भाजपा नेता और पूर्व मंत्री रामकिशोर कावरे का भाई गिरफ्तार, एथेनॉल के नाम किया चावल घोटाला
समझें क्या है पूरा मामला...
- बालाघाट चावल घोटाले में एसआईटी ने बड़ी कार्रवाई की है।
- भाजपा जिलाध्यक्ष व पूर्व मंत्री के भाई कुमार कावरे को गिरफ्तार किया गया है।
- भतीजा अविनाश कावरे पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
- एथेनॉल प्लांट के नाम पर कागजों में करोड़ों का चावल खपाया गया था।
- अब तक इस घोटाले में 16 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।
एसआईटी की बड़ी कार्रवाई
बालाघाट के चर्चित चावल घोटाले में एसआईटी ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। एसआईटी ने भाजपा जिलाध्यक्ष व पूर्व मंत्री रामकिशोर कावरे के भाई कुमार कावरे को गिरफ्तार किया है। कुमार कावरे को भोपाल के गोविंदपुरा इलाके से पकड़ा गया है। वे कुछ समय से यहीं छिपे हुए थे।
इससे पहले पूर्व मंत्री के भतीजे अविनाश कावरे को भी गिरफ्तार किया गया था। दोनों की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में हलचल और तेज हो गई है। मामले में अब तक कुल 20 लोगों पर आरोप लग चुके हैं। इनमें से 16 लोगों को अब तक पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है।
इथेनॉल प्लांट के नाम पर घोटाला
यह पूरा मामला भारतीय खाद्य निगम यानी FCI (Food Corporation of India) के बालाघाट गोदाम से जुड़ा है। आरोप है कि यहां से करोड़ों रुपए मूल्य का चावल एक इथेनॉल प्लांट के नाम पर जारी किया गया। यह प्लांट छिंदवाड़ा जिले के हिंदवाड़ा में बताया गया है।
जांच में सामने आया कि यह चावल असल में प्लांट तक पहुंचा ही नहीं। इसकी जगह चावल की पूरी खेप बीच रास्ते में ही बिचौलियों के जरिए बेच दी गई। यह चावल आगे राइस मिलर्स और स्टॉकिस्टों तक पहुंचाया गया। इसी सांठगांठ में चावल की कालाबाजारी की गई।
3 जून को खुला था राज
यह घोटाला पहली बार 3 जून को सामने आया था। बालाघाट के वारासिवनी इलाके में एक ट्रक पकड़ा गया था। इस ट्रक में सरकारी फोर्टिफाइड चावल भरा हुआ था। यह चावल संचेती राइस मिल से इथेनॉल फैक्ट्री ले जाया जा रहा बताया गया। वहीं, जांच में पता चला कि यह चावल असल में मिल में ही खपाया जा रहा था। इसके बाद प्रशासन ने तुरंत जांच शुरू कर दी। वारासिवनी थाने में इस मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई गई।
जांच में सामने आया कि यह गड़बड़ी सिर्फ एक ट्रक तक सीमित नहीं थी। पूरे एक साल में इस इथेनॉल प्लांट के नाम पर 16 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा फोर्टिफाइड चावल जारी हुआ था। इसमें से अकेले बालाघाट से 5454 मीट्रिक टन चावल की खपत सामने आई है।
जानकारों का मानना है कि असल आंकड़ा इससे भी ज्यादा हो सकता है। यह चावल गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचना था। इसकी जगह इसे मुनाफे के लिए बेच दिया गया था।
एक इथेनॉल प्लांट और सरकारी सिस्टम से जुड़ी कीमतों में भी बड़ा अंतर मिला। सरकारी दर पर यह चावल करीब 2320 रुपए प्रति क्विंटल में निकलता था। इसे आगे बाजार में करीब 2800 रुपए प्रति क्विंटल में बेचा गया। इस तरह हर क्विंटल पर सीधा मुनाफा कमाया गया। यही मुनाफा प्लांट संचालकों, दलालों और मिलर्स के बीच बंटता रहा।
पिता-पुत्र से भी पूछताछ
जांच में एक इथेनॉल प्लांट संचालक पिता-पुत्र की भूमिका भी सामने आई है। दोनों से पुलिस पहले ही पूछताछ कर चुकी है। इसके साथ कई रसूखदार लोगों को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया।
पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क में कई स्तर के लोग शामिल थे। ट्रक चालकों से लेकर मिल मालिकों तक सबकी भूमिका जांची जा रही है। पहले हर्ष राइस मिल पर भी छापा मारा गया था। वहां से चार ट्रक चावल बरामद हुआ था। साथ ही सौ से ज्यादा खाली बोरियां भी मिली थीं। मिल के पार्टनर विनोद शर्मा से पूछताछ के बाद यह कार्रवाई हुई थी।
कुमार कावरे पर क्या आरोप
पुलिस के मुताबिक कुमार कावरे की भूमिका इस घोटाले में गंभीर मानी जा रही है। वे भाजपा जिलाध्यक्ष व पूर्व मंत्री रामकिशोर कावरे के भाई हैं। आरोप है कि हर्ष राइस मिल के दस्तावेजों में भी उनका नाम जुड़ा मिला है। यही वजह है कि कांग्रेस पार्टी ने भी इस मामले में सवाल उठाए थे।
कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि यदि जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। अब कुमार कावरे की गिरफ्तारी के बाद यह दबाव कुछ हद तक कम हो सकता है। भतीजा अविनाश कावरे भी हर्ष राइस मिल में 20 प्रतिशत का पार्टनर बताया गया है। इसी मिल में गोपाल ठाकुर नाम के व्यक्ति की भी 10 प्रतिशत हिस्सेदारी है। दोनों को इसी हफ्ते गिरफ्तार किया जा चुका था।
अब तक कितने गिरफ्तार
इस पूरे मामले में एसआईटी की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। अब तक कुल 16 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें ट्रक चालक, राइस मिल संचालक और इथेनॉल प्लांट के प्रतिनिधि शामिल हैं। सिवनी के एक ट्रांसपोर्टर को भी गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा कई अन्य राइस मिल संचालकों को भी पकड़ा गया है।
यहां तक कि पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के गोंदिया से भी दो भाइयों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का कहना है कि जांच अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
एफसीआई और सरकार का पक्ष
इस मामले में एफसीआई ने अपनी जांच रिपोर्ट पहले ही दिल्ली भेज दी थी। एफसीआई का कहना है कि आवंटन नीति का सीधा उल्लंघन नहीं हुआ। हालांकि संस्था ने यह भी माना कि निगरानी अभी जारी है। दूसरी तरफ राज्य के खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने भी इस पर बयान दिया था।
मंत्री ने कहा था कि प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। उन्होंने केंद्रीय खाद्य मंत्री को भी इस बारे में पत्र लिखा था। मंत्री ने साफ कहा था कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
क्यों गंभीर है यह मामला
फोर्टिफाइड चावल आम चावल से अलग होता है। इसमें पोषण के लिए खास विटामिन मिलाए जाते हैं। यह मुख्य रूप से कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए बनाया जाता है। ऐसे चावल का बाजार में बेचा जाना गंभीर लापरवाही मानी जा रही है।
इससे सरकारी अनाज वितरण व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। जानकारों का कहना है कि इस तरह के मामलों से जरूरतमंदों का हक छिन जाता है। यही वजह है कि इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है।
आगे क्या होगा
पुलिस अब कुमार कावरे और अविनाश कावरे से विस्तार से पूछताछ करेगी। इससे घोटाले के पूरे नेटवर्क की जानकारी मिलने की उम्मीद है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इसमें कौन-कौन अफसर शामिल थे। बालाघाट के अलावा पड़ोसी जिलों में भी पड़ताल तेज कर दी गई है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
ये खबरें भी पढ़िए...
एथेनॉल के नाम पर चावल घोटाला: 17 ट्रक जब्त, FCI ने दिल्ली भेजी जांच रिपोर्ट
व्यापमं, जमीन और अब चावल घोटाला: मल्लिकार्जुन खड़गे ने MP को बताया भ्रष्टाचार का केंद्र
MP में 1160 करोड़ का चावल घोटाला: 13 आरोपियों पर FIR,राइस मिलर्स पिता-पुत्र फरार
MP में एथेनॉल के नाम पर 1160 करोड़ का चावल घोटाला: कुपोषितों के निवाले से कमाया तगड़ा मुनाफा