करोड़ों का टैक्स डकार गया नर्मदापुरम नपा का सिंडिकेट, कर्मचारी रंगे हाथ धराए

Aman Vaishnav | Jul 12, 2026, 10:51 IST
नर्मदापुरम नगरपालिका में घोटाला
नर्मदापुरम नगरपालिका में करीब आठ करोड़ रुपए का राजस्व घोटाला सामने आया है। टैक्स और किराए के नाम पर फर्जी रसीदें काटकर पैसे हड़पने के आरोप में दो कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज हुई है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • नर्मदापुरम नगरपालिका में करोड़ों रुपए का राजस्व घोटाला सामने आया है।
  • वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2022-23 के बीच सात करोड़ 78 लाख रुपए से ज्यादा राशि गायब मिली है।
  • पुलिस ने दो मुख्य कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और गबन का केस दर्ज किया है।
  • यह कार्रवाई विधानसभा में सवाल उठने और जांच रिपोर्ट की पुष्टि के बाद हुई है।
  • आरोप है कि फर्जी रसीदें जारी कर पूरा पैसा हड़प लिया गया।

दरअसल नर्मदापुरम शहर की नगरपालिका पिछले कई सालों से एक गंभीर वित्तीय गड़बड़ी की चपेट में थी। यह मामला अब पुलिस जांच तक पहुंच चुका है। शुक्रवार, 11 जुलाई की देर रात कोतवाली पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है।



घोटाले का खुलासा कैसे हुआ

बता दें कि यह पूरा मामला करीब एक साल पहले शुरू हुआ था। नगरपालिका अध्यक्ष अभय वर्मा ने इस गड़बड़ी की शिकायत की थी। इसके बाद संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास, भोपाल ने तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई। समिति की रिपोर्ट में गड़बड़ी की पुष्टि हुई। इसी रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू की है।



जांच के बाद राजस्व विभाग के एआरआई ( Assistant Revenue Inspector) हरीश गोस्वामी और कंप्यूटर ऑपरेटर भुवन मेहता को नामजद आरोपी बनाया गया है। दोनों पर धोखाधड़ी, कूटरचना और शासकीय राशि के गबन की धाराएं लगाई गई हैं।



कैसे हुआ गबन

शिकायतकर्ता के मुताबिक कर्मचारियों ने करदाताओं को टैक्स, किराए और अन्य मदों की रसीदें जारी कीं। यह रसीदें असली दिखती थीं। लेकिन बाद में इनका डेटा सॉफ्टवेयर से डिलीट या निरस्त कर दिया जाता था। इस तरह पूरी राशि कर्मचारी खुद रख लेते थे।



रसीद कटना और उसका पैसा बैंक तक न पहुंचना, यही इस पूरे मामले की सबसे बड़ी गड़बड़ी है। यह पैटर्न बताता है कि नगरपालिका के भीतर एक संगठित सिंडिकेट काम कर रहा था।



सॉफ्टवेयर बंद कर छुपाया मामला

जानकारी के अनुसार घोटाले को छुपाने के लिए बिना किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति के सॉफ्टवेयर बंद कर दिया गया था। इससे लेन-देन का रिकॉर्ड ट्रैक करना मुश्किल हो गया।



इतना ही नहीं, जांच समिति में उसी व्यक्ति को मुखिया बना दिया गया था, जो खुद मुख्य आरोपी बताया जा रहा है। इससे शुरुआती जांच पर भी सवाल खड़े हुए थे।



पीड़ित की आपबीती

वार्ड 30 ग्वालटोली निवासी इमरतलाल, जिन्हें मुन्ना ग्वाला के नाम से भी जाना जाता है, ने भी इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि उन्होंने कॉलोनाइजर पंजीकरण शुल्क के तौर पर 50 हजार रुपए नगद जमा कराए थे।



भुवन मेहता के यूजर आईडी से उन्हें रसीद भी जारी हुई। रसीद पर नगरपालिका की सील भी लगी थी। लेकिन यह पैसा नगरपालिका के मुख्य कोष में कभी पहुंचा ही नहीं।



पुलिस और प्रशासन का बयान

टीआई कोतवाली गौरव बुंदेला ने बताया कि इस मामले की शिकायत करीब एक साल पहले पुलिस अधीक्षक को की गई थी। एसडीओपी की जांच के बाद नपा राजस्व अमले के दो कर्मचारियों हरीश गोस्वामी और भुवन मेहता पर एफआईआर दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि तकनीकी और वित्तीय जांच अभी जारी है।



वहीं नर्मदापुरम नपा के सीएमओ ( Chief Municipal Officer) वैभव देशमुख ने इसे पुराना प्रकरण बताया है। उनका कहना है कि पुलिस की जांच के आधार पर ही राजस्व अमले के दो कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज हुआ है।



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