लंदन से वाग्देवी की मूर्ति वापस लाने के दावों की खुली पोल, RTI में हुआ खुलासा

Aman Vaishnav | Jun 10, 2026, 14:30 IST
वाग्देवी की मूर्ति
भोजशाला की वाग्देवी मूर्ति को लंदन से वापस लाने के दावों पर RTI ने बड़ा सवाल खड़ा किया है। ASI ने जवाब में कहा कि ब्रिटिश म्यूजियम से मूर्ति वापसी को लेकर कोई पत्र-व्यवहार या दस्तावेज मौजूद नहीं है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • भोजशाला की 11वीं सदी की वाग्देवी मूर्ति लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी है।
  • मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने केंद्र को मूर्ति वापसी पर विचार करने का सुझाव दिया था।
  • RTI के जवाब में ASI ने कहा कि उनके पास इस मामले का कोई रिकॉर्ड नहीं है।
  • साल 1880 में एक ब्रिटिश अधिकारी इस मूर्ति को इंग्लैंड ले गया था।
  • सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा फासला उजागर हुआ है।

मूर्ति वापसी और RTI का खुलासा

मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर की देवी सरस्वती यानी वाग्देवी की मूर्ति को लंदन (Vagdevi statue in London) से वापस लाने के दावों की हवा निकल गई है।



भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई (भोजशाला का एएसआई सर्वे) ने एक आरटीआई के जवाब में साफ कर दिया है कि, उनके पास इस मूर्ति को ब्रिटिश म्यूजियम से वापस लाने की किसी भी कोशिश का कोई दस्तावेज या रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।



यह खुलासा ऐसे वक्त में हुआ है जब मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने हाल ही में भोजशाला को देवी सरस्वती का मंदिर घोषित किया था। अदालत ने यह भी कहा था कि केंद्र सरकार इस मूर्ति की वापसी की मांगों पर विचार कर सकती है। उस फैसले के बाद वापसी की उम्मीदें एक बार फिर जग गई थीं।



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ASI का जवाब क्या है?

इंडिया टूडे ने एएसआई से इस मामले में चार सवाल पूछे थे। इनमें मूर्ति वापसी के प्रयासों की मौजूदा स्थिति, ब्रिटिश म्यूजियम के साथ पत्र-व्यवहार, इस विषय पर हुई बैठकें और भारत के दावे की कानूनी व राजनयिक स्थिति शामिल थे।



एएसआई के भोपाल सर्कल ने जवाब में कहा कि लंदन म्यूजियम से सरस्वती की मूर्ति वापस लाने से जुड़ा कोई पत्र-व्यवहार नहीं हुआ है। इसलिए इससे संबंधित कोई दस्तावेज या जानकारी मौजूद नहीं है। इस जवाब ने साफ कर दिया कि सरकारी स्तर पर अब तक इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।



1875 में हुई थी खुदाई, 1880 में गई लंदन

इस मूर्ति का इतिहास डेढ़ सौ साल से भी पुराना है। दस्तावेजों के अनुसार साल 1875 में भोजशाला परिसर (धार की भोजशाला) के पास हुई खुदाई के दौरान यह वाग्देवी की मूर्ति मिली थी।



इसके पांच साल बाद 1880 में एक ब्रिटिश अधिकारी इसे अपने साथ इंग्लैंड ले गया। बाद में यह मूर्ति लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम का हिस्सा बन गई।



ब्रिटिश म्यूजियम के अपने रिकॉर्ड में दर्ज है कि यह मूर्ति उन्हें एक ब्रिटिश अधिकारी ने तोहफे में दी थी, जिसे यह भोजशाला के पास खंडहरों से मिली थी। हिंदू संगठनों का कहना है कि यह मूर्ति 11वीं सदी की है और राजा भोज के काल से जुड़ी हुई है।



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सालों से उठती रही है मांग

यह मामला नया नहीं है। जुलाई 2003 में यह मुद्दा संसद में भी उठा था। तब तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री विनोद खन्ना ने कहा था कि सांस्कृतिक संपत्तियों को वापस लाने के लिए द्विपक्षीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।



इसके बाद साल 2022 में मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इंदौर में एक कार्यक्रम के दौरान इस मूर्ति को वापस लाने की कोशिश का भरोसा दिलाया था।



हाई कोर्ट के फैसले के बाद मामला गर्माया

15 मई को मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने भोजशाला-कमाल मौला परिसर पर अपना बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने भोजशाला को देवी सरस्वती का मंदिर माना।



साथ ही केंद्र सरकार को मूर्ति वापसी की संभावना पर विचार करने का सुझाव दिया। इसके तुरंत बाद इस मामले के मुख्य याचिकाकर्ता हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री मोहन यादव, संस्कृति मंत्रालय और विदेश मंत्रालय को पत्र लिखा।



संस्था की दलील थी कि यह मूर्ति महज एक पुरातात्विक कलाकृति नहीं है। यह करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है। इसे वापस लाने के लिए कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए। वहीं आरटीआई के इस जवाब ने स्पष्ट कर दिया है कि जमीनी स्तर पर अभी कुछ भी नहीं हुआ है।



FAQ

  1. भोजशाला की वाग्देवी मूर्ति क्या है और यह लंदन कैसे पहुंची?
    वाग्देवी यानी देवी सरस्वती की यह मूर्ति 11वीं सदी की मानी जाती है और इसका संबंध राजा भोज के काल से है। साल 1875 में धार के भोजशाला परिसर के पास खुदाई में यह मिली थी। इसके बाद 1880 में एक ब्रिटिश अधिकारी इसे इंग्लैंड ले गया। अब यह लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी हुई है।
  2. भोजशाला के RTI सर्वे में एएसआई ने क्या जवाब दिया?
    एएसआई के भोपाल सर्कल ने आरटीआई के जवाब में बताया कि ब्रिटिश म्यूजियम से वाग्देवी की मूर्ति वापस लाने को लेकर अब तक कोई पत्र-व्यवहार नहीं हुआ है। इससे जुड़ा कोई दस्तावेज, बैठक या कानूनी-राजनयिक कार्यवाही का रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।

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