बेंगलुरु की कंपनी का बड़ा ऐलान, एमपी सहित 4 राज्यों के पुरुषों को नहीं देंगे नौकरी

Manya Jain | Sept 24, 2026, 13:44 IST
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बेंगलुरु की कंपनी A1 Sports World के फाउंडर कार्तिक एसजी ने एमपी सहित चार राज्यों के पुरुषों को नौकरी न देने का ऐलान किया। इसका कारण एक पूर्व कर्मचारी पर लगे आरोप बताए गए हैं। सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है।

    बेंगलुरु की कंपनी के फाउंडर कार्तिक एसजी ने बड़ा ऐलान किया है। कंपनी मध्य प्रदेश सहित राजस्थान, उत्तर प्रदेश, और बिहार के पुरुषों को नौकरी नहीं देगी। फाउंडर के मुताबिक फैसला एक पूर्व कर्मचारी पर लगे आरोपों के बाद लिया गया है।



    इन आरोपों की पूरी तरह पुष्टि अभी नहीं हुई है। इस फैसले पर सोशल मीडिया में सुरक्षा और भेदभाव को लेकर बहस छिड़ी है।



    सोचिए, आप नौकरी के लिए इंटरव्यू देने पहुंचे हैं। फिर पता चले कि आपको आपके राज्य की वजह से नौकरी नहीं मिलेगी। बेंगलुरु की एक कंपनी की भर्ती नीति को लेकर ऐसा ही मामला आया है। कंपनी ने एमपी राजस्थान सहित चार राज्यों के पुरुषों को नौकरी न देने का ऐलान किया है।



    फाउंडर ने X पर क्या कहा

    A1 Sports World के फाउंडर कार्तिक एसजी ने 22 सितंबर को X पर लिखा। उन्होंने पोस्ट की शुरुआत में खेद जताया। फिर लंबी चर्चा और विवाद के बाद लिए गए फैसले की जानकारी दी।



    उनकी कंपनी अब चार राज्यों के पुरुष उम्मीदवारों को नौकरी नहीं देगी। इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश के नाम हैं। पोस्ट में चारों राज्यों के नाम साफ लिखे गए।



    कंपनी में कुल 32 कर्मचारी हैं। इनमें 14 महिलाएं हैं। कार्तिक के मुताबिक कंपनी बच्चों के लिए स्पोर्ट्स प्रोग्राम भी चलाती है। इसलिए उनके लिए कर्मचारियों की सुरक्षा सबसे अहम है। बच्चों के साथ काम करने वाली संस्थाओं में सुरक्षा बेहद संवेदनशील मुद्दा है।



    पोस्ट सामने आने के बाद कई यूजर्स ने सवाल उठाए। उनका पूछना था कि राज्य के आधार पर भर्ती करना कितना सही है।



    क्या थी पूरी घटना

    कार्तिक के अनुसार करीब दो हफ्ते पहले कंपनी ने एक कर्मचारी को निकाला। दावा है कि महिला स्टाफ से कथित बदसलूकी पर दो बार चेतावनी दी गई।



    आरोप है कि इसके बावजूद उसने एक महिला कर्मचारी से जबरदस्ती की कोशिश की। इन आरोपों की पूरी तरह पुष्टि नहीं हुई है।



    रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि निकाला गया कर्मचारी किस राज्य का था। कर्मचारी का नाम भी सामने नहीं आया है।



    कार्तिक ने यह भी बताया कि भर्ती के समय उसका रिज्यूमे सामान्य था। बैकग्राउंड चेक में भी कुछ अलग नहीं मिला था। घटना के बाद उन्होंने हायरिंग नियम बदलने का फैसला लिया।



    उनके मुताबिक कंपनी में कम उम्र के बच्चों के साथ काम होता है। इसलिए वे सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतना चाहते हैं।



    कंपनी की भर्ती पर सफाई

    कार्तिक ने कहा कि उनकी कंपनी समान अवसर में विश्वास करती है। उनके मुताबिक 20 कर्मचारी दूसरे राज्यों से हैं। इनमें 12 कर्मचारी दक्षिण भारत के बाहर के राज्यों से हैं।



