दतिया उपचुनाव के बीच सुप्रीम कोर्ट पहुंचे राजेंद्र भारती, चुनाव आयोग को नोटिस
समझें क्या है पूरा मामला...
- दतिया विधानसभा सीट पर आज उपचुनाव का मतदान हो रहा है।
- इसी बीच पूर्व विधायक राजेंद्र भारती सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं।
- उन्होंने अपनी सजा पर रोक लगाने की मांग की है।
- बुधवार को कोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार कर ली।
- मध्य प्रदेश सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी हुए हैं।
दतिया विधानसभा सीट पर आज बड़ा दिन है। यहां उपचुनाव (दतिया उपचुनाव) के लिए वोटिंग जारी है। ठीक इसी वक्त पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की कानूनी लड़ाई एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। उन्होंने अपनी दोष सिद्धि पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका
बुधवार, 29 जुलाई को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने भारती की याचिका स्वीकार कर ली। कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार, निर्वाचन आयोग और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं। सभी को चार सप्ताह के भीतर जवाब देना होगा।
बता दें कि मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को तय हुई है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उपचुनाव की प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं लगाई। इसका मतलब है कि आज का मतदान पहले की तरह ही जारी रहेगा।
भारती की सजा और घटनाक्रम
दतिया के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट ने बैंक एफडी घोटाला मामले में सजा सुनाई थी। यह फैसला 2 अप्रैल 2026 को आया था। कोर्ट ने उन्हें 3 साल के कारावास की सजा दी।
सजा के बाद विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता तुरंत समाप्त कर दी। इससे दतिया विधानसभा सीट रिक्त हो गई। इसी वजह से निर्वाचन आयोग ने यहां उपचुनाव घोषित किया। आज 30 जुलाई को इस सीट पर मतदान (दतिया विधानसभा चुनाव) हो रहा है।
हाईकोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले भारती ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। उन्होंने सजा पर रोक के साथ-साथ उपचुनाव रोकने की भी मांग रखी थी। लेकिन हाईकोर्ट से उन्हें कोई राहत नहीं मिली।
10 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा था कि सजा पर रोक लगाना एक असाधारण अधिकार है। इसका इस्तेमाल सिर्फ खास परिस्थितियों में ही होना चाहिए। कोर्ट को ट्रायल कोर्ट के फैसले में कोई स्पष्ट गलती नजर नहीं आई।
भारती ने दलील दी थी कि उपचुनाव से उन्हें अपूरणीय क्षति होगी। जस्टिस मनोज जैन की एकल पीठ ने इस दलील को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने साफ कहा था कि इसका जवाब नहीं में ही होगा।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यह समस्या सिर्फ भारती की नहीं है। यह जनप्रतिनिधियों को अयोग्य ठहराने वाले कानूनी प्रावधानों से जुड़ी है।
सिर्फ कोई व्यक्ति एमएलए या एमपी है, इस आधार पर सजा पर रोक नहीं लग सकती। जब तक फैसले में गंभीर गलती न हो, सजा पर रोक संभव नहीं।
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