अशोकनगर में मंदिरों की 2164 एकड़ जमीन होगी नीलाम, संत समाज ने जताई नाराजगी
समझें क्या है पूरा मामला...
- अशोकनगर जिले में 98 मंदिरों की दो हजार 164 एकड़ कृषि जमीन नीलाम होगी।
- यह जमीन 10 एकड़ से ज्यादा वाले मंदिरों की है।
- जिले में कुल 443 मंदिर हैं, जिनमें 271 में पुजारी नहीं हैं।
जमीन नीलामी की तैयारी
मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में संधारित मंदिरों को लेकर प्रशासन अब सख्त कदम उठा रहा है। जानकारी के अनुसार जिले में कुल 443 शासकीय मंदिर हैं। इन मंदिरों के नाम पर तीन हजार 161.422 एकड़ कृषि भूमि दर्ज है।
इनमें से 98 मंदिरों के पास 10 एकड़ से ज्यादा जमीन है। इन मंदिरों की कुल दो हजार 164.949 एकड़ जमीन को धर्मस्व विभाग नीलाम करने जा रहा है।
बता दें कि यह जमीन साल 2026-27 के खरीफ और रबी सीजन के लिए नीलाम होगी। इससे मंदिरों की आय बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
सबसे ज्यादा जमीन ईसागढ़ तहसील के मंदिरों की नीलाम होगी। यहां के 29 मंदिरों की 615.281 एकड़ जमीन नीलामी में शामिल है। यह जिले में अकेली सबसे बड़ी जमीन है।
संत समाज में नाराजगी
इस फैसले पर संत समाज ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि मंदिर की जमीन मंदिर की व्यवस्थाओं के लिए होती है। इस जमीन से सरकारी खजाना भरना गलत है। संतों का मानना है कि इस फैसले से मंदिरों की स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है।
271 मंदिरों में पुजारी नहीं
जमीन के मामले के साथ ही एक और बड़ी खामी सामने आई है। जिले के 443 मंदिरों में से सिर्फ 172 में ही पुजारी पदस्थ हैं। बाकी 271 मंदिरों में पुजारी का पद खाली है। इन मंदिरों में भगवान की आरती और भोग के लिए कोई पुजारी नहीं है।
सबसे खराब स्थिति बहादुरपुर और पिपरई में है। बहादुरपुर के 44 मंदिरों में से सिर्फ 2 में पुजारी हैं। बाकी 42 पद खाली हैं। पिपरई के 17 मंदिरों में से सिर्फ एक में पुजारी है। यहां 16 पद रिक्त हैं।
मुंगावली और शाढ़ौरा की स्थिति इनकी तुलना में बेहतर बताई जा रही है। अब प्रशासन ने इन 271 खाली पदों पर पुजारी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
पुजारी ने ही बेची मंदिर की जमीन
जानकारी के अनुसार आय बढ़ाने की कोशिश के बीच एक बड़ा अतिक्रमण भी सामने आया है। शहर के बीच स्थित श्री गोपाल मंदिर और धनुषधारी मंदिर के नाम पर कुल 340.372 एकड़ जमीन है। इसमें से 55.59 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण हो चुका है।
इस मामले में धनुषधारी मंदिर के पुजारी कमलदास पर आरोप है। उन्होंने फर्जी नोटरी के जरिए सरकारी जमीन बेच दी थी। इस जमीन पर अब करीब एक हजार पक्के मकान बन चुके हैं।
पुजारी के खिलाफ पुलिस थाने में दो बार एफआइआर दर्ज हो चुकी है। इस अतिक्रमण को हटाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
प्रशासन का क्या कहना है
संयुक्त कलेक्टर सोनम जैन ने इस मामले में जानकारी दी है। उनके मुताबिक 10 एकड़ से ज्यादा जमीन वाले मंदिरों की भूमि एक साल के लिए नीलाम की जाएगी। साथ ही बताया कि जिन मंदिरों में पुजारी नहीं हैं वहां पुजारी नियुक्त कर रहे हैं।
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