आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़े के आरोप में भोपाल के सृष्टि हॉस्पिटल संचालक के खिलाफ EOW ने दर्ज किया केस
आयुष्मान योजना के नाम पर फर्जीवाड़ें का आरोप
भोपाल के करोंद स्थित सृष्टि हॉस्पिटल के संचालक खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने शुरुआती जांच के आधार पर कार्रवाई की। संचालक राजकुमार सूर्यवंशी और अन्य को आरोपी बनाया गया है। मामला अस्पताल की सूचीबद्धता और इलाज संबंधी भुगतान से जुड़ा है। स्टाफ विवरण और पैथोलॉजी रिपोर्टें जांच के केंद्र में हैं।
आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat Scheme) में गलत जानकारी देने का आरोप है। ईओडब्ल्यू के मुताबिक अस्पताल ने स्टाफ संख्या वास्तविकता से अधिक दिखाई। कुछ डॉक्टरों के नाम बिना उनकी अनुमति इस्तेमाल किए गए। रिपोर्टों पर कथित फर्जी हस्ताक्षरों और सील का आरोप भी है। जांच एजेंसी अब संबंधित दस्तावेजों और भुगतान की पड़ताल करेगी।
स्टाफ सूची में नाम दोहराए
जांच के अनुसार पोर्टल पर कुल 45 एंट्री दर्ज थीं। इनमें अलग-अलग नाम करीब 15 ही बताए गए हैं। बाकी एंट्री में उन्हीं नामों को बार-बार दर्ज किया गया। कई डॉक्टरों और नर्सिंग कर्मचारियों के नाम चार बार मिले। इससे अस्पताल की वास्तविक स्टाफ क्षमता पर सवाल उठे।
अस्पताल स्टाफ सूची (Hospital Staff List) की जानकारी जांची गई। पोर्टल पर उपलब्ध विवरण की वास्तविक स्थिति से तुलना हुई। एजेंसी का आरोप है कि नाम दोहराकर संख्या बढ़ाई गई। इससे पर्याप्त स्टाफ होने का दावा प्रस्तुत किया गया। संबंधित कर्मचारियों के वास्तव में कार्यरत होने की जांच जरूरी है।
यहां 45 एंट्री का मतलब 45 अलग कर्मचारी नहीं है। करीब 15 अलग नाम मिलने से उनकी नियुक्ति प्रमाणित नहीं होती। प्रत्येक नाम के इस्तेमाल और संबंधित व्यक्ति की भूमिका जांची जाएगी। कौन अस्पताल में काम करता था यह रिकॉर्ड से स्पष्ट होगा। फिलहाल सूची में अंतर शुरुआती जांच का निष्कर्ष बताया गया है।
सभी एंट्री में एक नंबर
जांच में सभी 45 एंट्री के सामने समान नंबर मिला। यह मोबाइल नंबर अस्पताल संचालक का बताया गया है। डॉक्टरों और कर्मचारियों के विवरण में यह समानता सामने आई। एजेंसी ने इसे सूची की जांच में महत्वपूर्ण माना। इसके बाद दर्ज जानकारी की वास्तविकता की पड़ताल आगे बढ़ी।
स्टाफ के नाम के साथ संपर्क विवरण भी दर्ज था। एक ही नंबर मिलने से स्वतंत्र पुष्टि पर सवाल उठे। अस्पताल में उपलब्ध कर्मचारियों की स्थिति समझना जांच का हिस्सा है। ऑनलाइन विवरण और वास्तविक नियुक्ति के बीच अंतर देखा जाएगा। इससे सूची तैयार करने वालों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
डॉक्टर ने नौकरी से इनकार किया
सूची में एक महिला पैथोलॉजिस्ट का नाम चार बार मिला। पूछताछ में उन्होंने अस्पताल में काम करने से इनकार किया। डॉक्टर ने कहा कि उन्होंने अपने दस्तावेज नहीं दिए थे। अपने नाम के इस्तेमाल की अनुमति भी नहीं दी थी। उनका बयान जांच में महत्वपूर्ण तथ्य के रूप में सामने आया।
डॉक्टर के मुताबिक उन्होंने सूची से नाम हटाने को कहा था। इसके बावजूद अस्पताल की सूची में उनका नाम बना रहा। जांच एजेंसी ने इस स्थिति को भी संज्ञान में लिया। उनके विवरण का इस्तेमाल किसने किया इसकी पड़ताल होगी। बिना सहमति नाम दर्ज करने का आरोप जांच के दायरे में है।
पैथोलॉजी रिपोर्टों पर सवाल
पैथोलॉजी रिपोर्ट (Pathology Report) से जुड़े दस्तावेज भी जांचे गए। अस्पताल ने अपने पैथोलॉजी विभाग के नाम से रिपोर्टें जारी कीं। उन पर संबंधित चिकित्सक का नाम और पंजीयन नंबर था। डॉक्टर की सील इस्तेमाल किए जाने का भी आरोप है। रिपोर्टों पर मौजूद हस्ताक्षरों की वास्तविकता पर सवाल उठे हैं।
संबंधित डॉक्टर ने जांच में हस्ताक्षर अपने नहीं बताए। इससे रिपोर्टों की प्रामाणिकता जांच का महत्वपूर्ण विषय बन गई। किसने रिपोर्ट तैयार की और हस्ताक्षर किए इसकी पड़ताल होगी। सील के इस्तेमाल की भूमिका भी जांची जाएगी। फिलहाल फर्जी हस्ताक्षरों का आरोप अंतिम रूप से सिद्ध नहीं हुआ।
आयुष्मान मरीजों से जुड़ी रिपोर्टें
कई विवादित रिपोर्टें आयुष्मान योजना के मरीजों से संबंधित बताई गईं। अस्पताल में इन मरीजों का उपचार दर्ज था। संचालक ने लिखित जवाब में उनके भर्ती होने की बात मानी। यह जवाब योजना के तहत भर्ती होने से संबंधित है। इसे सभी आरोपों की स्वीकारोक्ति नहीं माना जाना चाहिए।
इलाज के दस्तावेज और भुगतान के दावे अब जांचे जाएंगे। किन रिपोर्टों के आधार पर भुगतान मिला यह स्पष्ट होगा। विवादित रिपोर्टों की संख्या का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए सभी मरीजों के इलाज को संदिग्ध नहीं बताया जा सकता। जांच संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर आगे बढ़ेगी।
भुगतान की राशि की जांच
आयुष्मान भुगतान (Ayushman Payment) की कुल राशि अभी स्पष्ट नहीं है। अस्पताल को कितना आर्थिक लाभ मिला इसकी जांच होगी। संबंधित मरीजों के इलाज और दावों का रिकॉर्ड देखा जाएगा। अन्य व्यक्तियों की भूमिका भी विवेचना का हिस्सा है। फिलहाल किसी निश्चित नुकसान की राशि घोषित नहीं की गई।
ईओडब्ल्यू जांच (EOW Investigation) अपराध दर्ज होने के बाद जारी है। शुरुआती निष्कर्षों के आधार पर आरोपों की पड़ताल आगे बढ़ेगी। मामला दर्ज होने से किसी आरोपी का दोष सिद्ध नहीं होता। अंतिम स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया से स्पष्ट होगी। उपलब्ध विवरण में अस्पताल प्रबंधन का विस्तृत पक्ष शामिल नहीं है।