जबलपुर क्रूज हादसा : हाई-लेवल कमेटी की जांच शुरू होते ही उठे सवाल, कबाड़ बन चुके क्रूज से आखिर कैसे निकलेगा सच?

Neel Tiwari | May 07, 2026, 18:34 IST
Photograph: (the sootr)
बरगी क्रूज हादसे की जांच के लिए बनाई गई हाई-लेवल कमेटी के गठन के बाद पूरे क्रूज को कबाड़ बना देने पर सवाल उठने लगे हैं। हादसे के कारणों की तकनीकी जांच पर अब कई संदेह हैं।

News In Short

  • जबलपुर क्रूज हादसा जांच के लिए ACS की अध्यक्षता में हाई-लेवल कमेटी गठित
  • कमेटी हादसे की परिस्थितियों, तकनीकी खामियों और प्रोटोकॉल उल्लंघन की जांच करेगी
  • हादसे के बाद पूरे क्रूज को डिस्मेंटल किए जाने पर उठे सवाल
  • जिला अदालत के स्वतः संज्ञान और FIR निर्देश के बाद बढ़ा दबाव

Intro

बरगी क्रूज हादसे की जांच के लिए सरकार ने हाई-लेवल कमेटी बनाई है और 15 दिनों में रिपोर्ट आने का दावा किया जा रहा है। लेकिन हादसे के बाद पूरे क्रूज को डिस्मेंटल कर कबाड़ में बदल दिए जाने से जांच पर ही सवाल उठने लगे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि जब तकनीकी हिस्से ही क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, तो आखिर तकनीकी जांच किस आधार पर होगी?



News in detail

15 दिनों में रिपोर्ट का दावा, लेकिन जांच शुरू होने से पहले ही सवाल

जबलपुर के बरगी बांध में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे के बाद सरकार ने मामले की जांच के लिए एक हाई-लेवल कमेटी गठित की है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और बरगी विधायक नीरज सिंह के अनुसार इस कमेटी की अगुवाई ACS स्तर के अधिकारी कर रहे हैं, जबकि इसमें संभागीय कमिश्नर, पर्यटन सचिव और होमगार्ड के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं।



सरकार का कहना है कि कमेटी तीन मुख्य बिंदुओं पर जांच करेगी। हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, क्या क्रूज में तकनीकी खामी थी और क्या तय सुरक्षा प्रोटोकॉल्स का उल्लंघन हुआ। लगभग 15 दिनों में रिपोर्ट आने की बात कही जा रही है। लेकिन जांच शुरू होने से पहले ही अब इसकी निष्पक्षता और असर पर सवाल उठने लगे हैं।



कबाड़ बन चुके क्रूज से कैसे बाहर आएगा सच

हादसे के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पूरे क्रूज को भारी मशीनों और हथौड़ों की मदद से तोड़ दिया गया। स्थानीय लोगों का दावा है कि इंजन सहित कई तकनीकी हिस्से भी क्षतिग्रस्त हो गए। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब कमेटी को तकनीकी खामियों की जांच करनी है, तो वह आखिर किस आधार पर करेगी?।क्या बिना मूल संरचना और मशीनरी की स्थिति देखे यह तय किया जा सकेगा कि हादसा तकनीकी खराबी से हुआ या मानवीय लापरवाही से? यही वजह है कि अब हाई-लेवल जांच को लेकर लोगों के बीच “खानापूर्ति” जैसी चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं।





आखिर क्यों तोड़ा गया क्रूज?

सूत्रों के अनुसार गोताखोरों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि क्रूज के भीतर अब कोई शव फंसा नहीं है। इसके बावजूद पूरे क्रूज को बाहर निकालने के दौरान उसे कबाड़ बना दिया गया। दूसरी ओर अगर यह दावा भी किया जाए कि क्रूज के अंदर शव होने की संभावना थी तो क्रूज को ध्वस्त करते हुए निकालने पर शव क्षतविक्षत हो सकते थे। फिर आखिर ऐसा निर्णय क्यों लिया गाया। क्या यह केवल रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान हुई गलती थी या फिर जानकार तकनीकी सबूत खत्म किए गए।



डिजास्टर मैनेजमेंट की तैयारी पर भी खड़े हुए सवाल

हादसे के दौरान जिस तरह संसाधनों की कमी और समन्वय की अव्यवस्था दिखाई दी, उससे जबलपुर के डिजास्टर मैनेजमेंट सिस्टम पर भी सवाल उठने लगे हैं। मौके पर यह स्पष्ट नहीं था कि किस SOP के तहत कार्रवाई की जा रही है। भारी उपकरणों की कमी और निर्णय लेने में भ्रम भी नजर आया। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के गोताखोर और टीम ने तो पूरी मुस्तैदी से काम किया।



