रेप के आरोप में मुरैना डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर गिरफ्तार, कोर्ट ने भेजा जेल
मुरैना जिला मुख्यालय में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर को बुधवार की रात रेप केस में गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के कुछ ही देर बाद उनका ब्लड प्रेशर (BP) काफी बढ़ गया था। पुलिस उन्हें गुरुवार सुबह करीब 4 बजे अस्पताल लेकर पहुंची।
इलाज के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। जज के आदेश पर माहौर को मुरैना जेल भेज दिया गया है।
डिप्टी कलेक्टर ने कहा आरोप गलत है...
कोर्ट में पेशी से पहले एक दिलचस्प तस्वीर भी सामने आई है। थाने में आरोपी डिप्टी कलेक्टर माहौर आराम से टहलते हुए मोबाइल फोन इस्तेमाल करते नजर आए थे।
पेशी पर जाते वक्त माहौर ने कहा कि सब गलत है। लड़की ने सिर्फ एफआईआर (FIR) दर्ज कराई है। अभी मैं आरोपी साबित नहीं हुआ हूं। बाद में बात करता हूं।
फेसबुक से शुरू हुई थी दोस्ती
सिविल लाइन थाना प्रभारी टीआई उदयभान यादव के मुताबिक, पीड़िता ने 03 जून की रात थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। युवती ने बताया कि अरविंद माहौर से उसकी पहचान फेसबुक के जरिए हुई थी।
धीरे-धीरे फोन पर बात बढ़ी और माहौर ने शादी का प्रस्ताव दिया था। युवती राजी हो गई। इसी भरोसे का फायदा उठाकर शोषण का लंबा सिलसिला शुरू हुआ।
30 मार्च 2025 से 3 जून 2026 तक चला शोषण
पीड़िता के मुताबिक 30 मार्च 2025 को माहौर उसे घर के पास से कार में बैठाकर मुरैना के रेस्ट हाउस ले गए। वहां कार के अंदर ही उसकी मर्जी के खिलाफ शारीरिक संबंध बनाए गए। उसके बाद उसे सबलगढ़ स्थित सरकारी आवास और फिर ग्वालियर के निजी फ्लैट पर भी ले जाया गया, जहां भी शोषण हुआ।
पीड़िता का कहना है कि यह सिलसिला 30 मार्च 2025 से 3 जून 2026 तक बिना रुके चलता रहा। जब उसने शादी की मांग की, तो माहौर मुकर गए और उसके परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकियां देने लगे।
पुलिस ने बीएनएस की धारा 69, 351(1), 351(3) और 225 के तहत मामला दर्ज किया है।
एफआईआर में महिला मित्र का नाम भी
पीड़िता ने एफआईआर में माहौर की एक महिला मित्र का नाम भी लिया है। आरोप है कि महिला मित्र ने उस पर शिकायत न करने और समझौता करने का दबाव बनाया था। मना करने पर जान से मरवाने की धमकी दी थी।
माहौर ने इससे इनकार करते हुए कहा कि वे ऐसी किसी महिला को नहीं जानते और यह नाम उन्होंने पहली बार सुना है।
CM कर चुके बर्खास्त, फिर भी जारी रहा विवाद
एसडीएम अरविंद माहौर का विवादों से पुराना नाता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 19 सितंबर 2025 को उन्हें महिलाओं से गलत आचरण और दुर्व्यवहार के चलते बर्खास्त कर दिया था। उस मामले में एक छात्रा पर रात में फोन पर बात करने का दबाव बनाने का आरोप था। पीड़िता का परिवार ग्वालियर से मुरैना पहुंचकर कलेक्टर की जनसुनवाई में गुहार लगाने गया था।
बर्खास्तगी के बाद माहौर को बहाल किया गया और वे फिर से मुरैना मुख्यालय पर पदस्थ हो गए। अब नए और गंभीर आरोपों ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
थप्पड़ कांड भी रहा है दामन पर
माहौर सिर्फ यौन उत्पीड़न के आरोपों तक सीमित नहीं रहे हैं। 2025 में एक निजी होटल के कार्यक्रम में कार पार्किंग को लेकर उन्होंने एक सुरक्षा गार्ड को थप्पड़ मार दिया था। यह घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी और खूब चर्चा में आई थी।
इसी साल सबलगढ़ में एसडीएम रहते हुए जनसुनवाई के दौरान एक ग्रामीण को थप्पड़ मारकर भगाने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। यानी माहौर पर लगातार कई तरह के गंभीर आरोप लगते रहे हैं।
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