92 करोड़ मिले और बदल गया बायपास का नक्शा, 350 बीघा जमीन पर बड़ा खेल?
समझें क्या है पूरा मामला
- अशोकनगर बायपास के लिए पहले 92 करोड़ रुपए मंजूर हुए।
- मंजूरी के बाद बायपास की पुरानी ड्राइंग बदल दी गई।
- नए रूट के आसपास करीब 350 बीघा जमीन खरीदी गई।
- रूट बदलाव से सरकार पर 26 करोड़ अतिरिक्त बोझ पड़ा।
- जमीन खरीदी और ड्राइंग बदलाव को लेकर सवाल उठे।
92 करोड़ की मंजूरी
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 1 सितंबर 2025 को अशोकनगर बायपास के लिए 92 करोड़ रुपए मंजूर किए थे। यह मांग केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से लंबे समय से की जा रही थी। अशोकनगर शहर के लिए बायपास की जरूरत काफी समय से महसूस हो रही थी। स्थानीय जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता भी बार-बार सिंधिया से इस मांग को दोहराते रहे।
सिंधिया ने खुद गडकरी से बायपास के लिए राशि स्वीकृत कराई। इसकी जानकारी उन्होंने लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर दी। यह पत्र 1 सितंबर 2025 को भेजा गया। राशि स्वीकृति की यह सूचना जैसे ही अशोकनगर पहुंची, हलचल शुरू हो गई।
रूट क्यों बदला गया
मूल बायपास करीब 12 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित था। इसे भविष्य की नई कृषि उपज मंडी और शहर के नियोजित विकास को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। लेकिन राशि स्वीकृत होने के कुछ ही महीनों बाद अधिकारियों ने इस ड्राइंग को बदल दिया।
नया रूट 14.5 किलोमीटर लंबा कर दिया गया। इससे बायपास का दायरा उन इलाकों तक पहुंच गया, जहां पहले से जमीन खरीदने की तैयारी चल रही थी। पुरानी ड्राइंग बनाने वाले इंजीनियरों और पटवारियों से यह काम छीन लिया गया। इसके बाद संदिग्ध तरीके से नई ड्राइंग बनवाकर उसे स्वीकृत करा लिया गया। रूट बदलने से सरकार को करीब 26 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।
350 बीघा जमीन का राज
नई ड्राइंग में सबसे अहम बात यह सामने आई कि जिस जमीन की रजिस्ट्रियां पहले हो चुकी थीं, बायपास ठीक उसी जमीन से होकर निकाला गया। बायपास के दोनों ओर करीब 350 बीघा यानी लगभग 150 एकड़ जमीन की रजिस्ट्रियां हुई हैं। ये रजिस्ट्रियां राशि स्वीकृत होने के बाद के महीनों में हुई हैं।
इन खरीदारों में एक मंत्री के अलावा ग्वालियर और कर्नाटक के लोग भी शामिल बताए जा रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि जब रूट अभी बदला नहीं गया था, तो खरीदारों को नए रूट की जानकारी पहले कैसे मिल गई। इससे शक जताया जा रहा है कि सरकारी तंत्र से ही गोपनीय जानकारी भूमाफिया और दलालों तक लीक हुई।
इन लोगों ने खरीदी जमीन
बताया जा रहा है कि दिसंबर 2025 में कई बड़ी जमीन खरीदी दर्ज हुईं। रंजीत रघुवंशी ने 10, 11 और 12 दिसंबर 2025 को अलग-अलग करीब 20.87 हेक्टेयर जमीन खरीदी। विश्ववीर रघुवंशी ने 11 दिसंबर को करीब 12.552 हेक्टेयर जमीन की रजिस्ट्री कराई।
सत्येंद्र रघुवंशी, रंजीत रघुवंशी और विश्ववीर रघुवंशी के नाम से करीब 1.197 हेक्टेयर जमीन की एक और रजिस्ट्री हुई। बेंगलुरु, कर्नाटक निवासी सुलक्षण कुलश्रेष्ठ ने भी करीब 0.418 हेक्टेयर जमीन खरीदी। 19 दिसंबर 2025 को कुछ और खरीदारों ने भी जमीन की रजिस्ट्री कराई, जिनमें एक जमीन का रकबा करीब 1.250 हेक्टेयर बताया गया है। ये सभी जमीनें ठीक उसी इलाके में हैं, जहां से नया बायपास रूट निकल रहा है।
अफसरों की भूमिका और आरोप
आरोप है कि इस पूरे मामले में अधिकारियों ने राजस्व विभाग, लोक निर्माण विभाग और भूमाफिया की मिलीभगत से काम किया। पुरानी डीपीआर (DPR – Detailed Project Report) को बदलकर नया घुमावदार रूट तैयार किया गया। इंजीनियरों और पटवारियों को इस प्रक्रिया से दूर रखा गया।
सिंधिया को अंधेरे में रखा गया?
स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं का आरोप है कि अधिकारियों ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी इस बदलाव की जानकारी नहीं दी। विभागीय सूत्रों के अनुसार, सिंधिया ने जिस उद्देश्य से बायपास मंजूर कराया था। नया रूट उस उद्देश्य से मेल नहीं खाता। इसे लेकर अब मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रमुख सचिव अनुराग जैन से शिकायत करने की तैयारी की जा रही है।
अब आगे क्या होगा
स्थानीय लोगों की मांग है कि रूट बदलने के तकनीकी कारणों के दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। अगर बदलाव का कोई ठोस आधार नहीं मिलता, तो मामले की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए। फिलहाल यह मामला अशोकनगर में चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है।
FAQ
- अशोकनगर बायपास के लिए कितनी राशि मंजूर हुई थी?
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 1 सितंबर 2025 को अशोकनगर बायपास के लिए 92 करोड़ रुपए मंजूर किए थे। यह राशि 12 किलोमीटर लंबे बायपास के लिए तय हुई थी। बाद में रूट बदलकर 14.5 किलोमीटर कर दिया गया। - बायपास की ड्राइंग क्यों बदली गई?
आरोप है कि नए रूट के आसपास पहले से जमीन खरीदने वालों को फायदा पहुंचाने के लिए ड्राइंग बदली गई। रूट बदलने से सरकार पर 26 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ा। मामले की जांच की मांग उठ रही है।
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