बगलामुखी मंदिर चढ़ावा चोरी जांच: तीन महीने बाद भी कलेक्टर के पास न रिपोर्ट, न जवाब

Atul Dwivedi | Sept 29, 2026, 09:37 IST
आगर मालवा के नल​खेड़ा स्थित बगलामुखी मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपों की जांच अब तक सामने नहीं आई है।
आगर मालवा के नलखेड़ा स्थित बगलामुखी मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपों की जांच अब तक सामने नहीं आई है। तत्कालीन कलेक्टर प्रीति यादव ने तीन सदस्यों की जांच समिति बनाकर सात दिन में रिपोर्ट मांगी थी। आरोप था कि सरकारी मंदिर में निजी समिति चढ़ावा ले रही थी और नकद राशि निजी बैंक खाते में जमा हो रही थी। अब कलेक्टर और पूर्व कलेक्टर से जवाब नहीं मिल रहा।

आगर मालवा के नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोप लगे थे। तीन महीने बाद भी न जांच रिपोर्ट सामने आई, न अफसरों ने कोई जवाब दिया।



द सूत्र के रिपोर्टर ने कलेक्टर शेर सिंह मीना को दो बार फोन किया। एक मैसेज भी भेजा। फिर भी जवाब नहीं मिला। तत्कालीन कलेक्टर प्रीति यादव का फोन भी स्विच ऑफ मिला। जिम्मेदार अधिकारी जवाब का वक्त ही न निकालें, तो सरकारी जांच पर भरोसा कैसे हो?



समझें क्या है पूरा मामला

आगर मालवा के नलखेड़ा में मां बगलामुखी मंदिर है। यहां चढ़ावा चोरी का आरोप लगा। आरोप है कि मंदिर की सरकारी समिति के समानांतर एक प्राइवेट समिति चंदा लेती रही। तत्कालीन कलेक्टर प्रीति यादव ने तीन सदस्यों की जांच कमेटी बनाई थी। तीन महीने बाद अब जांच की स्थिति पर कोई अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है।



शुरू से समझें मामला

यह मामला करीब तीन महीने पुराना है। आरोप था कि मंदिर में एक समिति नियमों के खिलाफ चंदा लेती है। इस समिति की स्थापना करीब साढ़े तीन साल पहले, यानी 2024 के आसपास हुई थी। जबकि मंदिर की पहले से एक सरकारी समिति है। इसका नाम मां बगलामुखी मंदिर प्रबंध समिति है। इसके पदेन अध्यक्ष एसडीएम होते हैं। सरकारी समिति के होने के बावजूद मिलीभगत से एक प्राइवेट समिति बना दी गई।



नलखेड़ा सुदर्शन सेवा समिति में कुल 5 प्रमुख लोग थे। ये लोग चढ़ावे के बदले श्रद्धालुओं को अपनी रसीद देते थे। चांदी के अलावा जो नकद राशि मिलती, उसे निजी बैंक खाते में जमा कराया जाता था। जबकि मंदिर सरकारी है।



आरोप है कि तत्कालीन एसडीएम मिलिंद ढोके मंदिर समिति के अध्यक्ष थे। उसी दौरान यह प्राइवेट समिति बनी। एसडीएम ने समिति को नहीं रोका, और समिति चंदा लेती रही। दावा है कि उस वक्त नलखेड़ा सुदर्शन सेवा समिति का रजिस्ट्रेशन भी हुआ था।




गड़बड़ी कैसे सामने आई?

तत्कालीन कलेक्टर प्रीति यादव को शिकायत मिली। शिकायत में कहा गया कि मंदिर परिसर में एक गैर सरकारी समिति काम कर रही है। यह समिति श्रद्धालुओं से कैश, सोना-चांदी ले रही थी। चढ़ावे के लिए निजी बैंक खाते के इस्तेमाल का आरोप लगा। वित्तीय रिकॉर्ड में भी गड़बड़ी की बात सामने आई।



इसके बाद कलेक्टर ने जांच समिति बनाई। दावा था कि समिति 7 दिन में रिपोर्ट सौंपेगी। जांच के लिए चार बिंदु तय हुए थे।



जांच के चार सवाल तय हुए थे

कुल कितना चढ़ावा आया, सरकारी खजाने में जमा क्यों नहीं हुआ। गर्भगृह में कितनी चांदी लगी। समिति ने कितने श्रद्धालुओं से चढ़ावा लिया, उसका रिकॉर्ड है या नहीं। मंदिर सरकारी है, तो प्राइवेट समिति बनाना सही था या नहीं।



रसीद के नंबरों पर क्या पता चला?

