भोजशाला विवाद: बसंत पंचमी और जुमे की नमाज पर फिर टकराव की आशंका
समझें क्या है पूरा मामला...
- भोजशाला में एक ही गेट, नमाज कैसे होगी, बड़ा सवाल।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश से प्रशासन के सामने चुनौतियां।
- बसंत पंचमी और जुम्मे की नमाज, फिर टकराव की आशंका।
- भोजशाला विवाद: 2006 से अब तक कैसे बदला रास्ता।
- कब्रिस्तान वाली जगह पर नमाज को लेकर मुस्लिम पक्ष नाराज।
सुप्रीम कोर्ट ने एमपी सरकार से कहा है कि मुस्लिमों को हर शुक्रवार नमाज के लिए खुला स्थान दिया जाए। भोजशाला परिसर में फिलहाल सिर्फ एक ही मुख्य प्रवेश द्वार है।
इससे पहले हाईकोर्ट भोजशाला को मंदिर मानते हुए हिंदू पक्ष को पूरे वर्ष पूजा का अधिकार दे चुका है। अब सवाल है कि एक ही परिसर में दोनों गतिविधियां कैसे चलेंगी। प्रशासन अभी आदेश का अध्ययन कर योजना बना रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से नई बहस
धार के भोजशाला मंदिर को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार से कहा है कि मुस्लिम समाज को नमाज के लिए हर शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे के बीच खुला स्थान दिया जाए।
यह आदेश आते ही यह मामला फिर सुर्खियों में आ गया। इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट अपने फैसले में भोजशाला को मंदिर मानते हुए हिंदू पक्ष को साल भर पूजा-अर्चना का अधिकार दे चुका है।
एक ही परिसर, दो गतिविधियां
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक ही परिसर में पूजा और नमाज दोनों कैसे साथ चलेंगी। नमाज किस खुले स्थान पर होगी, यह अभी तय नहीं है।
नमाजी किस रास्ते से अंदर आएंगे, यह भी स्पष्ट नहीं है। श्रद्धालुओं की सामान्य आवाजाही कैसे जारी रहेगी, यह भी एक बड़ा सवाल है। साथ ही एक ही मुख्य द्वार पर सुरक्षा व्यवस्था कैसे संभलेगी, यह चुनौती अलग से है।
फिलहाल प्रशासन ने इस पर कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। कोर्ट के आदेश का अध्ययन कर विस्तृत कार्ययोजना बनाई जा रही है।
परिसर में फिलहाल सिर्फ एक द्वार
भोजशाला परिसर में इस समय केवल एक ही मुख्य प्रवेश द्वार है। यहीं पुलिस की स्थायी चौकी भी है। सुरक्षा जांच के बाद ही श्रद्धालुओं को अंदर जाने दिया जाता है।
सामान्य दिनों में दर्शन के बाद श्रद्धालु इसी रास्ते से बाहर निकलते हैं। हालांकि, बसंत पंचमी जैसे बड़े मौकों पर भीड़ ज्यादा होने पर प्रशासन वैकल्पिक निकास का इस्तेमाल करता है।
ऐसे मौकों पर परिसर के बाईं ओर बने छोटे द्वार से भीड़ निकाली जाती है। श्रद्धालु सीढ़ियों से उतरकर दाईं ओर बढ़ते हैं और पुलिस चौकी के पास से बाहर आते हैं।
जब बसंत पंचमी और शुक्रवार साथ पड़ें
भोजशाला के इतिहास में कई बार बसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन पड़े हैं। ऐसे में एक तरफ हजारों हिंदू श्रद्धालुओं की पूजा होती है। दूसरी तरफ मुस्लिम समाज की जुम्मे की नमाज भी उसी दिन होती है।
इन संवेदनशील मौकों पर जिला प्रशासन, पुलिस, एएसआई और दोनों समुदायों के प्रतिनिधि मिलकर बैठकें करते रहे हैं। सुरक्षा, प्रवेश-निकास और समय को लेकर हर बार विस्तृत योजना बनाई जाती रही है।
2006 में पहली बार बनी वैकल्पिक व्यवस्था
साल 2006 में पहली बार बसंत पंचमी और शुक्रवार एक साथ पड़े थे। उस वक्त मुख्य द्वार पर हजारों हिंदू श्रद्धालु मौजूद थे। साथ ही मुस्लिम समाज को तय समय पर नमाज भी अदा करनी थी।
भीड़ और सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने नमाजियों को भोजशाला के पीछे स्थित लकड़ी पीठ क्षेत्र से प्रवेश दिलाया। वहां से उन्हें सुरक्षा घेरे में परिसर तक पहुंचाया गया। उस दौरान एक अस्थायी सीढ़ी भी लगाई गई थी।
2013 में दोहराई गई वही व्यवस्था
2013 में भी बसंत पंचमी और शुक्रवार एक साथ आए। प्रशासन ने लगभग वैसी ही व्यवस्था अपनाई जैसी 2006 में की गई थी। मुस्लिम नमाजियों को पीछे के रास्ते से परिसर तक पहुंचाया गया। इसी दौरान हिंदू श्रद्धालुओं की पूजा-अर्चना तय समय पर चलती रही। पूरे परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी।
जनवरी 2026 में क्या हुआ था
23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी और शुक्रवार फिर एक साथ पड़े। कोर्ट के निर्देशों के अनुसार हिंदू पक्ष की पूजा पूरे दिन चलती रही।
मुस्लिम समाज के लिए अलग व्यवस्था बनाई गई थी। प्रशासन ने मुख्य द्वार के पास स्थित अंदरूनी रास्ते से सीमित संख्या में नमाजियों को अंदर भेजा। चूंकि पूजा लगातार चल रही थी, इसलिए भोजशाला के पीछे खुले हिस्से में अस्थायी टेंट लगाकर नमाज कराई गई थी।
मुस्लिम पक्ष ने जताई थी आपत्ति
मुस्लिम समाज ने इस व्यवस्था का विरोध किया था। उनका कहना था कि उन्हें परिसर के भीतर तय स्थान पर नमाज नहीं कराई गई। उनके अनुसार जिस स्थान पर नमाज कराई गई, वह कब्रिस्तान का हिस्सा है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार वहां नमाज अदा नहीं की जाती। यही वजह है कि अब सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के बाद प्रशासन के सामने रास्ता और स्थान तय करना बड़ी चुनौती बन गया है।
FAQ
- भोजशाला में नमाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हर शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे के बीच मुस्लिम समाज को नमाज के लिए खुला स्थान दिया जाए। इससे पहले हाईकोर्ट भोजशाला को मंदिर मान चुका है। - भोजशाला परिसर में प्रवेश की क्या व्यवस्था है?
परिसर में फिलहाल केवल एक मुख्य प्रवेश द्वार है, जहां पुलिस चौकी भी है। भीड़ ज्यादा होने पर प्रशासन वैकल्पिक निकास का इस्तेमाल करता है। - जनवरी 2026 में बसंत पंचमी पर क्या हुआ था?
23 जनवरी 2026 को हिंदू पक्ष की पूजा पूरे दिन चली और मुस्लिम समाज के लिए पीछे के खुले हिस्से में टेंट लगाकर नमाज कराई गई। मुस्लिम पक्ष ने इस जगह को कब्रिस्तान का हिस्सा बताकर आपत्ति जताई थी।
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