लता से ज्यादा आशा ताई को था इंदौर से लगाव, डेढ़ दशक पहले आई थीं तो रिश्तेदार के घर से बुलवाया खाना
भारतीय संगीत जगत की महान हस्ती आशा भोसले का 92 वर्ष की आयु में निधन संगीत प्रेमियों के लिए एक युग के अंत जैसा है। मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली, लेकिन उनकी आवाज और यादें सदैव जीवित रहेंगी। उनके जीवन का एक बेहद महत्वपूर्ण और भावनात्मक अध्याय मध्य प्रदेश, विशेष रूप से इंदौर से जुड़ा रहा है।
क्या आप जानते हैं कि भारत की दिग्गज गायिका Asha Bhosle का मध्य प्रदेश के शहर इंदौर (Indore) से एक खास और दिलचस्प रिश्ता रहा है? ये रिश्ता सिर्फ गानों तक नहीं… बल्कि यादों, स्वाद और अपनेपन से भी जुड़ा है!
रिश्तेदार के घर से आया था खाना
करीब 17 साल पहले जब आशा भोसले एक कार्यक्रम के सिलसिले में इंदौर आईं, तो उन्होंने शहर के प्रतिष्ठित सयाजी होटल में ठहरना चुना। लेकिन इस दौरे की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने होटल के व्यंजनों के बजाय अपने रिश्तेदार के घर से खाना मंगवाया था। उनके करीबी बताते हैं कि उनका इंदौर से लगाव लता मंगेशकर से भी अधिक था।
इंदौर से गहरा रिश्ता
आशा ताई का बचपन इंदौर के छावनी क्षेत्र के मुराई मोहल्ले में बीता। यही वह जगह है, जहां उन्होंने अपने जीवन के शुरुआती और बेहद अहम वर्ष बिताए। उस समय का इंदौर आज के मुकाबले काफी अलग था, लेकिन यहां की संस्कृति, अपनापन और खान-पान ने उनके व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित किया।
उनके परिवार का संबंध प्रसिद्ध संगीतकार दीनानाथ मंगेशकर से था, जिनकी नाटक कंपनी के कारण परिवार इंदौर में रहा। उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर का जन्म भी यहीं हुआ, जो इंदौर के इतिहास का गौरवपूर्ण हिस्सा है।
सराफा की मिठाइयों से खास लगाव
इंदौर का सराफा बाजार सिर्फ व्यापार का केंद्र नहीं, बल्कि स्वाद का भी स्वर्ग है। आशा भोसले को यहां की खाऊ गली के व्यंजन बेहद पसंद थे। खासकर गुलाब जामुन (Gulab Jamun), रबड़ी (Rabri) और दही बड़े (Dahi Bada)। बचपन में वे अक्सर सराफा चौपाटी जाया करती थीं। इन व्यंजनों का स्वाद उनके दिल में इतना बस गया था कि वे बाद में भी इंदौर आने पर इन्हें जरूर याद करती थीं।
सीहोर के शरबती गेहूं का स्वाद भाता था
इंदौर के साथ-साथ सीहोर का भी उनके जीवन में विशेष स्थान था। यहां का प्रसिद्ध शरबती गेहूं उन्हें बेहद पसंद था। इस गेहूं से बनी रोटियों का स्वाद उन्हें अच्छा लगता था। दरअसल, शरबती गेहूं की रोटियां मुलायम और स्वाद में मीठी लगती थी। इसी कारण वे कई बार इंदौर से शरबती गेहूं मंगवाती थीं। यह गेहूं भारत के सबसे बेहतरीन गेहूं में गिना जाता है और इसकी रोटियां बेहद स्वादिष्ट और पौष्टिक होती हैं।
बचपन की संघर्ष भरी यादें
आशा भोसले का बचपन सिर्फ स्वाद और संस्कृति से ही नहीं, बल्कि संघर्ष से भी भरा रहा। उनके रिश्तेदारों के अनुसार, वे अपनी बहनों और मां के साथ छावनी से तोपखाना तक करीब 2.5 किलोमीटर पैदल चलकर भोजन के लिए जाती थीं। यह दौर उनके जीवन का कठिन समय था, जिसने उन्हें मजबूत और आत्मनिर्भर बनाया।
विजयवर्गीय ने जताया शोक
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि आशा भोसले की आवाज ने भारतीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्होंने यह भी कहा कि इंदौर से उनका जुड़ाव शहर के लिए गर्व की बात है।
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