द सूत्र के रिपोर्टर ने रसीद पर छपे नंबरों पर एक-एक कर फोन किया। ये नंबर नलखेड़ा सुदर्शन सेवा समिति की रसीद पर छपे थे। पहला नंबर 9425991154 बिजी मिला।



दूसरे नंबर 9425991057 पर पहली बार फोन उठा। रिपोर्टर के मीडिया से होने की बात कहते ही फोन कट गया। दोबारा कॉल की, पर फोन रिसीव नहीं हुआ।



तीसरे नंबर 9425935168 पर फोन उठाने वाले ने अपना नाम कांताप्रसाद बताया। उनका कहना था कि जांच खत्म हो चुकी है। समिति के पास जो भी सोना, चांदी या नकदी थी, वह सब सरकारी समिति के पास जमा करवा दी गई है।



चौथे नंबर 9926022010 पर फोन उठाने वाले ने नाम नहीं बताया। बस इतना कहा कि सब कुछ खत्म हो चुका है। जांच पूरी हो गई है। मंदिर में सब ठीक है। चढ़ावा चोरी के सवाल पर इस व्यक्ति ने कोई जवाब नहीं दिया।




कलेक्टर से नहीं मिला जवाब

द सूत्र ने पुख्ता जानकारी के लिए कलेक्टर शेर सिंह मीना को दो बार फोन किया। सम्मान के साथ एक मैसेज भी भेजा। न फोन का जवाब आया, न मैसेज का। रिपोर्टर जानना चाहते थे कि क्या जांच वाकई बंद हो गई है। अगर सोना-चांदी व नकदी सरकारी समिति के पास जमा करवा दी गई है, तो क्या आरोप बेबुनियाद थे?



तत्कालीन कलेक्टर प्रीति यादव को भी फोन किया गया, लेकिन उनका फोन स्विच ऑफ मिला। द सूत्र के सूत्रों के मुताबिक कलेक्टर आमतौर पर किसी का फोन नहीं उठाते। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री तक की जा चुकी है।



कलेक्टर से पूछे गए सवाल

क्या नकदी और सोना-चांदी जमा होने से चढ़ावा चोरी के आरोपों से इनकार किया जा सकता है? अगर सब ठीक था, तो शिकायत किसने की? अगर शिकायत झूठी थी, तो शिकायतकर्ता पर कार्रवाई हुई या नहीं? सरकारी समिति होते हुए निजी समिति कैसे बनी। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कब हुई, और क्या यह किसी को भी मिल सकती है।



कुछ और सवाल, जिनके जवाब कलेक्टर से चाहिए थे, उनमें...

  • सवाल-1: क्या सरकारी समिति के पास नकदी और सोना-चांदी जमा होने से चढ़ावा चोरी के आरोपों से इनकार किया जा सकता है?
  • सवाल-2: अगर सब ठीक था, तो शिकायत किसने की? अगर शिकायत झूठी थी, तो क्या शिकायतकर्ता पर कोई कार्रवाई हुई?
  • सवाल-3: सरकारी समिति होते हुए उस वक्त निजी समिति कैसे बनी?
  • सवाल-4: जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कब की गई? क्या जांच रिपोर्ट किसी को भी मिल सकती है?

लेकिन इन सारे सवालों के जवाब तभी मिलते, जब कलेक्टर फोन उठाते। लेकिन वो न मैसेज का जवाब दे रहे हैं, न ही फोन उठा रहे हैं। हमारे सूत्र बताते हैं कि कलेक्टर किसी का फोन उठाते ही नहीं। इसे लेकर उनकी शिकायत भी मुख्यमंत्री तक की गई है।



अब क्या वाकई में चढ़ावा चोरी हुई? क्या वाकई में कहीं कोई गड़बड़ी थी? क्योंकि मंदिर में आने वाले श्रद्धालु कह चुके हैं कि दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए। अगर कोई बेईमान है, तो उसे सजा जरूर मिले।




यह खबर क्यों जरूरी है

यह मामला सिर्फ एक मंदिर के चढ़ावे तक सीमित नहीं है। यह दिखाता है कि जांच समितियां बनने के बाद कैसे खामोश हो जाती हैं। जिम्मेदार अधिकारी जब जनता और मीडिया के सवालों से बचते हैं, तो पारदर्शिता पर ही सवाल उठता है। श्रद्धालुओं की आस्था और उनके दान से जुड़ा पैसा जवाबदेही मांगता है। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होना इसी जवाबदेही की पहली शर्त है।



यह मामला सीधे मध्यप्रदेश के आगर मालवा जिले के नलखेड़ा कस्बे से जुड़ा है। बगलामुखी मंदिर यहां का प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। जांच आगर मालवा प्रशासन के दायरे में है।



  1. मां बगलामुखी मंदिर में चढ़ावा चोरी का आरोप क्या है?
    आगर मालवा के नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर में आरोप है कि एक प्राइवेट समिति मंदिर की सरकारी समिति के समानांतर चंदा ले रही थी। इस समिति का रजिस्ट्रेशन लगभग तीन साल पहले हुआ और इसके पदाधिकारी श्रद्धालुओं से कैश, सोना-चांदी ले रहे थे।
  2. जांच कमेटी की रिपोर्ट कब और कैसे आएगी?
    तत्कालीन कलेक्टर प्रीति यादव ने जांच के लिए तीन सदस्यों की समिति बनाई थी, जो 7 दिन में रिपोर्ट देने का दावा कर रही थी। हालांकि, तीन महीने बीत जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों ने कोई जानकारी नहीं दी है।
  3. क्या मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी के दोषी व्यक्तियों पर कार्रवाई हुई?
    चढ़ावा चोरी के आरोपों पर कोई स्पष्ट जवाब अभी तक नहीं दिया गया है। श्रद्धालु यह जानना चाहते हैं कि अगर सभी आरोप बेबुनियाद थे, तो शिकायत करने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है। इस मामले में पूछा गया कि क्या कोई गड़बड़ी थी, लेकिन इसका कोई साफ जवाब नहीं मिला है।
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