अतिथि विद्वानों को बड़ी उम्मीद! CM बोले- फिक्स सैलरी और नियमितीकरण पर बनेगी कमेटी
समझें क्या है पूरा मामला
- सीएम मोहन यादव मजदूर संघ कार्यक्रम में पहुंचे।
- अतिथि विद्वानों की मांगों पर कमेटी बनेगी।
- फिक्स सैलरी और नियमितीकरण पर विचार होगा।
- दूसरे राज्यों के मॉडल का अध्ययन किया जाएगा।
- सीएम ने जल्द समाधान का संकेत दिया।
मंत्री को दी कमेटी बनाने की जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार से कहा कि वे विभागीय अधिकारियों के साथ मिलकर समिति बनाएं। इस समिति को अतिथि विद्वानों की मांगों पर काम करना होगा। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार हर संभव सहयोग करेगी।
फिक्स सैलरी और नियमितीकरण पर मंथन
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पहले भी अतिथि विद्वानों के लिए कई फैसले ले चुकी है। अब बाकी बची समस्याओं पर भी काम होगा। उन्होंने हरियाणा समेत कुछ राज्यों का उदाहरण दिया। वहां की बेहतर व्यवस्था का अध्ययन कर मध्यप्रदेश में लागू करने पर विचार होगा।
सरकार पहले भी दे चुकी कई सुविधाएं
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि सरकार ने कई सुविधाएं पहले ही दी हैं। इनमें 13 आकस्मिक अवकाश और तीन ऐच्छिक अवकाश शामिल हैं। महिला अतिथि विद्वानों को प्रसूति अवकाश की सुविधा भी दी गई है।
इसके अलावा असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में 25 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। साल में एक बार स्थानांतरण की सुविधा भी उपलब्ध है। मंत्री ने बताया कि तकनीकी शिक्षा विभाग में वेतन 11 महीने ही मिलता है। इस समस्या को भी जल्द दूर किया जाएगा।
मजदूर संघ ने उठाए सामाजिक सुरक्षा के मुद्दे
भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर ने अतिथि विद्वानों की सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इन लंबित मांगों का जल्द समाधान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास से मध्यप्रदेश देश में अग्रणी राज्य बनेगा। इससे युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।
शिक्षा परंपरा और नई नीति पर सीएम का जोर
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में भारतीय शिक्षा परंपरा का जिक्र किया। उन्होंने भगवान राम और भगवान कृष्ण से जुड़े प्रसंग बताए। उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था हमेशा दुनिया के लिए प्रेरणा रही है।
सीएम ने कहा कि नई शिक्षा नीति के जरिए मध्यप्रदेश देश में मिसाल बना है। उन्होंने बताया कि प्रदेश का ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER – Gross Enrolment Ratio) राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर है। अब किताबी ज्ञान के साथ नवाचार पर भी जोर दिया जा रहा है।
नशे के खिलाफ अभियान होगा तेज
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों और अतिथि विद्वानों से नशा मुक्ति अभियान में सहयोग मांगा। उन्होंने कहा कि जैसे नक्सलवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हुई, वैसे ही अब नशे के खिलाफ भी अभियान चलेगा। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक परिसरों में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि युवा नशे से दूर रहें।
FAQ
- अतिथि विद्वानों के लिए कमेटी क्यों बनाई जा रही है?
सीएम मोहन यादव ने फिक्स सैलरी, नियमितीकरण और अन्य लंबित मांगों पर विचार के लिए कमेटी बनाने का ऐलान किया। यह कमेटी उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर काम करेगी। - सरकार ने अतिथि विद्वानों को अब तक क्या सुविधाएं दी हैं?
सरकार ने 13 आकस्मिक अवकाश, तीन ऐच्छिक अवकाश और प्रसूति अवकाश जैसी सुविधाएं दी हैं। इसके अलावा भर्ती में 25 प्रतिशत आरक्षण भी दिया गया है। साल में एक बार स्थानांतरण की सुविधा भी उपलब्ध है।
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