बिना हाजिरी बंट गया 275 करोड़ का वेतन, आरटीआई से हुआ बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी में घोटाले का खुलासा
लेकिन यूनिवर्सिटी हाजिरी का रिकॉर्ड नहीं दिखा सका। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं कर पाया कि कर्मचारियों की मौजूदगी कैसे जांची गई। ऐसे में सरकारी पैसे के इस्तेमाल पर सवाल उठ रहे हैं। मामला सामने आने के बाद यूनिवर्सिटी के कामकाज पर सवाल उठ रहे हैं।
बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी घोटाले का सच
खबरों के मुताबिक, पिछले 35 साल में हाजिरी में गड़बड़ी का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ। सूचना के अधिकार (RTI) के जवाब में हाजिरी का रिकॉर्ड भी नहीं मिला है। आरोप है कि 1988 से 2023 तक स्टाफ को बिना हाजिरी वेतन दिया गया। इस दौरान यूनिवर्सिटी में शिक्षकों की संख्या बढ़ी।
खबरों के मुताबिक, शुरुआत में शिक्षण स्टाफ के पांच सदस्य थे। बाद में विभागों की संख्या बढ़कर 20 हो गई। इन विभागों में कुल 40 शिक्षक काम करते हैं। इसके अलावा 21 संविदा शिक्षक भी कार्यरत हैं। यूनिवर्सिटी में 250 गेस्ट फैकल्टी शिक्षक भी पढ़ाते हैं। फिलहाल यूनिवर्सिटी का सालाना खर्च करीब 13 करोड़ रुपए बताया गया है।
पूर्व छात्र ने की जांच की मांग
यह मामला पूर्व छात्र धर्मेंद्र सिंह के RTI आवेदन से सामने आया। उन्होंने यूनिवर्सिटी से कर्मचारियों की हाजिरी और वेतन से जुड़ी जानकारी मांगी थी। उनका सवाल था कि हाजिरी दर्ज नहीं थी, तो वेतन कैसे दिया गया।लेकिन यूनिवर्सिटी इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दे पाया। यह भी नहीं बताया गया कि कर्मचारियों की मौजूदगी कैसे जांची जाती थी। अब इस मामले में वेतन बिलों की प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं।
खबरों के मुताबिक, पूर्व छात्र ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच हो। यह भी पता लगाया जाए कि वेतन बिल किसने प्रमाणित किए। साथ ही, भुगतान से जुड़े डॉक्यूमेंट्स की भी जांच होनी चाहिए। यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार एसबी सिंह ने इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि ये घटनाएं उनके कार्यकाल से पहले की हैं।
रजिस्ट्रार जांच के आदेश पर क्या बोले
कर्मचारियों की हाजिरी और वेतन पर सवाल
275 करोड़ रुपए के वेतन भुगतान पर विवाद
इस मामले में करीब 275 करोड़ रुपए के वेतन भुगतान का जिक्र है। वहीं, पूर्व छात्र ने करीब 250 करोड़ रुपए के भुगतान पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस रकम का आधार स्पष्ट नहीं है। जांच में यह पता लगाना जरूरी होगा कि वेतन का भुगतान किस आधार पर हुआ।
खबरों के मुताबिक, सिर्फ हाजिरी का रिकॉर्ड नहीं मिलना ही सवाल नहीं है। वेतन बिलों को मंजूरी देने की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में है। यह पता लगाना होगा कि बिल किसने तैयार किए। किस अधिकारी ने उन्हें प्रमाणित किया। भुगतान से पहले किन डॉक्यूमेंट्स की जांच हुई।
जांच में इन सवालों के जवाब तलाशने होंगे
इस मामले में सबसे पहले हाजिरी से जुड़े रिकॉर्ड की जांच जरूरी है। यह देखना होगा कि कोई दूसरा रिकॉर्ड रखा जाता था या नहीं। इसके लिए क्लासेस और विभागों से जुड़े डॉक्यूमेंट देखे जा सकते हैं। जांच में छुट्टी के आवेदन भी देखना जरूरी होगा। विभागीय रिपोर्ट और वेतन बिलों की भी जांच होनी चाहिए। इससे कर्मचारियों की मौजूदगी और वेतन भुगतान की जानकारी मिल सकती है।
बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी का इतिहास और महत्व
बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी मध्य प्रदेश का एक प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थान है। यह राज्य के आठ जिलों की उच्च शिक्षा से जुड़ा है। इसकी शुरुआत साल 1970 में हुई थी। तब इसका नाम भोपाल यूनिवर्सिटी रखा गया था।साल 1988 में इसका नाम बदलकर बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी कर दिया गया। इसके बाद यूनिवर्सिटी का विस्तार हुआ। यहां विभागों और शिक्षकों की संख्या भी बढ़ी।
साल 2025 में यूनिवर्सिटी को NAAC से A ग्रेड मिला। NAAC का पूरा नाम नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल है। यह उच्च शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता का मूल्यांकन करता है। ऐसे में यूनिवर्सिटी पर लगे आरोप गंभीर सवाल खड़े करते हैं। अब जांच से ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी। सरकारी पैसे का सही हिसाब मिलना भी जरूरी है। इससे संस्थान की व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बना रहेगा।
FAQs
- बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी में किस तरह के घोटाले का आरोप लगा है?
आरोप है कि 1988 से 2023 तक कर्मचारियों को बिना हाजिरी वेतन दिया गया। - यह मामला कैसे सामने आया?
यह मामला पूर्व छात्र धर्मेंद्र सिंह के RTI आवेदन के जरिए सामने आया, जिसमें यूनिवर्सिटी से कर्मचारियों की हाजिरी और वेतन की जानकारी मांगी गई थी। - इस मामले में कितने रुपए के वेतन भुगतान का जिक्र है?
इस मामले में करीब 275 करोड़ रुपए के वेतन भुगतान का जिक्र है, हालांकि भुगतान से जुड़ी गड़बड़ी की पुष्टि जांच के बाद होगी।