भोजशाला विवाद: मुस्लिम पक्ष की गुहार पर सुप्रीम सुनवाई आज, हिंदू पक्ष भी शीर्ष अदालत में
News In Short
- धार का भोजशाला विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।
- मुस्लिम पक्ष ने 23 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल किया था।
- आज यानी 01 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष के आवेदन पर सुनवाई है।
- 02 अप्रैल को इंदौर हाईकोर्ट में भी इस मामले की सुनवाई निर्धारित है।
- हिंदू पक्ष ने जवाब में सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर दी है।
News In Detail
धार भोजशाला विवाद फिर सुप्रीम कोर्ट में
मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला का विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। मुस्लिम पक्ष के बाद अब हिंदू पक्ष भी सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन ने कैविएट (Caveat) दाखिल की है।
कैविएट का मतलब है कि अदालत उनका पक्ष सुने बिना कोई अंतरिम आदेश न दे। यानी हिंदू पक्ष ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि सुप्रीम कोर्ट दोनों पक्षों को सुनकर ही कोई फैसला ले।
मुस्लिम पक्ष ने क्यों खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
मुस्लिम पक्ष ने 23 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल किया था। सोसाइटी के अध्यक्ष अब्दुल समद के अनुसार, उन्होंने 11 मार्च को ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI - Archaeological Survey of India) द्वारा किए गए सर्वे की वीडियोग्राफी और फुटेज उपलब्ध कराने की मांग की थी।
हालांकि, 16 मार्च की सुनवाई में इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका। उनका मुख्य कानूनी तर्क यह है कि हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा दायर की गई यह मूल याचिका ही सुनवाई के योग्य नहीं है। इसी आवेदन पर 01 अप्रैल यानी आज सुनवाई प्रस्तावित है।
हिंदू पक्ष द्वारा कैविएट दाखिल किए जाने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट उनकी दलील सुने बिना कोई अंतरिम आदेश नहीं देगा। इससे मामले में संतुलन और विस्तार दोनों बढ़ने की संभावना है।
हाईकोर्ट इंदौर में 2 अप्रैल को सुनवाई
भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर इंदौर हाईकोर्ट में 02 अप्रैल को सुनवाई निर्धारित है। इसे अंतिम चरण की सुनवाई माना जा रहा है। यह मामला डबल बेंच के सामने क्रमांक 198 पर सूचीबद्ध है।
इसमें एक जनहित याचिका और तीन रिट याचिकाओं पर सुनवाई होनी है। इनमें से एक याचिका मुस्लिम पक्ष की है और शेष तीन हिंदू पक्ष की ओर से दाखिल हैं।
आज के फैसले पर टिकी सबकी नजर
कानूनी जानकारों के मुताबिक यदि सुप्रीम कोर्ट मुस्लिम पक्ष को अतिरिक्त समय या साक्ष्य प्रस्तुत करने की अनुमति देता है, तो हाईकोर्ट की चल रही सुनवाई की प्रक्रिया और आगे बढ़ सकती है। ऐसे में आज का आदेश पूरे मामले की दिशा तय कर सकता है।
01 और 02 अप्रैल को भोजशाला मामले के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई इस विवाद को नई दिशा दे सकती है।
जजों ने खुद किया ग्राउंड जीरो का मुआयना
इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जजों ने भी कड़ा रुख अपनाया था। शनिवार, 28 मार्च को इंदौर खंडपीठ के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी ने खुद धार पहुंचकर भोजशाला परिसर का निरीक्षण किया। लगभग 55 मिनट तक चले इस स्पॉट इंस्पेक्शन के दौरान जजों ने बारीकी से परिसर का जायजा लिया, जिसे इस केस में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है।
100 दिनों का वैज्ञानिक सर्वे
हाईकोर्ट के पिछले आदेश के बाद, ASI ने 22 मार्च 2024 से भोजशाला परिसर और उसके आसपास के 50 मीटर के दायरे में वैज्ञानिक जांच शुरू की थी। लगभग 98 से 100 दिनों तक चले इस सर्वे के दौरान टीम ने जमीन की खुदाई (Excavation), संरचनात्मक जांच और प्राचीन दस्तावेजों का गहराई से अध्ययन किया।
शिलालेखों में छिपा इतिहास: क्या मिला रिपोर्ट में?
ASI की रिपोर्ट में 12वीं से 20वीं सदी तक के कई ऐतिहासिक प्रमाण मिलने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार:
- बहुभाषी शिलालेख: परिसर में संस्कृत, प्राकृत, अरबी और फारसी भाषाओं के शिलालेख (Inscriptions) मिले हैं।
- साहित्यिक साक्ष्य: पत्थरों पर पारिजातमंजरी-नाटिका और अवनिकर्मसातम जैसे प्राचीन ग्रंथों के अंश पाए गए हैं।
- लिपियों का मिश्रण: जहां एक ओर नागरी लिपि के अभिलेख मिले हैं, वहीं 56 अरबी-फारसी शिलालेख भी दर्ज किए गए हैं जिनमें धार्मिक दुआएं और नाम शामिल हैं।
- पुन: उपयोग के संकेत: रिपोर्ट में एक चौंकाने वाली बात यह भी है कि कुछ पत्थरों पर पुरानी लिखावट को मिटाकर उन्हें दोबारा इस्तेमाल (Reuse) किया गया है।
क्या है भोजशाला विवाद की जड़?
धार की यह ऐतिहासिक इमारत लंबे समय से दो समुदायों के बीच आस्था का केंद्र और विवाद का कारण रही है। हिंदू पक्ष इसे वाग्देवी (मां सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला की मस्जिद बताता है। वर्तमान में यह स्थल ASI के संरक्षण में है। यहां विशेष व्यवस्था के तहत दोनों पक्षों को पूजा और नमाज की अनुमति है।
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