अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विवि की भर्ती प्रक्रिया सवालों में, अफसरों के रिश्तेदारों को ही पद देने का आरोप

Aman Vaishnav | Apr 15, 2026, 14:18 IST
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भोपाल के अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में घोटाले का आरोप है। बताया जा रहा है कि 150 आवेदन में सिर्फ 25 उम्मीदवार योग्य थे, फिर भी 13 अफसरों के रिश्तेदारों को ही नौकरी दी।

फिर चर्चा में अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय

भोपाल का अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विवि एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह कुछ और ही है। विश्वविद्यालय पर आरोप लग रहे हैं कि यहां असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती सिफारिश, रिश्तेदारी और प्रभावशाली लोगों की पकड़ के जरिए की गई है न कि मेरिट के आधार पर।



कई ऐसे नाम सामने आए हैं जो सीधे तौर पर विश्वविद्यालय के अधिकारियों और प्रबंधन से जुड़े हुए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मामला हाईकोर्ट में है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने बिना किसी झिझक के इन 13 प्रोफेसरों की ट्रेनिंग खत्म करके उन्हें स्थायी कर दिया।



इससे न केवल नियमों की अनदेखी के आरोप लगे हैं, बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता भी सवालों के घेरे में आ गई है।



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150 आवेदन पर 25 उम्मीदवार ही योग्य

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार विश्वविद्यालय को असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर करीब 150 आवेदन मिले थे। इनमें से सिर्फ 25 उम्मीदवारों को ही योग्य माना गया। जब सिलेक्शन सूची जारी हुई तो उसमें ऐसे नाम भी थे जो उच्च पदस्थ अधिकारियों, राजनीति और विश्वविद्यालय प्रबंधन से जुड़े हुए थे।



यह स्थिति कई सवाल उठाती है कि जब योग्य उम्मीदवार मौजूद थे तो ऐसे नाम चयन सूची में कैसे आए? इससे यह भी लगता है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही।



भर्ती प्रक्रिया पर जांच की मांग

आरोप है कि इस भर्ती के विज्ञापन में पहले दिव्यांगों के लिए आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं था। इसे बाद में दस्तावेजों में बदलाव करके जोड़ दिया गया। पहले के विज्ञापन में एग्रीकल्चर और इंजीनियरिंग जैसे विषय थे, लेकिन बाद में उन्हें हटा कर भाषा और चित्रकला जैसे विषय जोड़ दिए गए।



सवाल यह उठता है कि ये बदलाव किसी ठोस कारण से किए गए थे या फिर कुछ और वजह थी। इस तरह के बदलावों ने पूरी भर्ती प्रक्रिया को और संदिग्ध बना दिया है। अब इस पर गंभीर जांच की मांग उठने लगी है।



मामला और भी ज्यादा विवादों में

पीपुल्स समाचार में प्रकाशित खबर के अनुसार, विश्वविद्यालय कार्यपरिषद (ईसी) के कई सदस्यों का कार्यकाल खत्म होने वाला था। नई ईसी इन नियुक्तियों पर सवाल उठा सकती थी।



इसी डर से जल्दी-जल्दी इन 13 प्रोफेसरों को स्थायी कर दिया गया, ताकि अगर कोई नई ईसी आती भी है, तो वह इस फैसले को पलटने की स्थिति में न हो।



हालांकि हाईकोर्ट में यह मामला लटका हुआ है, लेकिन विश्वविद्यालय (atal bihari vajpayee hindi vishwavidyalaya bhopal) के इस फैसले ने उसकी साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह मामला और भी ज्यादा विवादों में घिर गया है।



इन नियुक्तियों पर उठे सवाल

  • पीपुल्स के मुताबिक, डॉ. गौरव गुप्ता, जो हिंदी विभाग में हैं, उनके गाइड धर्मेंद्र पारे ईसी के सदस्य मुकेश मिश्रा के परिचित हैं।
  • डॉ. विजय मिश्रा भौतिकी विभाग में हैं । वो विद्यार्थी परिषद के पूर्व महाकौशल प्रांत अध्यक्ष रहे हैं।
  • डॉ. चित्रलेखा कढेल वनस्पति विज्ञान विभाग में हैं। उनके पति अशोक कढेल शिक्षा उत्थान न्यास के क्षेत्र प्रमुख हैं।
  • डॉ. रश्मि चतुर्वेदी शिक्षा विभाग में हैं, उनके पति धीरेंद्र चतुर्वेदी प्रज्ञा प्रवाह के प्रांत संयोजक हैं।
  • डॉ. जितेंद्र भावसार रसायन विज्ञान विभाग में हैं, वो विज्ञान भारती के प्रांत सदस्य हैं।
  • डॉ. झामलाल रशिया भूगोल विभाग में हैं, वो कुलपति खेम सिंह के करीबी रिश्तेदार हैं।
  • डॉ. अमित सोनी चित्रकला विभाग में हैं, वो विद्यार्थी परिषद मध्य भारत से जुड़े हुए हैं।
  • डॉ. नीलम सिंह जो योग विभाग में हैं, उनके पति डॉ. शैलेंद्र सिंह सेवा भारती से जुड़े हुए हैं।
  • डॉ. आशीष नवकासे जो अर्थशास्त्र विभाग में हैं, वो कुलपति खेम सिंह के करीबी हैं।
  • डॉ. भावना खरे जो इतिहास विभाग में हैं, उनके पति डॉ. आर डेहरिया कुलपति के रिश्तेदार हैं।
  • डॉ. वंदना ठाकुर जो वाणिज्य विभाग में हैं, उनके चयन पर छतरपुर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार यशवंत पटेल का नाम सामने आ रहा है।
  • डॉ. भरत बाथम जो कम्प्यूटर विभाग में हैं, उन्होंने बिना अनुमति के संस्कृत भारती विश्वविद्यालय में नॉन टीचिंग पद पर रहकर पीएचडी की थी।

निशक्तजन कोटे को किया नजरअंदाज

इस पर समाजसेवी राहुल रंजन ने तीखी टिप्पणी की है। उनका कहना है कि हिंदी विश्वविद्यालय में हुई भर्ती में रोस्टर का पालन नहीं किया गया और निशक्तजन के कोटे को नजरअंदाज किया गया।



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