बालाघाट में 62 हेक्टेयर वन भूमि पर बॉक्साइट खनन प्रस्ताव केंद्र सरकार ने रोका

Pawan Modiya | Apr 26, 2026, 19:19 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में प्रस्तावित बालाघाट बॉक्साइट खनन (Balaghat Bauxite Mining) परियोजना को केंद्र सरकार ने फिलहाल रोक दिया है। Forest Advisory Committee (FAC) ने इस मामले में अंतिम निर्णय टालते हुए राज्य सरकार से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है।

​भोपाल। बालाघाट जिले की बैहर तहसील में 62 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि (रिजर्व फॉरेस्ट) को बॉक्साइट खनन के लिए डायवर्ट करने का प्रस्ताव फिलहाल ठंडे बस्ते में चला गया है। केंद्र सरकार की वन सलाहकार समिति (FAC) ने पर्यावरणीय संवेदनशीलता और वन्यजीवों की सुरक्षा को देखते हुए न केवल इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला टाल दिया है, बल्कि मध्य प्रदेश सरकार से कई कड़े बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है।



प्रस्तावित प्रोजेक्ट और पर्यावरणीय चिंता

​वारजीरी डादर और बेयर हिल बॉक्साइट ब्लॉक के लिए मेसर्स निसर्ग इस्पात प्राइवेट लिमिटेड को खनन लीज दी जानी प्रस्तावित है। कुल 117.51 हेक्टेयर के इस प्रोजेक्ट में 62 हेक्टेयर वन भूमि शामिल है, जिसके लिए 16,648 पेड़ों की कटाई होनी है।


समिति ने रिपोर्ट में पाया कि यह क्षेत्र कान्हा–पेंच कॉरिडोर से महज 21 किमी दूर है और यहां बाघ, तेंदुआ, स्लॉथ भालू, गौर (बाइसन), सांभर और चीतल जैसे महत्वपूर्ण वन्यजीवों की सघन मौजूदगी है।



​समिति ने उठाई ये आपत्तियां

अपूर्ण क्षतिपूरक वृक्षारोपण (CA): कंपनी ने 62.7 हेक्टेयर गैर-वन भूमि पर वृक्षारोपण का प्रस्ताव दिया था, लेकिन जमीन छोटे-छोटे टुकड़ों में होने के कारण कमेटी ने इसे नामंजूर कर दिया और इसे एक साथ समेकित (Consolidated) रूप में देने को कहा है।



PCCF (वाइल्डलाइफ) की टिप्पणी : वन्यजीवों पर संभावित प्रभाव को देखते हुए वाइल्डलाइफ विंग की आधिकारिक रिपोर्ट अनिवार्य की गई है।



NOC का अभाव: प्रस्तावित क्षेत्र से गुजर रही ट्रांसमिशन लाइन के लिए संबंधित विभाग की अनापत्ति अभी तक प्राप्त नहीं हुई है।



कंपनी पर है एक तेंदुए की हत्या के आरोप

एक ओर केंद्र सरकार ने तकनीकी कारणों से फाइल रोकी है, वहीं दूसरी ओर कंपनी के विरुद्ध पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) में एक गंभीर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है।



​साक्ष्यों से छेड़छाड़ भी

आरोप है कि कंपनी (निसर्ग इस्पात) के परिसर में अनुसूची-I के तहत संरक्षित एक तेंदुए की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। शिकायत में कहा गया है कि तेंदुए के अंगों के साथ छेड़छाड़ की गई और साक्ष्यों को नष्ट करने का प्रयास किया गया, जिसकी जांच फिलहाल लंबित है।



​पट्टे निरस्त करने की मांग

अधिवक्ता ने मांग की है कि ऐसे गंभीर अपराध में संलिप्त कंपनी और उसके निदेशक महेंद्र गोयनका को आवंटित सभी वर्तमान वन पट्टे निरस्त किए जाएं और भविष्य में किसी भी प्रकार का भूमि आवंटन न किया जाए।



प्रोजेक्ट एक नजर में

  • कुल क्षेत्र: 117.51 हेक्टेयर
  • वन भूमि: 62 हेक्टेयर
  • पेड़ों की कटाई: लगभग 16,648
  • स्थान: बैहर तहसील, बालाघाट
  • स्थिति: स्थगित (Deferred)

कमेटी ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी बिंदुओं पर संशोधित और पूर्ण जानकारी नहीं मिल जाती, तब तक खनन की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार अब इस मामले में वन्यजीव अपराध के आरोपों और तकनीकी कमियों पर विस्तृत जवाब तैयार कर रही है।



ये खबरें भी पढ़ें...

संजय सिंह का दावा, राघव चड्ढा समेत सातों बागी सांसदों की सदस्यता जानी तय



दलित दंपती को मंदिर में घुसने से रोका, पंचायत ने दिया बहिष्कार करने का फरमान



एमपी में 5 से 6 लाख महंगी हुई शादियां, सोना-चांदी के दाम सातवें आसमान पर



एमपी विधानसभा का विशेष सत्र 27 अप्रैल को : नारी शक्ति वंदन पर होगी चर्चा



Tags:
  • केंद्र सरकार
  • बालाघाट
  • पर्यावरण
  • जलवायु परिवर्तन
  • खनन
  • तेंदुआ
  • बाघ
  • वन