सूत्र की मुहिम को समर्थन: अरेरा कॉलोनी में दुकानों के विरोध में उतरे लोग, बैनर से दी चेतावनी
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- भोपाल की कॉलोनियों में होटल, दुकान, शोरूम अवैध रूप से चल रहे।
- कोर्ट की डेडलाइन के बाद भी सिर्फ 429 को नोटिस भेज सका निगम।
- अरेरा, रचना नगर, गौतम नगर में बैनर लगाकर विरोध शुरू ।
- कोर्ट ने 30 जुलाई तक रिपोर्ट मांगी, अगली सुनवाई 4 अगस्त को।
- भूमि उपयोग में बदलाव के नोटिफिकेशन से गहराएगा संकट।
रिहायशी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों पर नागरिकों का विरोध सुप्रीम कोर्ट में निगम और अफसरों की मुश्किल बढ़ा सकता है। इसकी वजह नगर निगम और प्रशासन की सुस्ती है।
अमेकस क्यूरी की निगरानी और 4 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने के बावजूद निगम अब तक केवल नोटिस ही जारी कर पाया है। जबकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक्शन टेकन रिपोर्ट तलब की गई है।
इधर अफसरों की बेफिक्री देख अरेरा कॉलोनी और रोहित नगर के बाद अब रचना नगर और गौतम नगर के रहवासी भी मुखर हो चले हैं। रहवासियों ने बैनर लगाकर व्यावसायिक गतिविधियों का विरोध शुरू कर दिया है।
अरेरा कॉलोनी के रहवासी लंबे अरसे से बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों का विरोध कर रहे हैं। आवासीय लैंड पर दुकानों का निर्माण, घरों को होटल, रेस्टोरेंट में बदले जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।
वहीं कोर्ट द्वारा गाइडलाइन भी जारी कर एक्शन टेकन रिपोर्ट तलब की गई है। रिपोर्ट निगम को 30 जुलाई तक पेश करनी है। अब तक केवल 429 लोगों को नोटिस ही जारी किए गए हैं।
रहवासियों का कहना है व्यापारी और नेताओं के दबाव में कार्रवाई टाल रहे हैं। अब लोगों ने सरकार को जगाने के लिए कॉलोनियों में बैनर लगाकर विरोध भी शुरू कर दिया है।
घिर सकता है नगरीय प्रशासन विभाग
अरेरा कॉलोनी के रहवासी पूर्णेन्दु शुक्ल ने बताया सुप्रीम कोर्ट में 4 अगस्त को सुनवाई तय है। कोर्ट ने निगम को कार्रवाई करने की रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए थे। लंबा समय बीत चुका है, लेकिन निगम केवल 429 नोटिस ही भेज पाया है।
एक भी दुकान या भूखंड के अनाधिकृत उपयोग पर कार्रवाई नहीं की गई है। शहर में अनाधिकृत उपयोग वाले 30 हजार से अधिक मकान- दुकानों को सील करने का दावा किया गया था। हांलाकि इन्हें अब तक नोटिस भी जारी नहीं किए जा सके।
कमाई की दौड़ ने छीन लिया सुकून
कमाई की अंधी दौड़ ने घरों को दुकानों में बदल दिया है। अरेरा कॉलोनी, रचना नगर, गौतम नगर, रोहित नगर जैसी आवासीय कॉलोनियों में मार्केट का कोलाहल गहरा गया है।
सड़कों पर शोर-शराबा और वाहनों का हॉर्न गूंजता है। शांत, हरी-भरी कॉलोनियों को प्रदूषण ने जकड़ लिया है। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाओं के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। आवासीय कॉलोनियां बाजार में तब्दील हो रही हैं। मास्टर प्लान की पाबंदियां टूट रही हैं और जिम्मेदार चुप हैं।
सरकारी नोटिफिकेशन पर भी सवाल
नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग द्वारा हाल ही में भूमि उपयोग नियमों में बदलाव किए गए हैं। नोटिफिकेशन के प्रावधान आवासीय कॉलोनियों में अनाधिकृत व्यावसायिक उपयोग को सहारा देने वाले हैं।
कॉलोनियों के रहवासी आपत्ति भी दर्ज करा चुके हैं। सीएम डॉ.मोहन यादव से लेकर मुख्य सचिव को पत्र भेजे गए हैं। अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान नगरीय प्रशासन विभाग के इसी नोटिफिकेशन पर सरकार को घेरने की तैयारी की जा रही है।
नागरिक मुखर, बना रहे रणनीति
अरेरा कॉलोनी के रहवासियों ने सबसे पहले घरों को दुकान में बदले जाने का विरोध शुरू किया था। रचना नगर और गौतम नगर के रहवासियों ने कॉलोनी के गेट और अन्य स्थानों पर बड़े-बड़े बैनर भी लगा दिए हैं। इनके माध्यम से नगर निगम, प्रशासन और सरकार को सीधे तौर पर चेतावनी दी गई है।
लोग आवासीय क्षेत्रों को बाजार बनने से रोकने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कॉलोनी की सड़कों पर जाम लगा रहता है, शोर और प्रदूषण उनका स्वास्थ्य बिगाड़ रहा है। जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे रहे तो उनके सामने पलायन का ही विकल्प बचेगा।
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