भोजशाला केस में सलमान खुर्शीद ने रखी दलील याचिका हाईकोर्ट में चलने योग्य नहीं
धार भोजशाला केस में मंगलवार 21 अप्रैल को फिर सुनवाई हुई। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी ने सुनवाई की। इसमें याचिका में पक्षकार बने मौलाना कमालउद्दीन के प्रेसीडेंट अब्दुल समद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने तर्क रखे। उन्होंने याचिका के मेंटेनेबल होने को ही चुनौती दी।
खुर्शीद ने कहा सुप्रीम कोर्ट से मार्गदर्शन लगेगा
वरिष्ठ अधिवक्ता खुर्शीद ने अश्विनी उपाध्याय केस में सुप्रीम कोर्ट के दिसंबर 2024 में दिए आदेश का हवाला दिया। इसमें कहा गया है कि एएसआई सर्वेक्षण के आधार पर कोई अंतरिम या अंतिम आदेश नहीं दिया जा सकता है। ऐसे में इस याचिका में कोई भी फैसला लेने के पूर्व सुप्रीम कोर्ट से पूछना होगा। या फिर हाईकोर्ट इस आदेश के तारतम्य में देखें कि क्या हो सकता है। यह याचिका चलने योग्य नहीं है।
अयोध्या केस और वर्शिप एक्ट की बात उठी
खुर्शीद ने इस अयोध्या केस और वर्शिप एक्ट को लेकर भी बात रखी। उन्होंने कहा कि अयोध्या केस की परिस्थिति अलग थी और यहां अलग है ऐसे वह यहां पर उस तरह से लागू नहीं हो सकता है। साथ ही वर्शिप एक्ट को लेकर कहा कि 15 अगस्त 1947 की स्थिति में जो स्थल जैसा था वह वैसा ही रहेगा। ऐसे में कोई बदलाव नहीं हो सकते हैं।
वीडियोग्राफी उपलब्ध कराए एएसआई
उधर खुर्शीद ने सर्वे की वीडियोग्राफी उपलब्ध कराने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि इसके बाद ही वह इस पर आपत्ति लगा सकते हैं। इस पर बेंच ने एएसआई को आदेश दिए कि वह पूरी वीडियोग्राफी उपलब्ध कराएं। सुनवाई जारी रहेगी।
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