अमृत 2.0: निकायों को रोड रेस्टोरेशन के लिए राशि मांगना पड़ा भारी, एसीएस-कमिश्नर ने लौटाई फाइल
समझें पूरा मामला...
- पाइप लाइन बिछाने से पहले ही निकायों ने रोड रेस्टोरेशन का फंड उड़ा दिया।
- ACS संजय दुबे और कमिश्नर संकेत भोंडवे ने अतिरिक्त राशि देने से किया इंकार ।
- कई जगह पाइप की मोटाई देखे बिना बड़ी मशीनों से सड़क खोदने से बढ़ा रेस्टोरेशन का खर्च।
- अमृत 2.0 में जलापूर्ति पर 6240.50 करोड़ और सीवेज पर 4957.01 करोड़ हो रहे खर्च।
- अतिरिक्त बजट न मिलने पर कई निकायों में अटक सकता है सड़कों की मरम्मत का काम।
मध्यप्रदेश में अमृत 2.0 योजना शुरू हुए 3 साल हो गए, पर नगरीय निकायों का जुगाड़ खत्म नहीं हुआ। योजना के तहत पाइप बिछाने के लिए सड़क की खुदाई भी निर्धारित है।
यह काम संभाल रहे ठेकेदारों ने योजना के इस प्रावधान को अनदेखा कर दिया। अपनी सुविधा को देखते हुए बड़ी और भारी मशीनों का उपयोग सड़कों की खुदाई में किया गया।
इस वजह से 6 मिमी और 8 मिमी के पाइप बिछाने के लिए भी कई फीट गहरे और चौड़े गड्ढे किए गए। इससे सड़क का काफी हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ। अब इन सड़कों की मरम्मत पर काफी राशि खर्च हो रही है।
ज्यादातर निकायों के पास इस काम के लिए उपलब्ध बजट ही शून्य रह गया है। इस स्थिति को देखते हुए निकायों की ओर से नगरीय प्रशासन विभाग को रोड रेस्टोरेशन के लिए अतिरिक्त बजट का प्रस्ताव भेजा गया है। हांलाकि, इस प्रस्ताव को प्रारंभिक रूप से एसीएस संजय दुबे ने खारिज कर दिया है। वहीं कमिश्नर संकेत भोंडवे ने भी आपत्ति दर्ज की है।
मनमानी पड़ गई भारी
नगरीय निकायों में अभी तक पाइप लाइन बिछाने का काम पूरा नहीं हुआ है और बजट खत्म हो गया। ठेकेदारों ने रोड रेस्टोरेशन के नाम पर अलग से बिल थमा दिया है।
नगरीय निकायों ने भी प्रस्ताव आगे बढ़ा दिया। लेकिन इस होशियारी को एसीएस संजय दुबे ने पकड़ लिया। उन्होंने अतिरिक्त बजट की मांग को नकारते हुए पहले पूरी पाइप लाइन बिछाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही फाइल वापस लौटा दी गई है। उधर संचालनालय ने भी इस पर नाराजगी जताई है।
सख्ती से निकायों की मुश्किल
नगरीय प्रशासन विभाग की आपत्ति ने नगरीय निकायों को मुश्किल में डाल दिया है। मुख्यालय ने स्पष्ट कर दिया है कि वेरिएशन स्वीकृति नहीं दी जाएगी। एसीएस और कमिश्नर ने ठेकेदारों और निकायों द्वारा मनमानी खुदाई पर भी नाराजगी जताई है।
निर्माण एजेंसी मरम्मत के नाम पर तगड़ा बजट मिलने के चक्कर में योजना के प्रावधानों को अनदेखा कर खुदाई कर रही थीं। अब संचालनालय ने पाइपलाइन की मोटाई के आधार पर ही खुदाई कराने के निर्देश दिए गए हैं।
अधूरा काम पर दोहरा भुगतान
निर्माण एजेंसियां काम अधूरा होने के बाद भी अतिरिक्त भुगतान का दबाव बना रही हैं। असल पेंच ‘रोड रेस्टोरेशन’ में है। पाइप लाइन बिछाने के बाद सड़क को पुरानी शक्ल में तैयार करना था।
निकायों के अधिकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। लगातार मनमानी खुदाई के कारण कुछ सड़कों की मरम्मत में ही पूरा बजट खर्च हो गया। जबकि खुदाई का अनुपात पाइप लाइन बिछाने से कहीं अधिक है। निकायों द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर एसीएस का कहना है जब पाइप लाइन ही नहीं बिछी तो रेस्टोरेशन किस बात का?
मनमानी से बजट की बर्बादी
केंद्र ने अमृत 2.0 के लिए 12858.71 करोड़ दिए। इसमें 6240.50 करोड़ पीने के पानी, 4957.01 करोड़ सीवरेज, 589.38 करोड़ जल संरक्षण, उद्यान विकास और 1071.88 करोड़ रिफॉर्म पर खर्च किए जाने हैं। खर्च के लिए मद निर्धारित की गई हैं।
10 लाख से अधिक आबादी वाले भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर में केंद्र से 25%, राज्य से 58% और निकाय से 17% राशि खर्च की जानी है। वहीं 1 से 10 लाख आबादी वाले 29 शहरों में केंद्र से 33%, राज्य से 57% और नगरीय निकाय से 10% खर्च होंगे।
इसके अलावा 1 लाख से कम आबादी वाले 379 कस्बों में केंद्र से 50%, राज्य से 45% और निकाय से 5% राशि इन कामों के लिए तय है। इसके बावजूद राशि कम पड़ रही है।
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