स्कूलों में शिफ्ट होंगी आंगनवाड़ियां! खर्च घटाने की तैयारी या बच्चों की सुविधाओं पर संकट?
महिला एवं बाल विकास विभाग ने आंगनवाड़ी केंद्रों को लेकर बड़ा बदलाव शुरू कर दिया है। प्रदेश के शहरों और गांवों में निजी भवनों में चल रही आंगनवाड़ियों को अब सरकारी स्कूलों के खाली कमरों में शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है।
मध्यप्रदेश सरकार का दावा है कि इससे करोड़ों रुपए के किराए का खर्च बचेगा और सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा, लेकिन इस फैसले ने बच्चों की पढ़ाई, जगह की कमी और सुविधाओं को लेकर नए सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
आखिर क्यों लिया जा रहा यह फैसला?
सूत्रों के मुताबिक सरकार लगातार बढ़ते सामाजिक योजनाओं के खर्च के बीच अब विभागीय बजट में कटौती के रास्ते तलाश रही है। लाड़ली बहना जैसी योजनाओं पर हर महीने भारी राशि खर्च होने के बाद अब विभागों को खर्च कम करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। इसी रणनीति के तहत किराए के भवनों में चल रही आंगनवाड़ियों को सरकारी स्कूलों में शिफ्ट करने की कवायद तेज हुई है।
क्या बदलने वाला है?
अब अधिकारियों को ऐसे आंगनवाड़ी केंद्रों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं जो निजी भवनों में संचालित हो रहे हैं। इसके बाद आसपास के सरकारी स्कूलों में खाली कमरों की तलाश की जाएगी और वहीं आंगनवाड़ी केंद्रों को शिफ्ट किया जाएगा। इससे हर महीने जाने वाला किराया बचेगा और एक ही सरकारी परिसर में कई सेवाएं संचालित हो सकेंगी।
अब विभाग के सामने खड़ी चुनौती
दिलचस्प बात यह है कि विभाग पहले ही आंगनवाड़ी केंद्रों में लाइट, पानी, आरओ, वाटर प्यूरीफायर और टीवी जैसी सुविधाएं बढ़ाने के निर्देश दे चुकी है। लेकिन अब निजी भवनों में चल रहे केंद्रों को हटाने की तैयारी इस बात का संकेत भी मानी जा रही है कि विभाग फंड बचाने के दबाव में है। यानी सुविधाएं बढ़ाने और खर्च घटाने की दोहरी चुनौती अब विभाग के सामने खड़ी दिखाई दे रही है।
क्या स्कूलों पर बढ़ेगा दबाव?
इस फैसले को लेकर शिक्षा और बाल विकास क्षेत्र के विशेषज्ञों ने चिंता भी जताई है। कई सरकारी स्कूल पहले से ही कमरों की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में अगर उन्हीं परिसरों में आंगनवाड़ी केंद्र भी शुरू किए जाते हैं, तो बच्चों की पढ़ाई और आंगनवाड़ी गतिविधियों दोनों पर असर पड़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और ज्यादा चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है, जहां कई स्कूलों में पहले से पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है।
आंगनवाड़ी सिर्फ बच्चों की पढ़ाई नहीं
आंगनवाड़ी केंद्र सिर्फ प्री-स्कूल शिक्षा तक सीमित नहीं हैं। यह 0 से 6 साल तक के बच्चों और महिलाओं से जुड़ी कई सरकारी योजनाओं का अहम केंद्र हैं। यहां बच्चों को पोषण आहार, शुरुआती शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं दी जाती हैं।
इसके अलावा गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं की जांच, टीकाकरण, वजन मापन और पोषण सलाह जैसी सेवाएं भी संचालित होती हैं। कई केंद्रों पर किशोरी बालिकाओं के लिए भी विशेष कार्यक्रम चलाए जाते हैं।
फैसले से जुड़े बड़े सवाल...
- क्या सभी स्कूलों में पर्याप्त जगह उपलब्ध है?
- क्या बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी?
- क्या आंगनवाड़ी सेवाओं की गुणवत्ता बनी रहेगी?
- क्या ग्रामीण क्षेत्रों में यह मॉडल सफल हो पाएगा?
- इन सवालों के जवाब आने वाले समय में ही साफ हो पाएंगे।
- निजी भवनों में चल रही आंगनवाड़ियों को शिफ्ट करने की तैयारी
- सरकारी स्कूलों के खाली कमरों का होगा उपयोग
- सरकार किराया खर्च कम करने की रणनीति पर काम कर रही
- लाड़ली बहना जैसी योजनाओं के बढ़ते खर्च का असर
- स्कूलों में कमरों की कमी को लेकर बढ़ी चिंता
- बच्चों और महिलाओं की सेवाओं पर असर की आशंका
अब नजर फैसले के अमल पर
सरकार इसे खर्च बचाने और संसाधनों के बेहतर उपयोग का मॉडल बता रही है, लेकिन असली चुनौती यह होगी कि बच्चों की शिक्षा, पोषण और महिलाओं से जुड़ी सेवाओं पर इसका नकारात्मक असर न पड़े। आने वाले दिनों में यह फैसला प्रशासनिक सुधार साबित होगा या नई परेशानी, इस पर सभी की नजर रहेगी।
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