बालाघाट में 10 जवानों के डॉक्यूमेंट निकले फर्जी, दूसरे राज्यों से आकर पाई नौकरी
समझें क्या है पूरा मामला...
- बालाघाट जिले में युवा दूसरे राज्यों से आकर फर्जी प्रमाण-पत्र बनवा रहे थे।
- बीएसएफ की एक टीम जांच के लिए इंदौर से बालाघाट पहुंची थी।
- तीन सदस्यीय टीम ने 11 जवानों के दस्तावेजों की जांच की।
- इनमें से 10 जवानों के निवास और जाति प्रमाण-पत्र फर्जी मिले।
- बालाघाट एसडीएम ने इस फर्जीवाड़े की पुष्टि की है।
मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले से एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां दूसरे राज्यों और जिलों के युवा फर्जी निवास और जाति प्रमाण-पत्र बनवाकर सरकारी नौकरी हासिल कर रहे थे। यह खुलासा तब हुआ जब बीएसएफ की एक टीम जांच के लिए इंदौर से बालाघाट पहुंची थी।
टीम में तीन सदस्य शामिल थे। इन्होंने 11 जवानों के निवास और जाति प्रमाण-पत्रों की गहराई से जांच की। जांच में पता चला कि इनमें से 10 प्रमाण-पत्र फर्जी हैं।
बोली से हुआ शक
जांच के दौरान टीम को इन जवानों से बातचीत में शक हुआ ता। इनकी बोली भिंड और मुरैना जिलों जैसी लग रही थी। जबकि इनके पास बालाघाट जिले के निवास प्रमाण-पत्र थे।
इनमें से कुछ जवानों के पास गोंड जाति का प्रमाण-पत्र भी था। गोंड जाति मध्यप्रदेश में आदिवासी वर्ग में आती है। इस वजह से टीम का शक और गहरा हो गया।
इंदौर से शुरू हुई जांच
बीएसएफ की टीम ने सबसे पहले इंदौर में संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की थी। वहां जवाबों से संतुष्ट न होने पर टीम सीधे बालाघाट पहुंची। यहां आकर टीम ने दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की।
जाति प्रमाण-पत्र पर बड़ा सवाल
जाति प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए पिता की जाति और अन्य जरूरी दस्तावेज लगते हैं। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि इन जवानों के गोंड जाति प्रमाण पत्र किस आधार पर बनाए गए।
यह पूरा मामला अब जांच का विषय बन गया है। अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि फर्जी दस्तावेज किन लोगों की मदद से बनवाए गए।
एसडीएम ने दी जानकारी
बालाघाट एसडीएम गोपाल सोनी ने इस मामले पर जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि जिले के 11 जवानों के निवास और जाति प्रमाण-पत्रों की जांच के लिए बीएसएफ की टीम आई थी। उन्होंने पुष्टि की कि इनमें से 10 जवानों के प्रमाण-पत्र फर्जी पाए गए हैं।
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