फैकल्टी मुक्त हुआ भोज विश्वविद्यालय, शिक्षकों की कमी दूर करने प्रतिनियुक्ति का सहारा, भर्ती से परहेज
News in Short
- भोज मुक्त विश्वविद्यालय में 10 साल से फैकल्टी की भर्ती नहीं हुई।
- 40 से ज्यादा पद खाली हैं, केवल दो नियमित शिक्षक कार्यरत हैं।
- फैकल्टी की कमी से छात्रों में प्रवेश को लेकर रुचि कम हो रही है।
- 2016 में भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन विवादों के कारण अधूरी रही।
- नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया शुरू करने में विश्वविद्यालय प्रबंधन सुस्त
BHOPAL. भोज मुक्त विश्वविद्यालय में पिछले 10 सालों से नियमित फैकल्टी की भर्ती नहीं हो पाई है। परिणामस्वरूप विश्वविद्यालय प्रशासन प्रतिनियुक्ति पर शिक्षक बुलाकर डिस्टेंस मोड पर पाठ्यक्रम संचालित करने मजबूर है। विश्वविद्यालय में कुल 54 फैकल्टी पदों में से 40 पद खाली हैं। इसके चलते विश्वविद्यालय को शैक्षणिक कार्यक्रमों को चलाने में समस्या हो रही है और छात्रों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
News in Detail
भोज मुक्त विश्वविद्यालय में फैकल्टी की कमी ने शैक्षणिक गतिविधियों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। 10 साल से यहां नियमित फैकल्टी की भर्ती नहीं हो रही है। इस स्थिति में विश्वविद्यालय प्रशासन किसी तरह डिस्टेंस मोड पर पाठ्यक्रम चला रहा है, लेकिन 40 से अधिक पद खाली हैं। इन खाली पदों के बावजूद केवल दो नियमित शिक्षक कार्यरत हैं, जिसके कारण यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों में भी दिक्कतें आ रही हैं।
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यूनिवर्सिटी के सेंटरों में ही नहीं फैकल्टी
विश्वविद्यालय प्रशासन के पास फैकल्टी की कमी के कारण अलग-अलग संकायों के पाठ्यक्रमों को एक साथ मिलाकर चलाने के सिवा कोई अन्य विकल्प नहीं है। उदाहरण के तौर पर, कॉमर्स और मैनेजमेंट के पाठ्यक्रम एक ही स्कूल के अंतर्गत संचालित किए जा रहे हैं। नियम के अनुसार, प्रत्येक शैक्षणिक इकाई के लिए अलग फैकल्टी की आवश्यकता होती है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन इस प्रावधान की अनदेखी कर रहा है।
फैकल्टी की कमी के कारण खाली सीट
फैक्टी की कमी का असर विश्वविद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया पर भी दिख रहा है। पिछले सत्र में कई पाठ्यक्रमों में सीटें खाली रह गईं। आगामी शैक्षणिक सत्र में भी फैकल्टी की उपलब्धता न होने के कारण प्रवेश में गिरावट का खतरा है। छात्रों के लिए कॉन्टेक्ट क्लासेस और स्टडी मटेरियल तैयार करने में बाहरी शिक्षकों का सहारा लिया जा रहा है, लेकिन वे पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे, जिससे छात्रों की शिक्षा पर असर पड़ रहा है।
भर्ती प्रक्रिया में देरी से गड़बड़ाई व्यवस्था
2016 में फैकल्टी भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन यह विवादों में फंसने के कारण पूरी नहीं हो पाई। मार्च 2025 में हाईकोर्ट ने इस भर्ती प्रक्रिया को अवैध घोषित कर दिया था। इस प्रक्रिया में कुल 27 पदों की भर्ती होनी थी, जिनमें प्रोफेसर, रीडर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पद शामिल थे। अब विश्वविद्यालय प्रशासन को नए सिरे से विज्ञापन जारी करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया अभी तक नहीं शुरू हो सकी है।
हो रही यूजीसी के नियमों की अनदेखी
यूजीसी के ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम रेगुलेशन 2020 के अनुसार, हर केंद्र के लिए एक प्रोफेसर और तीन पूर्णकालिक शिक्षक होना जरूरी है। भोज मुक्त विश्वविद्यालय में शैक्षणिक व्यवस्था के लिए ये गाइडलाइंस पूरी नहीं हो पा रही हैं, जिसके कारण दूरस्थ शिक्षा में भी छात्रों को गुणवत्ता वाली शिक्षा नहीं मिल रही है।
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निष्कर्ष
फैक्टी की कमी को दूर करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को जल्दी से जल्दी नियमित फैकल्टी की भर्ती प्रक्रिया को पूरा करना चाहिए। इसके अलावा, बाहरी शिक्षकों के बजाए स्थायी शिक्षक नियुक्त किए जाने चाहिए, ताकि शैक्षणिक गुणवत्ता को बनाए रखा जा सके। प्रशासन को नियमों की अनदेखी करने की बजाय, छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक स्थिर और प्रभावी शैक्षणिक व्यवस्था स्थापित करनी चाहिए।