बागेश्वर धाम का पर्चा हुआ फेल! धीरेंद्र शास्त्री ने लिखा था पुत्र योग, घर जन्मी चौथी बेटी
उत्तर प्रदेश के एक श्रद्धालु परिवार ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के पर्चे पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पीड़ित पति का कहना है कि बाबा ने पर्चे पर दावा किया था कि उनके यहां बेटा होगा, लेकिन तय समय पर उनके घर चौथी बेटी ने जन्म लिया।
इसके बाद जब वे अपनी बात लेकर दोबारा धाम पहुंचे, तो वहां उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं हुआ।
इलाज की आस में पहुंचे थे बागेश्वर धाम
दरअसल मऊरानीपुर के रहने वाले राजेंद्र श्रीवास ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि, वे साल 2024 में अपनी पत्नी की दिमागी और शारीरिक दिक्कतों का इलाज कराने के लिए बागेश्वर धाम गए थे। कई चक्कर लगाने के बाद मई 2024 में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने उनका पर्चा बनाया था।
राजेंद्र के मुताबिक उस पर्चे में लिखा गया था कि उनकी पत्नी को साल 2019 से प्रेत बाधा की दिक्कत है। साथ ही यह भी लिखा था कि पुत्र योग बनता है।
राजेंद्र का कहना है कि उनकी पहले से ही तीन बेटियां थीं। उनकी सबसे छोटी बेटी 9 से 10 साल की थी। उनका आगे कोई भी बच्चा प्लान करने का मन बिल्कुल नहीं था।
पुत्र योग की बात सुनकर मन में जगी उम्मीद
राजेंद्र बताते हैं कि जब उन्होंने पर्चे पर पुत्र योग लिखा देखा, तो उनके मन में एक उम्मीद जाग गई। जब उन्होंने दोबारा अर्जी लगाकर आगे का रास्ता पूछा तो धीरेंद्र शास्त्री ने पर्चे पर राम जय जय लिखकर दे दिया।
राजेंद्र ने साफ कहा कि हमारा ऐसा कोई सवाल ही नहीं था पर उन्होंने खुद ही पर्चे पर लिख दिया कि पुत्र योग बनेगा। हमने तो बाबा के उन दावों पर भरोसा कर लिया था जिसमें वे कहते हैं कि जो मैं लिख देता हूं उसे कोई काट नहीं सकता।
11 जून को घर आई चौथी बेटी
राजेंद्र ने बताया कि 11 जून को उनकी पत्नी ने एक बेटी को जन्म दिया। घर में चौथी बेटी के आने पर उन्हें बहुत निराशा हुई।
जब बच्ची करीब तीन महीने की हुई, तब वे अपनी पत्नी को साथ लेकर दोबारा बागेश्वर धाम पहुंचे ताकि यह जान सकें कि आखिर पर्चे में किया गया दावा झूठा कैसे साबित हुआ।
मंच पर क्या हुआ दंपती के साथ?
राजेंद्र के अनुसार जब वे धाम पहुंचे तो धीरेंद्र शास्त्री ने मंच से कहा कि जो लोग बच्चे का नामकरण करवाना चाहते हैं, वे ऊपर आ जाएं।
राजेंद्र मंच पर पहुंचे और बोले गुरु जी, आप तो अंतर्यामी हैं। यह पर्चा भी आपका ही है तो आप ही बताइए कि लाला हुआ है या लाली? इसके बाद धीरेंद्र शास्त्री ने पर्चा खोलकर देखा, फिर माइक नीचे किया और धीरे से बोले, गलती है ये।
इतना सब होने के बाद जैसे ही पीड़ित पति ने पूछा कि आखिर गलती किससे हुई, तो वहां खड़े सेवादारों और चेलों ने कहा कि यहां भीड़ मत लगाओ और सीधे नीचे चलो। इसके बाद उन्हें वहां से जबरन भगा दिया गया।
अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति से लगाई मदद की गुहार
राजेंद्र श्रीवास ने साफ किया है कि वे किसी भी धर्म या भगवान के खिलाफ नहीं हैं। वे बस इंसानियत के नाते अपनी आपबीती लोगों को बता रहे हैं ताकि कोई दूसरा परिवार अंधविश्वास के चक्कर में पड़कर परेशान न हो।
उनके परिवार में अब कुल चार बेटियां हैं, जिनमें से दो बेटियां कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में पढ़ाई कर रही हैं।
राजेंद्र ने बताया कि इवे अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति' के पास गए। उन्होंने समिति से गुजारिश की है कि इस घटना के जरिए समाज में फैले अंधविश्वास को खत्म करने के लिए लोगों को जागरूक किया जाए।
फिलहाल इस मामले में सिर्फ दंपती की ओर से किए गए दावे और उनका अनुभव ही सामने आया है। बागेश्वर धाम या पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की तरफ से कोई प्रतिक्रिया आती है, तो उनका पक्ष भी साफ हो जाएगा।
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