NGT का आदेश,केरवा-कलियासोत की सीमा होगी तय, वेटलैंड से अतिक्रमण हटाने के आदेश
NGT की भोपाल बेंच ने भोज वेटलैंड को लेकर सख्त आदेश दिए हैं। अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। लापरवाह अफसरों की जिम्मेदारी तय होगी। FTL तय करने के लिए सात सदस्यीय समिति बनाई गई है। केरवा-कलियासोत जलाशयों पर भी अलग से आदेश जारी हुआ है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT National Green Tribunal) की सेंट्रल जोन बेंच भोपाल ने भोज वेटलैंड को लेकर बड़ा आदेश दिया है। यह आदेश 31 अगस्त 2026 को पारित हुआ। मामला राशिद नूर खान बनाम कलेक्टर भोपाल का था। इसमें याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी पेश हुए।
अधिकरण ने कहा कि भोज वेटलैंड अपने इतिहास के सबसे बड़े खतरे में है। अवैध अतिक्रमण, अवैध निर्माण और गंदा पानी झील को नुकसान पहुंचा रहे हैं। यह सिर्फ पर्यावरण का मामला नहीं है। भोपाल के लोग पीने के पानी के लिए इसी झील पर निर्भर हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना
अधिकरण ने कड़ी टिप्पणी की। कहा कि अफसरों का रवैया सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पूरी अवहेलना है। बार-बार निर्देश देने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अधिकरण ने साफ किया कि यह किसी की निजी संपत्ति तय करने का मामला नहीं है। मकसद सिर्फ झील और सार्वजनिक जमीन को बचाना है।
अवैध निर्माण को लेकर अधिकरण सख्त दिखा। कहा कि बिना अनुमति बने निर्माण को प्रशासनिक ढिलाई की आड़ में बचाया नहीं जा सकता। ऐसे निर्माणों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए। पैसा खर्च होने या देरी होने से अवैध निर्माण वैध नहीं बनता।
अफसरों की जवाबदेही तय होगी
अधिकरण ने अफसरों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर जोर दिया। जो अफसर अतिक्रमण रोकने में नाकाम रहे, उन पर कार्रवाई होगी। नगरीय विकास विभाग के प्रमुख सचिव को यह जिम्मेदारी दी गई है। दोषी अफसरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।
निर्माण पर सख्त प्रतिबंध
अधिकरण ने साफ सीमा तय की है। शहरी इलाकों में FTL/HFL से 50 मीटर के भीतर कोई निर्माण नहीं होगा। ग्रामीण इलाकों में यह दूरी 250 मीटर रखी गई है। यह नियम 2017 से ही लागू माना जाएगा। वेटलैंड के दायरे में मौजूद अवैध निर्माण तीन महीने में हटाने होंगे।
गंदे पानी और कचरे पर भी रोक लगाई गई है। नगर निगम और कलेक्टरों को वेटलैंड नियम 2017 का नियम 4 सख्ती से लागू करना होगा। उद्योगों, बस्तियों और शहरों से बिना उपचारित पानी झील में नहीं छोड़ा जा सकेगा।
FTL तय करने बनी विशेषज्ञ समिति
भोज वेटलैंड के जलस्तर यानी FTL (Full Tank Level – पूर्ण जल स्तर) को लेकर विवाद पुराना है। अधिकरण ने इसे हमेशा के लिए सुलझाने का फैसला किया। जल संसाधन विभाग को कहा गया है कि जब तक पानी FTL से ऊपर न जाए, गेट न खोले जाएं।
इसके लिए सात सदस्यीय तकनीकी समिति बनाई गई है। इसमें केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड, वन विभाग, मानित और राज्य वेटलैंड प्राधिकरण के प्रतिनिधि शामिल हैं। समिति सैटेलाइट तस्वीरों और ड्रोन सर्वे से जांच करेगी। पर्यावरणविद् राशिद नूर खान और डॉ. सुभाष पांडे भी सलाहकार के तौर पर जुड़े रहेंगे।
केरवा-कलियासोत पर भी आदेश
इसी दिन NGT ने केरवा और कलियासोत जलाशयों पर भी आदेश दिया। यहां भी FTL/FRL तय करने का मामला था। पुराना निर्धारण गैर-बारिश के मौसम में हुआ था, जो सही नहीं माना गया। अब बारिश के बाद असली जलस्तर देखकर सीमांकन होगा।
इसके लिए भी वैसी ही समिति बनाई गई है। इसे 15 दिन में रिपोर्ट देनी होगी। जल संसाधन विभाग को यहां भी गेट न खोलने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को होगी।
आगे क्या होगा
अब सभी विभागों को तय समय में कार्रवाई करनी है। अवैध निर्माण हटाना, FTL तय करना और गंदा पानी रोकना जरूरी होगा। भोज वेटलैंड मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर 2026 को है। अधिकरण की सख्ती से प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है।
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