एक दिन गैरहाजिर तो कर दिया बर्खास्त, महिलाओं में होने वाली समस्या के चलते ली थी छुट्टी, HC- सजा 'मक्खी को हथौड़े से मारने' जैसी
वेंकटेश कोरी, JABALPUR. देश में अफसरशाही इस कदर हावी है कि अधिकारी अपने मातहत कर्मचारी की नौकरी छीनने से भी पीछे नहीं हटता। फिर चाहे उस कर्मचारी या उसके परिवार को कितनी ही तकलीफों से गुजरना पड़े। ऐसा ही एस वाकया खंडवा की रहने वाली ममता तिरोले के साथ हुआ जो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में पदस्थ है। ममता की मात्र एक दिन की छुट्टी परियोजना अधिकारी को इस कदर नागवार गुजरी कि पहले तो 8 दिन का वेतन काटने के आदेश दिए इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर बर्खास्त भी कर दिया।
पूरे मामले पर हाईकोर्ट ने भी हैरानी जताई
बर्खास्तगी के शोकॉज नोटिस के बाद ममता तिरोले ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की। महज एक दिन की गैर हाजिरी को आधार मानकर सेवा से बर्खास्तगी की सजा दिए जाने के रवैये पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हैरानी जताई है। इस मामले की सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस सुजय पॉल ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि एक दिन की अनुपस्थिति पर सेवा से बर्खास्तगी जैसी सजा देना "मक्खी को हथौडे से मारने" जैसा है। इस तल्ख टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने सेवा से बर्खास्त एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को 60 दिन के भीतर नौकरी में फिर से बहाल करने और सभी देय लाभ दिए जाने के निर्देश दिए हैं।
ये है पूरा मामला
खंडवा की रहने वाली ममता तिरोले ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि वह आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में पदस्थ हैं और 6 जनवरी 2020 को उन्हें एक शोकॉज नोटिस आया, यह शोकॉज नोटिस नौकरी पर एक दिन गैर हाजिर रहने को आधार मानकर कर भेजा गया था। इस नोटिस के जवाब में याचिकाकर्ता महिला ममता तिरोले ने विभाग को बताया कि महिलाओं को होने वाली समस्या के चलते वे 27 दिसंबर 2019 को कार्य पर उपस्थित नहीं हो पाई थी इसके बाद परियोजना अधिकारी ने 10 जनवरी 2020 को उसे 8 दिन की वेतन की कटौती का दंड दिया। इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर 27 जनवरी 2020 को परियोजना अधिकारी ने अपने पूर्व आदेश को वापस लेते हुए महिला को सेवा से बर्खास्त कर दिया जिसके बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ममता तिरोले ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में यह याचिका दायर की।
कामकाजी महिलाओं के लिए पीरियड्स लीव की मांग
महिलाओं के मासिक धर्म के दौरान दर्द में आराम के लिए छुट्टी सुनिश्चित करने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। जिसके संबंध में सुप्रीम कोर्ट मासिक धर्म अवकाश का नियम बनाने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है। पीरियड्स के समय में छुट्टी वाली याचिका में सभी राज्य सरकारों को यह निर्देश देने की मांग की गई थी कि वे छात्राओं और कामकाजी वर्ग की महिलाओं को उनके संबंधित कार्यस्थलों पर पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द के लिए नियम बनाएं और अवकाश भी प्रदान करें। भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा मामले का उल्लेख करने और मामले की जल्द सुनवाई की मांग के बाद मामले को 24 फरवरी को सुनवाई के लिए पोस्ट किया है।
स्पेन में महिलाओं के पक्ष में फैसला
स्पेन में आज महिलाओं की जीत हुई है। जी हां, पीरियड्स के दौरान छुट्टी (Menstrual Leave) यहां अब एक कानून बन गया है और इसी के साथ महिलाओं को पीरियड्स में छुट्टी एक बड़ा अधिकार मिलेगा। दरअसल, पिछले कई सालों से इस पर बहस चल रही थी। 16 फरवरी को स्पेन के सांसदों ने पीरियड्स में मेडिकल लीव (medical leave to women suffering severe period pain) को अंतिम मंजूरी दे दी, इस तरह के कानून को आगे बढ़ाने वाला पहला यूरोपीय देश बन गया। मासिक धर्म की छुट्टी फिलहाल कुछ ही देशों में है जिसमें जापान, इंडोनेशिया और जाम्बिया सहित दुनिया भर के कई देश शामिल हैं।
मेडिकल लीव के तहत मिलेंगी छुट्टियां
दरअसल, इस फैसले के लिहाज से अब महिलाओं को पीरियड्स में अलग से मेडिकल लीव मिलेगा। इस दौरान महिलाएं छुट्टी के लिए टैब चुनने के साथ-साथ इसकी समय सीमा भी तय कर पाएंगी। इस दौरान उन्हें अधिकार होगा कि वे इन छुट्टियों को आराम से ले सकेंगी। इस मेंस्ट्रूअल लीव का उद्देश्य उन महिलाओं को राहत देना है जिन्हें पीरियड्स में भारी दर्द का सामना करना पड़ता है। इस दौरान अक्सर महिलाएं डिस्कम्फर्ट के साथ और कई बार तेज दर्द, सिरदर्द और बुखार के साथ काम करती है।