लेकिन क्रूज को बाहर निकालने के लिए निजी मशीन ऑपरेटर सिर्फ निर्देशों पर काम कर रहे थे और यह साफ नजर आ रहा था कि इन्हें इस तरह के बचाव कार्य की कोई जानकारी नहीं थी। इससे यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या शहर इस तरह की आपदा से निपटने के लिए वास्तव में तैयार है भी या नहीं।



सरकार का दावा - दोषियों को नहीं बख्शेंगे

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और बरगी विधायक नीरज सिंह ने दावा किया कि जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रारंभिक तौर पर कुछ कर्मचारियों को सेवा से पृथक भी किया गया है।



अब तक क्रू पायलट, असिस्टेंट क्रू पायलट, टिकट काउंटर प्रभारी और बोट क्लब मैनेजर स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई है। वहीं MPT के संजय मल्होत्रा को भोपाल अटैच कर उन्हें जांच के दायरे में लिया गया है।लेकिन जनता के बीच यह सवाल लगातार बना हुआ है कि क्या जांच बड़े अधिकारियों और सिस्टम की जिम्मेदारियों तक पहुंचेगी या पूरा मामला छोटे कर्मचारियों तक सीमित रह जाएगा।



जिला अदालत के संज्ञान के बाद बढ़ा दबाव

मामले में जिला अदालत द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर FIR दर्ज करने के निर्देश दिए जाने के बाद प्रशासनिक दबाव और बढ़ गया है। हालांकि अब तक FIR दर्ज होने को लेकर स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। सूत्रों के मुताबिक पुलिस अदालत से अतिरिक्त समय मांग सकती है। इसी बीच हाई-लेवल कमेटी की जांच को लेकर भी लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं।



हाईलेवल कमेंटी प्रारंभिक तौर पर क्रू पायलट की भूमिका कर रही तय

इस मामले में जांच कमेटी फिलहाल सबसे पहले क्रू पायलट की गलती पर जांच कर रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कलेक्ट्रेट कार्यालय के कक्ष क्रमांक 7 में क्रू पायलट महेश का सामना वीडियो कांफ्रेंस के जरिए पीड़ितों से कराया जा रहा है। जिसमें उसकी भूमिका तय की जा रही है कि उसने हादसे के वक्त यात्रियों की सहायता करने की कोई कोशिश की थी या बिना किसी सहायता किया वहां से भाग निकला था।



जानकारी यह भी सामने आई है कि कुछ पीड़ितों ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिए अपने बयान दर्ज करा दिए हैं और कुछ ने व्यस्तता के चलते कॉल नहीं उठाया जिनसे कल दोबारा बात की जाएगी।



30 अप्रैल की वह दर्दनाक शाम

30 अप्रैल 2026 को मध्यप्रदेश के बरगी डैम में हुआ क्रूज हादसा प्रदेश की सबसे दर्दनाक पर्यटन त्रासदियों में शामिल हो गया, जब तेज आंधी, बारिश और नर्मदा बैकवाटर में उठी ऊंची लहरों के बीच पर्यटकों से भरा एक क्रूज अचानक पलटकर डूब गया। हादसे के समय क्रूज में 41 लोग सवार थे, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे।



प्रत्यक्षदर्शियों और बचकर निकले यात्रियों के अनुसार मौसम खराब होने के बावजूद क्रूज को बीच पानी में ले जाया गया और यात्रियों द्वारा किनारे लगाने की चेतावनी को नजरअंदाज किया गया। हादसे के दौरान कई लोगों को समय पर लाइफ जैकेट तक नहीं मिल सकीं, जबकि क्रूज के निचले हिस्से में पानी भरने और खिड़कियां टूटने से अफरा-तफरी मच गई। इस भीषण दुर्घटना में अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है और 28 लोग रेस्क्यू किए गए है। हादसे के बाद एनडीआरएफ, होमगार्ड और गोताखोरों ने लगातार रेस्क्यू अभियान चलाया।



इस त्रासदी ने उस समय पूरे देश को झकझोर दिया जब एक मां का शव अपने छोटे बेटे को सीने से लगाए हुए मिला। घटना के बाद सुरक्षा मानकों की अनदेखी, खराब मौसम में संचालन और क्रूज की तकनीकी स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठे, जिस पर न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज कर जांच के निर्देश भी दिए हैं। अब पूरे प्रदेश की नजर उस हाई-लेवल जांच रिपोर्ट पर है, जिससे यह तय होगा कि हादसा सिर्फ एक दुर्घटना था या लापरवाही की बड़ी कहानी।



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