बालाघाट में बच्चों की मौत: याचिका पर हाईकोर्ट सख्त- पहले रियलिटी चेक करो
समझें क्या है पूरा मामला...
- बालाघाट में 30 बच्चों की मौत, हाईकोर्ट ने पूछे तीखे सवाल।
- सिर्फ अखबार पढ़कर याचिका, हाईकोर्ट ने लगाई फटकार।
- 50 बेड के अस्पताल में 400 बच्चों का इलाज, हैरान करने वाला दावा।
- आदिवासी बच्चों की मौत पर सरकार से मांगा जवाब।
- बैहर बिरसा में बीमारियों का कहर, कोर्ट ने मांगी ग्राउंड रिपोर्ट।
बालाघाट के बैहर और बिरसा क्षेत्र में 30 बच्चों की मौत का दावा किया गया है। इस पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर हुई थी। गुरुवार को हाईकोर्ट ने इस पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ अखबार पढ़कर याचिका दायर करना काफी नहीं है। याचिकाकर्ता को अब ग्राउंड रियलिटी जांचकर रिपोर्ट पेश करनी होगी।
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। बैहर और बिरसा क्षेत्र में पिछले ढाई महीनों में 30 बच्चों की मौत की बात कही जा रही है। इसी दावे को आधार बनाकर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी।
गुरुवार को इस मामले पर सुनवाई हुई। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने याचिका पर टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि केवल अखबारों की खबरों के आधार पर याचिका लगाना पर्याप्त नहीं है।
कोर्ट ने क्या निर्देश दिए
बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा कि वे खुद बालाघाट जाएं। बैहर और बिरसा क्षेत्र की असली स्थिति देखें। इसके बाद उपलब्ध तथ्यों की पुष्टि करके रिपोर्ट पेश करें। रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले में आगे सुनवाई होगी। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 9 सितंबर 2026 तय की है।
याचिका किसने दायर की
यह जनहित याचिका नरसिंहपुर के करेली निवासी अधिवक्ता अंशुल तिवारी ने दायर की थी। उन्होंने यह याचिका 1 सितंबर को दायर की। याचिका में दावा किया गया कि बैहर और बिरसा क्षेत्र में मलेरिया, खसरा और कुपोषण से बच्चों की मौत हुई है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि बच्चों को पर्याप्त इलाज नहीं मिल पा रहा है।
अस्पताल पर भारी बोझ
याचिका में एक चौंकाने वाला दावा भी किया गया है। कहा गया कि क्षेत्र के अस्पताल में सिर्फ 50 बेड हैं। लेकिन वहां करीब 400 बच्चों का इलाज चल रहा है। इससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है।
ढाई महीने में 30 मौतें
स्थानीय दावों के अनुसार बैहर और बिरसा के आदिवासी इलाकों में पिछले ढाई महीने में यह मौतें हुई हैं। इनमें खसरा, मलेरिया, चर्मरोग और डायरिया जैसी बीमारियां शामिल बताई गई हैं। यह पूरा क्षेत्र आदिवासी बहुल माना जाता है।
आदिवासी समाज का गुस्सा
आदिवासी विकास परिषद के जिलाध्यक्ष दिनेश धुर्वे ने इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में बीमारियों पर अब तक पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका है। हर दिन बीमार बच्चे अस्पताल पहुंच रहे हैं। इससे प्रशासन की सेवाओं पर सवाल उठ रहे हैं।
धुर्वे ने बच्चों की मौत की वजह कुपोषण और वैक्सीनेशन की कमी को बताया। उन्होंने कहा कि आदिवासी बच्चों की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है। साथ ही स्वास्थ्य मंत्री की भी इसमें जवाबदारी बनती है। उन्होंने मृत बच्चों के परिवारों को तुरंत आर्थिक मदद देने की मांग रखी।
अन्य क्षेत्रों से भी पहुंचे लोग
गुरुवार के प्रदर्शन में सिर्फ बालाघाट ही नहीं, प्रदेश के अन्य आदिवासी क्षेत्रों से भी लोग पहुंचे। उनका दावा है कि अब तक करीब 30 बच्चों की जान जा चुकी है। उन्होंने सरकार से प्रभावित परिवारों की तुरंत मदद की मांग की।
अब पूरे मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर 2026 को होगी। तब तक याचिकाकर्ता को ग्राउंड रिपोर्ट कोर्ट में पेश करनी होगी। इस रिपोर्ट के आधार पर ही आगे का रास्ता तय होगा।
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