भिंड कलेक्टर किरोड़ी लाल मीणा को हाईकोर्ट की फटकार, मंदिर जमीन विवाद में झूठा शपथ पत्र देने पर भड़के जज

Sanjay Dhiman | Nov 18, 2025, 14:34 IST
Photograph: (the sootr)
ग्वालियर हाईकोर्ट ने भिंड कलेक्टर किरोड़ी लाल मीणा को फटकार लगाई है। यह फटकार उन्हें दंदरौआ मंदिर ट्रस्ट की जमीन विवाद में झूठा शपथ पत्र देने लगी है। कोर्ट ने उनकी माफी ठुकराते हुए कड़ी चेतावनी दी है।

Gwalior. ग्वालियर हाईकोर्ट ने हाल ही में भिंड कलेक्टर किरोड़ी लाल मीणाको कड़ी फटकार लगाई है। यह मामला दंदरौआ सरकार मंदिर से जुड़ी जमीन के विवाद से जुड़ा है।



कोर्ट ने कलेक्टर पर झूठा शपथ पत्र देने को लेकर नाराजगी जताई है। आईएएस किरोड़ी लाल मीणा पर जानबूझकर कमिश्नर ऑफिस से जुड़ी जानकारी छिपाने का भी आरोप भी लगा है। इस मामले ने सरकारी कामकाज के तरीके पर सवाल खड़े कर दिए हैं।



क्या है दंदरौआ मंदिर जमीन विवाद का मामला?

दंदरौआ मंदिर के ठीक सामने वाली जमीन मंदिर ट्रस्ट को आवंटित की गई थी। बाद में पता चला कि राजस्व रिकॉर्ड में इस जमीन के दस्तावेजों से सरकार का नाम हटा दिया गया था। इस गलती के सामने आने पर उस समय के तहसीलदार राजनारायण खरे को सस्पेंड कर दिया गया था।



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कलेक्टर ने कहां दी गलत जानकारी?

इस मामले की जांच का जिम्मा एसडीएम मेहगांव नवनीत शर्मा को दिया गया था। एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट देने में करीब 9 महीने लगा दिए, जिस पर कोर्ट ने पहले भी नाराजगी जताई थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर, कलेक्टर ने 10 नवंबर की सुनवाई में एक शपथ पत्र पेश किया था।



शपथ पत्र में कलेक्टर ने दावा किया कि प्रस्ताव 11 अप्रैल 2025 को हीकमिश्नर कार्यालय भेज दिया गया था। उन्होंने कोर्ट को बताया कि अब यह मामला संभागायुक्त के पासलंबित है। इसलिए आगे नहीं बढ़ पा रहा।



भिंड कलेक्टर को कोर्ट की फटकार मामले को ऐसे समझें

भिंड कलेक्टर को हाईकोर्ट की फटकार: ग्वालियर हाईकोर्ट ने भिंड कलेक्टर किरोड़ी लाल मीणा को दंदरौआ मंदिर जमीन विवाद में झूठा शपथ पत्र देने पर कड़ी फटकार लगाई।

गलत जानकारी देने का आरोप: कलेक्टर ने कोर्ट में गलत जानकारी दी और संभागायुक्त के पत्रों को छुपाया, जिससे अदालत ने उनका कड़ा विरोध किया।

माफी ठुकराई: कलेक्टर ने बिना शर्त माफी मांगी, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि यह गंभीर मामला है।

एसडीएम की माफी: एसडीएम नवनीत शर्मा ने भी माफी मांगी, जिसे अदालत ने रिकॉर्ड में लिया, लेकिन कलेक्टर के मामले में माफी से नहीं बल्कि सही तथ्यों से सुधार की बात की।

विवाद की गंभीरता: अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए कलेक्टर को सही जानकारी देने का निर्देश दिया और कहा कि यह गलती माफी से नहीं, बल्कि तथ्यों से सुधार होगी।

कमिश्नर के पत्रों की नहीं दी जानकारी

कोर्ट में पेश किए गए शपथ पत्र के बाद एक और बात सामने आई, जो चौंकाने वाली थी। असल में, संभागायुक्त ने मई और जुलाई में कलेक्टर को दो पत्र लिखे थे।



इन पत्रों में स्पष्ट कहा गया था कि कलेक्टर द्वारा भेजा गया प्रस्ताव अधूरी जानकारी के साथ था। वहीं कलेक्टर ने कोर्ट में पेश किए गए शपथ पत्र में इन पत्रों का कोई उल्लेख नहीं किया। यह स्पष्ट रूप से जानकारी को छिपाने की कोशिश थी, जिसे कोर्ट ने बेहद गंभीर माना।



कोर्ट ने ठुकराई कलेक्टर की माफी

कोर्ट ने यह भी कहा कि आपने संभागायुक्त पर आरोप लगाए हैं, पर कोर्ट को इससे मतलब नहीं है। यह घटना सरकारी अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है।



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एसडीएम ने भी मांगी माफी

इस मामले की जांच करने वाले एसडीएम नवनीत शर्मा ने भी कोर्ट में बिना शर्त माफी मांग ली। कोर्ट ने उनकी माफी को रिकॉर्ड में ले लिया। कोर्ट ने कलेक्टर के लिए कहा यह गलती माफी से नहीं, सही जवाब से ठीक होगी। कलेक्टर ने सफाई दी कि उनकी मंशा गलत नहीं थी। कोर्ट ने लिखित रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कड़े शब्दों में चेतावनी दी।



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