नर्मदा के जरिए दोनों प्रदेशों को जोड़ा।
- उन्होंने निष्पक्ष फैसलों और जनता की आवाज को अपनी प्राथमिकता बताया।
- द सूत्र ने उनकी नियुक्ति की जानकारी काफी पहले ही सामने रखी थी।
गुजरात से MP पहुंचे चीफ जस्टिस, नर्मदा से जोड़ा रिश्ता
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को शुक्रवार को नया चीफ जस्टिस मिला। जस्टिस अल्पेश वाई. कोगजे ने पदभार ग्रहण कर लिया। एक दिन पहले उन्होंने राजभवन में शपथ ली थी। इसके बाद शुक्रवार को वह जबलपुर पहुंचे। यहां हाईकोर्ट परिसर में उनका स्वागत किया गया। इस मौके पर हाईकोर्ट के सभी खंडपीठों के जज मौजूद रहे। अधिवक्ता, बार और महाधिवक्ता भी समारोह में शामिल हुए। रजिस्ट्री कार्यालय के अधिकारी भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बने।
नर्मदा के जरिए जस्टिस कोगजे ने बताया दोनों प्रदेशों का रिश्ता
स्वागत समारोह में जस्टिस कोगजे ने खास बात कही। उन्होंने अपने संबोधन में नर्मदा नदी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि गुजरात वह प्रदेश है, जहां नर्मदा बहती है। अब वह उस प्रदेश में काम करेंगे, जहां नर्मदा का उद्गम होता है। उन्होंने कहा कि नदियां प्रदेशों को जोड़ती हैं। इसी तरह न्याय व्यवस्था भी सभी को जोड़ती है। उनके इस संदेश ने गुजरात और मध्य प्रदेश के रिश्ते को नया अर्थ दिया।
गुजरात में मिला अनुभव, MP में नई शुरुआत करेंगे
जस्टिस कोगजे ने अपनी न्यायिक यात्रा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गुजरात हाईकोर्ट में काफी अनुभव मिला। लेकिन मध्य प्रदेश में वह नए सिरे से अनुभव हासिल करेंगे। उन्होंने बार और रजिस्ट्री के साथ मिलकर काम करने की बात कही। उन्होंने जजों और कर्मचारियों के सहयोग को भी जरूरी बताया। उनका कहना था कि सभी मिलकर आगे बढ़ेंगे। जनता को न्याय दिलाना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।
फैसले पर सवाल उठ सकते हैं, नीयत पर नहीं
जस्टिस कोगजे ने निष्पक्ष न्याय को लेकर भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि वह वह वादा करते हैं कि उनके फैसलों में कोई पूर्वाग्रह नहीं दिखेगा। उन्होंने एक अहम बात भी साफ कही। हर व्यक्ति उनके फैसले से संतुष्ट हो, यह जरूरी नहीं है। अंतिम फैसले पर सवाल भी उठ सकते हैं। लेकिन उनकी इंसाफ की नीयत पर सवाल नहीं उठेगा । उन्होंने भरोसा दिलाया कि फैसला देते समय निष्पक्षता बनी रहेगी।
वकील से जज बनने तक का अनुभव
जस्टिस कोगजे ने वकील के दौर की याद भी साझा की। उन्होंने बताया कि वकील अपने मामले को एक नजर से देखता है। उसे अपने पक्ष की मजबूती सबसे ज्यादा दिखाई देती है। लेकिन जज के सामने तस्वीर पूरी तरह अलग होती है। जज को दोनों पक्षों की बात सुननी होती है। इसके बाद सभी पहलुओं को देखकर फैसला देना होता है। उन्होंने कहा कि न्याय करते समय इस सोच को याद रखना जरूरी है।
बार, जज और रजिस्ट्री साथ मिलकर आगे बढ़ेंगे
नए चीफ जस्टिस ने सभी को साथ लेकर चलने का भरोसा दिया। उन्होंने अधिवक्ताओं और कर्मचारियों से सहयोग की बात कही। उन्होंने जजों के साथ मिलकर काम करने की भी बात कही। उनका कहना था कि हाईकोर्ट की उन्नति सामूहिक प्रयास से होगी। इसके लिए बार और रजिस्ट्री की भूमिका भी अहम होगी। उन्होंने सभी को न्याय की राह में साथ चलने का भरोसा दिया।