    सीईओ (CEO – Chief Executive Officer) कार्तिक ने आलोचना का सामना भी किया। उनके मुताबिक ज्यादातर जवाब बिहार से आए।



    उन्होंने कहा कि वे अपने राज्य की समस्याओं से इनकार नहीं करते। गलतियां मानकर उन्हें सुधारना चाहिए, यह भी उनका कहना है। कार्तिक अब भी कर्मचारी को निकालने के फैसले पर कायम हैं।



    मध्य प्रदेश-राजस्थान कनेक्शन

    इस फैसले में मध्य प्रदेश और राजस्थान के पुरुष उम्मीदवार भी शामिल हैं। यह फैसला एक छोटी कंपनी का है, जिसमें 32 कर्मचारी हैं। मूल रिपोर्ट में किसी सरकारी कार्रवाई का जिक्र नहीं है।



    सोशल मीडिया पर बहस क्यों

    पोस्ट वायरल होते ही यूजर्स की अलग अलग प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कुछ लोगों ने इसे क्षेत्रीय भेदभाव बताते हुए आलोचना की। कई यूजर्स ने कंपनी पर कार्रवाई की मांग भी उठाई।



    दूसरी तरफ कुछ यूजर्स ने कंपनी की सुरक्षा चिंता का समर्थन किया। कुछ यूजर्स ने इसे कंपनी का आंतरिक फैसला बताया।



    लोगों ने कर्मचारी के कथित व्यवहार को पूरे राज्य से जोड़ने पर सवाल उठाया। भर्ती में उम्मीदवार की योग्यता और व्यवहार की जांच पर ध्यान होना चाहिए। ऐसा कई यूजर्स ने सुझाया।



    बहस के बड़े सवाल

    इस मामले ने कुछ बड़े सवाल खड़े किए हैं। पहला सवाल है कि क्या राज्य के आधार पर भर्ती रोकना सही है। दूसरा सवाल है कि क्या क्षेत्रीय पहचान भर्ती का आधार बन सकती है।



    तीसरा सवाल कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़ा है। किसी कर्मचारी के कथित व्यवहार के बाद भर्ती में क्या बदलाव होने चाहिए। कंपनियों को सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाने चाहिए, यह भी चर्चा में है।



    अब आगे क्या होगा

    फाउंडर अपने फैसले पर कायम दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी चलाने से जुड़े फैसले लेने का अधिकार उनके पास है। आलोचना के जवाब में भी उन्होंने अपने फैसले का बचाव किया।



    आरोपों की पुष्टि होने या न होने पर तस्वीर और साफ हो सकती है। यह मामला वर्कप्लेस सेफ्टी और भर्ती नीति पर नई बहस छेड़ गया है।



    पाठकों के लिए जरूरी बात

    यह फैसला अभी सिर्फ एक कंपनी का है। यह किसी सरकारी नीति या कानून में बदलाव नहीं है। नौकरी खोजने वाले उम्मीदवार अलग अलग कंपनियों की भर्ती शर्तें ध्यान से देखे



    FAQ

    1. किस कंपनी ने पुरुष उम्मीदवारों की हायरिंग बैन की है ?
      बेंगलुरु की कंपनी A1 Sports World ने मध्य प्रदेश, राजस्थान उत्तर प्रदेश और बिहार के पुरुष उम्मीदवारों की हायरिंग बैन की है ।
    2. कंपनी ने यह फैसला क्यों लिया?
      कार्तिक के मुताबिक कंपनी ने करीब दो हफ्ते पहले एक कर्मचारी को निकाला था। निकाले गए कर्मचारी पर महिला स्टाफ से कथित बदसलूकी और जबरदस्ती की कोशिश का आरोप है। इन आरोपों की पूरी तरह पुष्टि नहीं हुई है।
    3. इस फैसले पर सोशल मीडिया पर क्या प्रतिक्रिया आई?
      कुछ यूजर्स ने इसे क्षेत्रीय भेदभाव बताकर आलोचना की। कुछ ने इसे कंपनी का आंतरिक फैसला बताया और सुरक्षा चिंता का समर्थन किया। इससे हायरिंग और वर्कप्लेस सेफ्टी पर नई बहस शुरू हुई है।

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