ASI ने हाईकोर्ट में कहा: भोजशाला मूलतः सरस्वती मंदिर, मुस्लिम राजाओं ने बदला स्वरूप
News In Short
- ASI ने मंदिर सामग्री से मस्जिद बनने का दावा किया।
- 1902 सर्वे में भोजशाला मंदिर होने के सबूत मिले।
- धार दरबार को अधिसूचना जारी करने का अधिकार नहीं था।
- 1904 से भोजशाला राष्ट्रीय संरक्षित धरोहर है।
- ग्रीष्मावकाश से पहले फैसले की संभावना बढ़ी।
News In Detail
धार भोजशाला विवाद।मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने MP हाईकोर्ट में दावा किया है कि वहां मौजूद मस्जिद का निर्माण मंदिर की सामग्री से हुआ था। 1902 के सर्वे से भी यह सिद्ध होता है कि भोजशाला मूलतः सरस्वती देवी का मंदिर है।
ASI का ऐतिहासिक दावा
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने बड़ा दावा किया है। मध्य प्रदेश के धार जिले की भोजशाला में मस्जिद का निर्माण मंदिर की सामग्री से हुआ। यही कारण है कि पत्थरों पर संस्कृत के श्लोक मिले हैं।
वर्ष 1902-03 में हुए सर्वे में यह बात स्पष्ट हो गई थी। उस दौर के कई पर्यटकों ने भी अपने अनुभव लिपिबद्ध किए थे। उन सभी ने माना कि मुस्लिम राजाओं ने मंदिर को मस्जिद में बदला था। मूल रूप से यह सरस्वती देवी का मंदिर है।
दो घंटे चली हाईकोर्ट सुनवाई
MP हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सोमवार को यह मामला सुना गया। करीब दो घंटे तक सुनवाई चली। ASI की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन ने तर्क रखे। उन्होंने सर्वे के समर्थन में ठोस दलीलें दीं। मस्जिद पक्ष की आपत्तियों का बिंदुवार जवाब दिया गया। यह सुनवाई भोजशाला विवाद में एक अहम मोड़ साबित हुई।
ब्रिटिश दस्तावेजों का हवाला
अधिवक्ता सुनील जैन ने ब्रिटिश अधिकारियों के पत्राचार का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि धार दरबार ने 1935 में भोजशाला को मस्जिद बताने की अधिसूचना जारी की, लेकिन अधिनियम के प्रावधान के अनुसार धार दरबार को यह अधिकार ही नहीं था।
13 जुलाई 1935 के दस्तावेज़ों का भी संदर्भ दिया गया। ब्रिटिश अधिकारी भोजशाला के रखरखाव को लेकर बेहद सजग थे। यह दस्तावेज़ मंदिर पक्ष की दलीलों को और मज़बूत करते हैं।
राष्ट्रीय धरोहर और ASI की भूमिका
अधिवक्ता जैन ने स्पष्ट किया कि भोजशाला 1904 से राष्ट्रीय महत्व की संरक्षित धरोहर है। ASI इसका स्वामी नहीं बल्कि अभिभावक है। समय-समय पर ASI ने इसका रखरखाव किया है। वर्ष 1935 में भोजशाला के रखरखाव पर 50 हज़ार रुपये खर्च हुए थे। ASI की ओर से मंगलवार को और तर्क रखे जाने हैं।
मस्जिद पक्ष की आपत्ति
सुनवाई शुरू होते ही मस्जिद पक्ष ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सर्वे की वीडियोग्राफी उन्हें नहीं दी गई। ASI ने फाइलें गूगल ड्राइव पर अपलोड की हैं। लेकिन फाइलें इतनी बड़ी हैं कि देखना संभव नहीं है। कोर्ट ने मस्जिद पक्ष को IT विभाग की मदद लेने का सुझाव दिया। कोर्ट ने 7 मई तक आपत्तियाँ प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
फैसले के करीब है हाईकोर्ट
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के वकील विष्णु शंकर जैन ने 13-14 मई को रिजाइंडर देने की अनुमति मांगी। हाईकोर्ट ने कहा कि सुनवाई अब समापन के करीब है। सभी पक्ष अपनी-अपनी बात रख चुके हैं। अगर रिजाइंडर देना है तो जल्द से जल्द दें। इस टिप्पणी से ग्रीष्मावकाश से पहले फैसला आने की संभावना बढ़ गई है।
भोजशाला का ऐतिहासिक महत्व
भोजशाला का इतिहास सदियों पुराना है। यह परमार राजा भोज के काल की ऐतिहासिक धरोहर मानी जाती है। इसे सरस्वती देवी के मंदिर के रूप में जाना जाता था। मुस्लिम शासनकाल में इसका स्वरूप बदला गया। तब से यह स्थल धार्मिक विवाद का केंद्र रहा है। हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्ष इस पर अपना दावा करते हैं।
टेक्नोलॉजी और कानूनी प्रक्रिया
इस मामले में ASI सर्वे की वीडियोग्राफी एक अहम दस्तावेज है। डिजिटल फाइलों की विशाल साइज से तकनीकी दिक्कत आई। हाईकोर्ट ने IT विभाग की मदद से इसे सुलझाने का सुझाव दिया। यह पहला मामला नहीं है जब डिजिटल दस्तावेजों पर विवाद हुआ हो। कानूनी प्रक्रिया में डिजिटल साक्ष्य की भूमिका अब महत्वपूर्ण हो चुकी है।
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