सिस्टम की लापरवाही से इंजीनियर को हुई जेल, अमचूर पाउडर को बताया ड्रग्स, ऐसे हुआ भंडाफोड़

Aman Vaishnav | May 20, 2026, 09:50 IST
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भोपाल एयरपोर्ट पर मशीन की गलती से अमचूर को ड्रग्स बता दिया गया। इस गलती की वजह से एक इंजीनियर को सलाखों के पीछे जाना पड़ा। इस पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई है।

यह कहानी ग्वालियर के रहने वाले एक इंजीनियर अजय सिंह की है। अजय सिंह दिल्ली जाने के लिए भोपाल एयरपोर्ट (राजा भोज एयरपोर्ट) पहुंचे थे। वहां सुरक्षा जांच के दौरान उनके बैग की तलाशी ली गई।



अजय के बैग में अमचूर पाउडर रखा हुआ था। जब उस पाउडर को एयरपोर्ट की एक्सप्लोसिव ट्रेस डिटेक्टर मशीन में डाला गया तो मशीन ने अलार्म बजा दिया। मशीन के मुताबिक वह अमचूर नहीं ड्रग्स (हेरोइन) था।



मशीन का अलार्म बजते ही एयरपोर्ट पर हड़कंप मच गया। सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ ने तुरंत इसकी सूचना गांधीनगर थाना पुलिस को दी।



पुलिस ने अजय सिंह के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट (नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट) के तहत केस दर्ज कर लिया और उन्हें सीधे जेल भेज दिया।



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57 दिन की जेल और सिस्टम की लापरवाही

एक निर्दोष व्यक्ति सिर्फ इसलिए जेल चला गया क्योंकि सिस्टम और उसकी मशीनें सही फैसला नहीं कर पाईं। अजय सिंह को पूरे 57 दिन जेल की सलाखों के पीछे बिताने पड़े।



बाद में जब फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट आई तब जाकर सच सामने आया कि उनके बैग में कोई ड्रग्स नहीं बल्कि सिर्फ अमचूर और गरम मसाला था।



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हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी और 10 लाख का हर्जाना

इस पूरे मामले को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की फॉरेंसिक जांच व्यवस्था पर सख्त नाराजगी जताई है। जस्टिस दीपक खोत ने कहा कि राज्य की प्रयोगशालाओं के पास जांच करने के लिए जरूरी उपकरण और मशीनें ही नहीं हैं, तो फिर इतना बड़ा ढांचा बनाने और बड़े-बड़े विशेषज्ञ अधिकारियों को तैनात करने का क्या फायदा है?



कोर्ट ने माना कि सरकारी सिस्टम और संसाधनों की कमी के कारण एक बिल्कुल निर्दोष इंसान को 57 दिनों तक जेल में रहना पड़ा। यह सीधे तौर पर उस व्यक्ति के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।



इसी वजह से कोर्ट ने अजय सिंह को 10 लाख रुपए का हर्जाना देने का आदेश दिया है।



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मुख्य सचिव को मिले कड़े निर्देश

हाई कोर्ट ने इस मामले में मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को भी कड़े निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा है कि एक महीने के अंदर प्रदेश की सभी रीजनल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरीज (RFSL) का बारीकी से निरीक्षण किया जाए।



वहां जो भी जरूरी उपकरण और स्टाफ की कमी है, उसे जल्द से जल्द पूरा किया जाए। इससे भविष्य में किसी और बेकसूर के साथ ऐसा नहां होगा।



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