बैंक ऑफ इंडिया मुरैना में 23 लाख का बड़ा गबन: 8 बैंक कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज
News in Short
- ईओडब्ल्यू ने बैंक ऑफ इंडिया मुरैना में ₹23 लाख के गबन का खुलासा किया है।
- हेड कैशियर सहित 8 बैंक कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज हुई।
- आरोपियों ने फर्जी खाते खोलकर और जाली व्हाउचरों से ग्राहकों का पैसा निकाला।
- ग्राहकों की 11 एफडीआर को मैच्योरिटी से पहले ही अवैध रूप से बंद किया गया।
- यह पूरी वित्तीय अनियमितता साल 2013 से 2016 के बीच अंजाम दी गई थी।
News in Detail
मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। बैंक ऑफ इंडिया की मुरैना शाखा में जनता के पैसों की बंदरबाट की गई। यहां तैनात अधिकारियों ने मिलकर 23 लाख रुपए से अधिक का गबन किया। यह पूरा खेल साल 2013 से लेकर 2016 के बीच खेला गया था। बैंक के ही कुछ सफेदपोश कर्मचारियों ने गरीब जनता की जमापूंजी हड़प ली।
डिप्टी जोनल मैनेजर की शिकायत से हुआ खुलासा
इस पूरे घोटाले शिकायत बैंक के डिप्टी जोनल मैनेजर ने ग्वालियर EOW में दर्ज कराई। जांच में पता चला कि बैंक के अंदर ही घोटाले को अंजाम दिया गया। मुख्यालय के आदेश पर पुलिस अधीक्षक ईओडब्ल्यू ग्वालियर ने जांच की। जांच के बाद 23 लाख रुपए से अधिक का गबन उजागर हुआ।
कैसे किया गया 23 लाख का यह भारी-भरकम गबन?
आरोपियों ने बहुत ही शातिर तरीके से इस पूरी साजिश को अंजाम दिया। उन्होंने बैंक के 08 खाताधारकों को अपना निशाना बनाया। सबसे पहले ग्राहकों की आईडी का गलत इस्तेमाल करके फर्जी खाते खोले गए। इन फर्जी खातों में ग्राहकों की बिना जानकारी के पैसे ट्रांसफर किए गए। जाली व्हाउचर और कूट रचित दस्तावेजों का इस खेल में सहारा लिया गया।
समय से पहले ही बंद कर दी गईं ग्राहकों की एफडीआर
भ्रष्टाचार की हद तो तब पार हो गई जब एफडीआर तोड़ी गई। कुल 11 एफडीआर को उनकी मैच्योरिटी अवधि से पहले ही बंद कर दिया। इन एफडीआर से निकली राशि को कर्मचारियों ने आपस में बांट लिया था। खाताधारकों को भनक तक नहीं लगी कि उनके साथ बैंक में धोखाधड़ी हुई। हेड कैशियर महेंद्र सिंह बाजौरिया इस पूरे गिरोह का मुख्य सूत्रधार था।
EOW की एफआईआर में इन 8 कर्मचारियों के नाम
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने कुल 8 कर्मचारियों पर शिकंजा कसा है। इसमें महेंद्र सिंह बाजौरिया, गौरीशंकर राम और रुचि तिवारी के नाम प्रमुख हैं। इनके अलावा इंद्रनाथ विश्वास, विकास शर्मा और विकास त्रिवेदी पर भी मामला दर्ज। विजय कुमार मेहता और सौरभ मिश्रा भी इस घोटाले में शामिल पाए गए। इन सभी के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार का जीरो टॉलरेंस अभियान
इस कार्रवाई से बैंकिंग सेक्टर के भ्रष्ट अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। सरकार अब ऐसे धोखेबाजों को किसी भी कीमत पर छोड़ने वाली नहीं है। जनता के खून-पसीने की कमाई को लूटना अब इन अधिकारियों को महंगा पड़ेगा। ईओडब्ल्यू अब इस मामले की गहराई से विवेचना कर कड़ी सजा दिलाएगी। बैंक ऑफ इंडिया के इस मामले ने बैंकिंग व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
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