भोज वेटलैंड अतिक्रमण NGT सख्त, बोला अतिक्रमण डकैती से भी बड़ा अपराध है

Sanjay Dhiman | Sept 16, 2026, 19:01 IST
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भोपाल के भोज वेटलैंड अतिक्रमण मामले में NGT ने सरकारी जमीन पर कब्जे को डकैती से बड़ा अपराध बताया। बेंच ने अफसरों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया। MPPCB को चार हफ्ते में रिपोर्ट देनी होगी। अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी।

भोपाल के भोज वेटलैंड पर अतिक्रमण का मामला NGT में चल रहा है। दो अलग-अलग याचिकाएं एक साथ सुनी गईं। 16 सितंबर 2026 को इस पर सुनवाई हुई। ट्रिब्यूनल ने सरकारी जमीन पर कब्जे को गंभीर अपराध बताया। मामले की अगली सुनवाई अब 6 अक्टूबर को होगी।



अतिक्रमण को बताया डकैती से बड़ा अपराध

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT – National Green Tribunal) की सेंट्रल जोन बेंच भोपाल में यह सुनवाई हुई। बेंच में जस्टिस शियो कुमार सिंह और एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार चतुर्वेदी शामिल रहे।



ट्रिब्यूनल ने कहा कि सरकारी जमीन पर कब्जा डकैती से भी बड़ा अपराध है। डकैती में पीड़ित विरोध करता है। लेकिन सरकारी जमीन पर कब्जा अफसरों की आंखों के सामने होता है। यह पुलिस और सुरक्षाबलों की मौजूदगी में होता है।



ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि कलेक्टर के दफ्तर और आवास तक फर्जी वसीयत के आधार पर बिक सकते हैं। यह मौजूदा रुझान को देखते हुए कहा गया। बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के 2006 के दिल्ली अतिक्रमण मामले का भी जिक्र किया।





दो याचिकाओं पर हुई सुनवाई

यह मामला दो अलग-अलग ओए (O.A. – Original Application) से जुड़ा है। पहली याचिका आर्य श्रीवास्तव बनाम भारत संघ की थी। दूसरी याचिका राशिद नूर खान बनाम कलेक्टर भोपाल की थी। दोनों को एक साथ सुना गया।



जंगल की जमीन पर कब्जे के आंकड़े

ट्रिब्यूनल ने पर्यावरण मंत्रालय के आंकड़े भी रखे। मार्च 2025 में जारी मोईएफ एंड सीसी (MoEF&CC – Ministry of Environment, Forest and Climate Change) के आंकड़ों के अनुसार करीब 546089.45 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि विभाग इसे हटाने में नाकाम रहा है। इससे वन विभाग और राज्य के खजाने को नुकसान हो रहा है।



बेंच ने यह भी कहा कि कुछ भू-माफिया लोगों को पलायन के लिए उकसाते हैं। इसका मकसद जंगल में अवैध बस्तियां बसाना होता है। इसके लिए पेड़ भी काटे जाते हैं।



भोज वेटलैंड पर पहले दिए गए निर्देश

यह मामला सीधे तौर पर भोज वेटलैंड और जल स्रोतों के अतिक्रमण से जुड़ा है। ट्रिब्यूनल ने पहले फुल टैंक लेवल और फुल रिजर्वायर लेवल की सीमांकन का आदेश दिया था। यह आदेश जल स्रोत की सुरक्षा के लिए दिया गया था।



MPPCB को मिला चार हफ्ते का समय

सुनवाई में एमपीपीसीबी (MPPCB – Madhya Pradesh Pollution Control Board) के वकील ने एक अंतरिम एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश की। उन्होंने विस्तृत रिपोर्ट के लिए चार हफ्ते का समय मांगा। ट्रिब्यूनल ने अगली सुनवाई से पहले यह रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।



अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को

ट्रिब्यूनल ने दोनों मामलों की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर 2026 तय की है। तब तक सभी पक्षों को अपनी रिपोर्ट पूरी करनी होगी। इस मामले पर आगे भी नजर बनी रहेगी।



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