जनता की आवाज सुनना होगी प्राथमिकता
जस्टिस कोगजे ने प्रदेश की जनता को भी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जनता की आवाज सुनना उनकी प्राथमिकता होगी। न्याय व्यवस्था का अंतिम उद्देश्य लोगों को न्याय देना है। इसलिए अदालत का काम आम लोगों से जुड़ा रहना चाहिए। उन्होंने इसी सोच के साथ काम करने का भरोसा दिया। उनके संबोधन में न्याय और भरोसा दोनों प्रमुख संदेश रहे।
10 सितंबर को ली थी चीफ जस्टिस पद की शपथ
जस्टिस अल्पेश कोगजे ने 10 सितंबर को शपथ ली थी। राजभवन में उन्हें चीफ जस्टिस पद की शपथ दिलाई गई। इसके अगले दिन उन्होंने हाईकोर्ट में पदभार संभाला। शुक्रवार से उन्होंने मामलों की सुनवाई भी शुरू कर दी। इसके साथ ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में उनका कार्यकाल शुरू हो गया। अब न्यायिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियां उनके सामने होंगी।
द सूत्र ने 10 अगस्त को ही बता दिया था नाम
जस्टिस कोगजे की नियुक्ति को लेकर द सूत्र की खबर खास रही। द सूत्र ने 10 अगस्त को उनका नाम सामने रखा था। उस समय आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया था। रिपोर्ट में उनके MP के अगले चीफ जस्टिस बनने की जानकारी दी गई थी। इसके बाद 31 अगस्त को कॉलेजियम ने उनके नाम की सिफारिश की। अब नियुक्ति और पदभार दोनों हो चुके हैं। इस तरह द सूत्र की पहले की खबर सही साबित हुई। हाईकोर्ट और कॉलेजियम से जुड़ी खबरों में यह पकड़ अहम है।
वकालत से हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस तक का सफर
जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे का जन्म 16 जुलाई 1969 को हुआ। उन्होंने 1990 में रसायन शास्त्र से बीएससी की है। वर्ष 1993 में उन्होंने एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। इसी साल उन्होंने वकालत शुरू की थी। वर्ष 2001 में वह सहायक सरकारी वकील बने। वर्ष 2002 में वह अतिरिक्त लोक अभियोजक बने। उन्होंने वर्ष 2007 तक इस जिम्मेदारी को संभाला।
गुजरात हाईकोर्ट में 2016 में बने जज
चीफ जस्टिस अल्पेश वाई कोगजे ने कई अहम मामलों में काम किया है। उन्होंने 2002 के गोधरा कांड से जुड़े मामले देखे। वह एसआईटी के लिए विशेष लोक अभियोजक भी रहे। इसके अलावा STF से जुड़े मामलों में भी काम किया। वह केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क विभाग के वकील रहे। 6 अप्रैल 2016 को वह गुजरात हाईकोर्ट के अतिरिक्त जज बने। 15 मार्च 2018 को वह स्थायी जज बने। अब वह मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस हैं।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को मिला नया नेतृत्व
जस्टिस अल्पेश कोगजे के पदभार के साथ नई शुरुआत हुई है। उनके सामने न्यायिक और प्रशासनिक दोनों जिम्मेदारियां रहेंगी। लंबित मामलों का निपटारा भी अहम मुद्दा रहेगा। साथ ही बार और बेंच के बीच बेहतर तालमेल जरूरी होगा। उन्होंने अपने पहले संबोधन में इसकी दिशा साफ कर दी है। उनका संदेश था कि सभी साथ मिलकर आगे बढ़ें। सबसे ऊपर जनता को न्याय दिलाना होना चाहिए।
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