बजट ने अटकाया शिक्षकों का वेतन, अनुदान प्राप्त स्कूलों के सैकड़ों टीचर परेशान
ऐसे समझें पूरा मामला..
- अनुदान स्कूलों में वेतन दो महीने से रुका
- 926 शिक्षक-कर्मचारी आर्थिक संकट से जूझ रहे
- डीईओ ने समय पर डीपीआई को नहीं भेजी रिपोर्ट
- मई में मिले बजट से मार्च- अप्रैल का वेतन बांटा
- शिक्षक मई और जून के वेतन का कर रहे इंतजार
मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में लापरवाही फिर सामने आई है। लोक शिक्षण संचालनालय के निर्देश के बावजूद प्रदेश की 600 अनुदान प्राप्त शैक्षणिक संस्थाओं के शिक्षकों को तीन महीने से वेतन नहीं मिला है।
डीईओ द्वारा भौतिक सत्यापन रिपोर्ट समय पर नहीं भेजे जाने से बजट अटक गया है। इससे 926 शिक्षक और कर्मचारी आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। शिक्षक संघ ने अब डीपीआई से हस्तक्षेप की मांग की है।
अनुदानित संस्थाओं में वेतन संकट
प्रदेश में 600 से अधिक अनुदान प्राप्त स्कूल संचालित हैं। इनमें हजारों विद्यार्थी पढ़ते हैं। इन स्कूलों के शिक्षकों को सरकारी अनुदान से ही वेतन मिलता है। सरकार बजट जारी करती है। लोक शिक्षण संचालनालय मांग के आधार पर राशि बांटता है। इसके लिए हर साल भौतिक सत्यापन जरूरी होता है।
सत्र 2026-2027 के लिए भी डीपीआई ने अप्रैल में निर्देश दिए थे। लेकिन जिला शिक्षा अधिकारियों ने रिपोर्ट समय पर नहीं भेजी। इसी देरी के कारण मई और जून का वेतन नहीं बंट पाया है। अब जुलाई भी खत्म होने वाला है। शिक्षक परेशान हैं।
बजट की देरी से रुका वेतन
डीपीआई ने 29 अप्रैल को पत्र जारी किया था। इसमें अनुदानित स्कूलों का सत्यापन ब्यौरा मांगा गया था। 22 मई को दो माह का बजट भी रिलीज किया गया। कुल 12.34 करोड़ रुपए आवंटित हुए। साथ में 2.44 करोड़ अतिरिक्त दिए गए। लेकिन यह राशि नए सत्र के वेतन में नहीं लगी। इससे सिर्फ मार्च-अप्रैल का बकाया ही चुकाया जा सका।
उप संचालक वित्त अमित श्रीवास्तव ने 7 दिन में भुगतान के निर्देश दिए थे। उन्होंने देरी पर जिम्मेदारी तय करने की बात भी कही थी। इसके बावजूद डीईओ की सुस्ती से शिक्षक वंचित रह गए।
कितने शिक्षक प्रभावित
मध्य प्रदेश के 43 जिलों में 926 शिक्षक और कर्मचारी प्रभावित हैं। ये सभी अप्रैल 2000 से पहले से कार्यरत हैं। सबसे ज्यादा 155 कर्मचारी जबलपुर जिले में हैं। ग्वालियर में 93 और इंदौर में 79 कर्मचारी हैं। मुरैना में 76 शिक्षक हैं।
बाकी जिलों में संख्या 50 से कम है। इन सभी का वेतन पूरी तरह अनुदान पर निर्भर है। वेतन न मिलने से घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। कई शिक्षक कर्ज लेने को मजबूर हैं।
शिक्षक संघ ने की मांग
इस परेशानी को लेकर मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ सक्रिय हुआ है। संगठन के प्रांत अध्यक्ष एलबी सेठ और महामंत्री अरुण कुमार गुबरेले ने डीपीआई कमिश्नर को पत्र सौंपा है। उन्होंने तुरंत वेतन जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि डीपीआई ने समय पर बजट दे दिया था। लेकिन डीईओ की लापरवाही से पैसा उपयोग नहीं हो पाया। संघ ने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की भी मांग की है। अब डीपीआई ने सभी डीईओ से 7 दिन में रिपोर्ट मांगी है।
FAQ
- अनुदान प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों का वेतन क्यों रुका है?
मध्य प्रदेश में अनुदान प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों का वेतन डीईओ द्वारा भौतिक सत्यापन रिपोर्ट समय पर न भेजने से रुका है। डीपीआई ने 22 मई को 12.34 करोड़ का बजट जारी किया था। लेकिन रिपोर्ट न आने से राशि का उपयोग नए सत्र के लिए नहीं हो सका। - इस वेतन संकट से कितने शिक्षक प्रभावित हैं?
इस संकट से प्रदेश के 43 जिलों के 926 शिक्षक और कर्मचारी प्रभावित हैं। ये सभी अप्रैल 2000 से पहले से अनुदान प्राप्त संस्थाओं में काम कर रहे हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित जबलपुर, ग्वालियर, इंदौर और मुरैना जिले हैं। इनका पूरा वेतन सरकारी अनुदान से आता है। - वेतन कब तक मिलेगा और क्या समाधान है?
डीपीआई ने सभी डीईओ से 7 दिन में भौतिक सत्यापन रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट मिलते ही मई और जून माह का बजट जारी किया जाएगा। विभाग ने देरी पर जिम्मेदारी तय करने की बात भी कही है। शिक्षक संघ की मांग है कि अगस्त के पहले सप्ताह तक सभी का बकाया वेतन दे दिया जाए।
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