बालाघाट में बच्चों की मौत की कई वजह, केंद्र सरकार की रिपोर्ट में खुलासा
मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में आदिवासी बच्चों की बीमारी और मौत के मामलों को लेकर केंद्र सरकार की जांच में अब तक कोई एक निश्चित वजह सामने नहीं आई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक जुलाई से अब तक 431 बच्चों को स्वास्थ्य सुविधाओं में भर्ती कराया गया है, जिनमें से 379 को डिस्चार्ज किया जा चुका है, जबकि 52 बच्चे अब भी इलाज और निगरानी में हैं।
केंद्र की जांच टीम ने मध्यप्रदेश के बालाघाट में आदिवासी बच्चों के बीच बीमारी के इस मामले में कई क्लीनिकल वजहें पाई हैं, जिनमें खसरा, मलेरिया, को-इंफेक्शन, सांस संबंधी परेशानी, डिहाइड्रेशन, कुपोषण, एनीमिया और शॉक जैसी स्थितियां शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल इन मौतों को किसी एक रोगजनक यानी पैथोजन से नहीं जोड़ा जा सकता।
अब तक कितनी जांच और स्क्रीनिंग हुई
वरिष्ठ स्वास्थ्य मंत्रालय अधिकारियों के मुताबिक अब तक 431 बच्चों को स्वास्थ्य सुविधाओं में भर्ती कराया गया है, जिनमें से 379 को डिस्चार्ज किया जा चुका है और 52 बच्चे अब भी इलाज और निगरानी में हैं। 32 हजार से ज्यादा लोगों की मेडिकल स्क्रीनिंग हो चुकी है और निगरानी का दायरा तीन गांवों से बढ़ाकर करीब 50 गांवों तक कर दिया गया है।
किन-किन आंकड़ों पर टिकी है जांच
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अब तक 32,433 लोगों की मेडिकल जांच हो चुकी है और 50 गांवों को निगरानी के दायरे में लाया गया है। इसके अलावा 14,637 बच्चों को अतिरिक्त मीजल्स-रूबेला वैक्सीन की डोज दी गई है। जांच में 7,711 बच्चों में गंभीर कुपोषण की पुष्टि हुई है, जिनमें से 518 बच्चों को न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन सेंटर में भर्ती कराया गया है।
इसके साथ ही 6 मोबाइल मेडिकल यूनिट तैनात की गई हैं और 7,711 पानी के स्रोतों को शुद्ध किया गया है। कीटनाशक स्प्रे से 4,338 घरों को कवर किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक पिछले 7 दिनों में बालाघाट में खसरे का कोई नया मामला सामने नहीं आया है।
किन टीमों ने की जांच में मदद
एक नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम यानी NJORT को 4 अगस्त को महामारी विज्ञान संबंधी स्थिति, मौत के आंकड़ों, खसरे और मलेरिया से जुड़े निष्कर्षों, लैबोरेटरी रणनीति और नियंत्रण उपायों की राष्ट्रीय समीक्षा के बाद 12 अगस्त को तैनात किया गया था। इसके अलावा एक स्वतंत्र इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी ICMR की टीम भी इस जांच में शामिल है।
जबलपुर के ICMR और नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज, जबलपुर की टीमें भी प्रभावित इलाकों का दौरा कर रही हैं। मामले की समीक्षा में वर्बल ऑटोप्सी यानी मौखिक शव-परीक्षण सहित एक केस-रिव्यू प्रक्रिया भी जारी है।
एक्सपर्ट कोट्स
वरिष्ठ स्वास्थ्य मंत्रालय अधिकारियों के मुताबिक बालाघाट में मिली बीमारियों में खसरा, मलेरिया, को-इंफेक्शन, सांस संबंधी परेशानी, डिहाइड्रेशन, कुपोषण, एनीमिया और शॉक जैसी कई क्लीनिकल वजहें शामिल हैं, लेकिन फिलहाल मौतों को किसी एक निश्चित पैथोजन से नहीं जोड़ा जा सकता।
FAQ
- बालाघाट में बच्चों की मौत की वजह क्या बताई गई है?
केंद्र सरकार के मुताबिक इन मौतों के पीछे कोई एक निश्चित वजह नहीं है। जांच में खसरा, मलेरिया, को-इंफेक्शन, डिहाइड्रेशन, कुपोषण, एनीमिया और शॉक जैसी कई क्लीनिकल स्थितियां सामने आई हैं। - अब तक कितने बच्चों की जांच और भर्ती हुई है?
जुलाई से अब तक 431 बच्चों को भर्ती कराया गया है, जिनमें से 379 डिस्चार्ज हो चुके हैं और 52 अभी भी इलाज में हैं। कुल 32,433 लोगों की मेडिकल स्क्रीनिंग हो चुकी है, जिसमें 7,711 बच्चों में गंभीर कुपोषण पाया गया। - जांच में कौन-कौन सी टीमें शामिल हैं?
नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की स्वतंत्र टीम, जबलपुर ICMR और नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज की टीमें प्रभावित इलाकों में जांच और समीक्षा कर रही हैं।
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