बालाघाट में चलती कार बनी आग का गोला, एक ही परिवार के 3 लोग जिंदा जले, 2 की हालत नाजुक
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में शनिवार रात एक भीषण सड़क हादसा हुआ।
- केवलारी चौक के पास तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर पलट गई और उसमें आग लग गई।
- हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई।
- राहगीरों ने हिम्मत दिखाते हुए आठ साल की बच्ची को जलती कार से बाहर निकाला।
- चालक और उसकी मां को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया है।
रात के अंधेरे में जली एक पूरी जिंदगी
28 मार्च शनिवार की रात थी। घड़ी में करीब 12 बज रहे थे। बालाघाट के बैहर थाना क्षेत्र में मलाजखंड रोड पर सब कुछ ठीक लग रहा था। तभी केवलारी चौक के पास एक कार अचानक अनियंत्रित हो गई और सड़क से उतरकर पलट गई और पलक झपकते ही उसमें आग लग गई। कार में सवार लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। आग इतनी तेज थी कि कुछ ही पलों में वह विकराल रूप ले चुकी थी।
तीन जिंदगियां, एक ही पल में खत्म
इस दर्दनाक हादसे में 65 साल के नगारची केलकर, 28 साल की सविता केलकर और तीन वर्षीय मासूम अभि केलकर की मौके पर ही जलकर मौत हो गई। तीनों एक ही परिवार के थे। एक बुजुर्ग, एक युवा महिला और एक बच्चा, जिसे अभी पूरी जिंदगी जीनी थी। यह पल सिर्फ एक परिवार के लिए नहीं, पूरे इलाके के लिए दर्दनाक था।
8 साल की पूर्वी को राहगीरों ने बचाया
जब कार जल रही थी, तब कुछ राहगीरों ने हिम्मत दिखाई। उन्होंने कार की खिड़की का कांच तोड़ा और आठ साल की पूर्वी राहांगडाले को सुरक्षित बाहर निकाला। पूर्वी उस कार में सवार थी और अपने घर लौट रही थी। उसका बाहर निकलना किसी चमत्कार से कम नहीं था। अगर राहगीरों ने वक्त पर कदम न उठाया होता, तो शायद वह भी नहीं बचती।
चालक और उसकी मां गंभीर हालत में
कार चला रहे सीतम केलकर (30) और उनकी मां नानाबाई केलकर (60) को भी गंभीर हालत में जलती कार से बाहर निकाला गया। दोनों को तुरंत Balaghat के बैहर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
कैसे हुई यह घटना
बैहर थाना प्रभारी जयंत मर्सकोले ने बताया कि डायल-112 पर कार में आग लगने की सूचना मिली थी। पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि तेज रफ्तार के कारण कार अनियंत्रित हुई। यह भी आशंका जताई जा रही है कि चालक को नींद की झपकी आ गई होगी।
सीतम केलकर अपने गांव पोंडी (परसवाड़ा) से पौनी लौट रहे थे, जहां उनकी वेल्डिंग की दुकान है। वे तीन दिन पहले पूरे परिवार के साथ गांव आए थे। शनिवार रात वापसी का सफर शुरू किया और यह सफर कभी खत्म नहीं हुआ।
सड़क हादसे रोकने की जरूरत
यह हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि रात के वक्त लंबी दूरी की यात्रा कितनी खतरनाक हो सकती है। तेज रफ्तार और नींद, दोनों मिलकर किसी को भी मौत के मुंह में धकेल सकते हैं। तीन जिंदगियां चली गईं, एक बच्ची अनाथ हो सकती थी और दो लोग अस्पताल में जिंदगी से लड़ रहे हैं।
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