बैतूल कलेक्टर सौरभ संजय सोनवणे के नाम पर ठगी, मैसेज कर मांग रहे पैसे

Aman Vaishnav | Jun 17, 2026, 09:34 IST
कलेक्टर सौरभ संजय सोनवणे
बैतूल में साइबर ठग कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर ठगी कर रहे हैं। लोगों के पास विदेशी नंबरों से व्हाट्सएप पर मैसेज भेजे जा रहे हैं। कलेक्टर ने लोगों से कहा है कि...

बैतूल में साइबर ठगी का नया तरीका

बैतूल जिले में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक नया और खतरनाक तरीका अपनाया है। अब वे आम लोगों को नहीं बल्कि पूरे समाज का भरोसा तोड़ने की कोशिश में हैं। ठग अब जिले के सबसे बड़े प्रशासनिक अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल कर रहे हैं।



आईएएस डॉ. सौरभ संजय सोनवणे की असली फोटो, नाम और पदनाम का दुरुपयोग हो रहा है। ठग व्हाट्सएप और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी प्रोफाइल बना रहे हैं। साथ ही इनसे लोगों को मैसेज कर पैसे मांग रहे हैं।



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विदेशी नंबरों से आ रहे संदिग्ध मैसेज

जानकारी के अनुसार इन फर्जी संदेशों में एक खास पैटर्न देखा जा रहा है। ये मैसेज खासतौर पर +66 सीरीज के विदेशी नंबरों से भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा कुछ संदिग्ध भारतीय मोबाइल नंबर भी इस्तेमाल हो रहे हैं।



ठगों का तरीका बेहद चालाक है। वे पहले किसी जरूरतमंद की मदद करने का नाटक करते हैं। फिर कहते हैं कि तुरंत पैसे भेज दो बाद में लौटा दिए जाएंगे। लोग अधिकारी का नाम और चेहरा देखकर भरोसा कर लेते हैं।



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कलेक्टर ने खुद किया फर्जीवाड़ा उजागर

जैसे ही यह मामला सामने आया कलेक्टर डॉ. सौरभ सोनवणे ने खुद आगे आकर सफाई दी। उन्होंने अपने व्हाट्सएप स्टेटस के जरिए लोगों को सतर्क किया। उन्होंने साफ कहा कि यह पूरी तरह फर्जी और भ्रामक गतिविधि है।



कलेक्टर ने बताया कि वे कभी भी किसी से फोन या व्हाट्सएप पर निजी खाते में पैसे भेजने को नहीं कहते हैं। सोशल मीडिया के जरिए भी इस तरह की कोई मांग उनकी तरफ से नहीं की जाती। जो भी ऐसा मैसेज मिले वह पूरी तरह फर्जी है।



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ऐसे बचें साइबर ठगी से

कलेक्टर और प्रशासन ने नागरिकों से कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की अपील की है। किसी भी अनजान नंबर से आए मैसेज पर तुरंत भरोसा न करें। खासकर तब जब वह पैसे मांग रहा हो।



बैंकिंग जानकारी जैसे अकाउंट नंबर, ओटीपी या पासवर्ड किसी के साथ भी साझा न करें। चाहे वह खुद को कोई बड़ा अधिकारी ही क्यों न बता रहा हो।



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ऐसा मैसेज मिले तो क्या करें

यदि आपके पास ऐसा कोई संदिग्ध मैसेज आए तो घबराएं नहीं। सबसे पहले उस मैसेज का स्क्रीनशॉट ले लें और सुरक्षित रखें। इसे डिलीट बिल्कुल न करें क्योंकि यह सबूत के रूप में काम आएगा।



इसके बाद तुरंत अपने नजदीकी पुलिस थाने या साइबर सेल को सूचना दें। आप राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर भी कॉल कर सकते हैं। जितनी जल्दी शिकायत होगी उतना ही ठगों को पकड़ना आसान होगा।



जांच शुरू संदिग्ध नंबरों पर नजर

बता दें कि प्रशासन ने इस मामले की जानकारी संबंधित एजेंसियों को दे दी है। संदिग्ध मोबाइल नंबरों और फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच शुरू हो चुकी है। पुलिस और साइबर सेल मिलकर इन ठगों का पता लगाने में जुटे हैं।



यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि ठग विदेशी नंबरों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे उनका पता लगाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। फिर भी एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क की जांच कर रही हैं।



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सिर्फ बैतूल नहीं, पूरे मध्यप्रदेश में खतरा

यह फर्जीवाड़ा सिर्फ बैतूल तक सीमित नहीं है। मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के दूसरे जिलों में भी इसी तरह की घटनाएं सामने आती रही हैं। पहले भी कई जगह अधिकारियों और नेताओं के नाम पर ठगी हो चुकी है।



पानी की एक बोतल ढाई लाख की

हाल ही में मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से भी एक ठगी का मामला सामने आया है। यहां एक कॉलेजछात्रा को ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म से महज पानी की एक बोतल ढाई लाख की पड़ी।



बता दें कि शातिर ठगों ने रिफंड देने का झांसा देकर न सिर्फ उसका मोबाइल हैक किया, बल्कि उसकी निजी तस्वीरें और वीडियो चुराकर उसे ब्लैकमेल भी किया।



ऑर्डर के बाद अनजान नंबर से आया फोन

यह पूरी घटना इंदौर के खजराना थाना इलाके की है। पीड़ित लड़की एक कॉलेज स्टूडेंट है। उसने कुछ दिनों पहले एक ऑनलाइन ऐप या वेबसाइट के जरिए पानी की एक बोतल का ऑर्डर दिया था। ऑर्डर करने के कुछ ही देर बाद उसके पास एक अनजान नंबर से फोन आया।



फोन करने वाले शख्स ने खुद को कंपनी का प्रतिनिधि बताया। उसने छात्रा से कहा कि आपके ऑर्डर के पैसे वापस यानी रिफंड किए जाने हैं। छात्रा उसकी मीठी-मीठी बातों में आ गई और जैसा उसने कहा, वैसा करने को तैयार हो गई।





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FAQ

  1. UPI लिंक से मोबाइल कैसे हैक होता है?
    ठग एक खास तरह का मैलवेयर लिंक (Malware Link) भेजते हैं जो क्लिक करते ही फोन में रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर देता है। इससे आरोपी दूर बैठे आपके फोन की पूरी स्क्रीन देख सकते हैं और डेटा चुरा सकते हैं। असली UPI पेमेंट के लिए कभी भी किसी लिंक पर क्लिक करने की जरूरत नहीं होती।
  2. साइबर ठगी होने पर तुरंत क्या करें?
    तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें और बैंक को भी सूचित करें। जितनी जल्दी शिकायत होगी, ट्रांजेक्शन रोकने की संभावना उतनी ज्यादा होगी। नजदीकी पुलिस थाने में भी लिखित शिकायत जरूर दर्ज कराएं।

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