Bhopal Air Pollution पर NGT की सख्ती : करोड़ों खर्च फिर भी राजधानी की हवा जहरीली क्यों?
पांच पॉइंट में समझें पूरा मामला
- भोपाल में वायु प्रदूषण लगातार बढ़ रहा, AQI कई बार Very Poor दर्ज हुआ है।
- NGT ने करोड़ों खर्च के बावजूद जमीनी सुधार न दिखने पर सवाल उठाया है।
- खुले में कचरा जलाना, निर्माण धूल और वाहनों से प्रदूषण मुख्य कारण बन गया है।
- NGT ने धूल नियंत्रण, ग्रीन नेट, इलेक्ट्रिक वाहनों और हरित क्षेत्र बढ़ाने के उपाय सुझाए है।
- राशिद नूर खान ने स्वतंत्र जांच और सामाजिक ऑडिट की आवश्यकता जताई है।
झीलों का शहर भोपाल आज वायु प्रदूषण के कारण गंभीर संकट झेल रहा है। National Green Tribunal (NGT), भोपाल ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई की। इस मामले में आवेदक राशिद नूर खान और उनके वकील हर्षवर्धन तिवारी ने प्रदूषण के असली असर और जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठाए।
सुनवाई में पता चला कि भोपाल का Air Quality Index (AQI) कई बार Very Poor तक पहुंच चुका है। इससे खासकर बच्चे, बुजुर्ग और जो लोग दमा या दिल की बीमारी से पीड़ित हैं, उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ रहा है।
NGT ने कहा कि PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण फेफड़ों और खून की धमनियों के लिए खतरा हैं। ये वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों का बड़ा कारण बन चुके हैं।
खर्च और वास्तविक सुधार में फर्क
भोपाल नगर निगम ने कहा कि National Clean Air Programme (NCAP) के तहत शहर में हवा साफ करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए। रोड डस्ट कंट्रोल, मैकेनिकल रोड स्वीपिंग, पानी छिड़कना, कचरा प्रबंधन, ग्रीन एरिया बनाने और वर्टिकल गार्डन जैसी चीजों के लिए आदेश दिए गए।
लेकिन आवेदक ने सवाल उठाया कि इतने पैसे खर्च होने के बाद भी शहर की हवा लगातार खराब क्यों बनी हुई है। कई योजनाएं बस कागजों तक ही सीमित रह गई हैं और जमीन पर प्रदूषण कम करने में कोई असर नहीं दिख रहा।
प्रदूषण के वास्तविक कारण
राशिद नूर खान ने कहा कि भोपाल में हवा खराब होने के पीछे मुख्य वजहें हैं- खुले में कचरा जलाना, निर्माण से उठने वाली धूल, सड़क की धूल, भारी ट्रक-बस का दबाव, गलत तरीके से कचरा फेंकना और कुछ व्यवसायिक जगहें जो प्रदूषण फैलाती हैं।
CPCB और MPPCB के डेटा के मुताबिक, 2025 में शहर का AQI कई दिन Poor और Very Poor में रहा। सिर्फ आंकड़े दिखाने से काम नहीं बनेगा, अब सख्त कार्रवाई की जरूरत है।
NGT के सुझाव
- खुले में कचरा और बायोमास जलाने पर रोक
- होटलों और ढाबों में लकड़ी एवं कोयले के उपयोग पर प्रतिबंध
- निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण और ग्रीन नेट का उपयोग
- भारी वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करना
- प्रदूषणकारी वाहनों की नियमित जांच
- इलेक्ट्रिक वाहनों और साइकिल उपयोग को बढ़ावा
- जल छिड़काव और मैकेनिकल रोड स्वीपिंग
- अवैध ईंट भट्टों को हटाना
- हरित क्षेत्र बढ़ाना और वर्टिकल गार्डन बनाना
NGT ने स्पष्ट किया कि विभाग केवल योजनाएं बनाकर रिपोर्ट न दें, बल्कि जमीन पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें।
नागरिकों का अधिकार और जवाबदेही
राशिद नूर खान ने कहा कि साफ हवा में सांस लेना हर किसी का अधिकार है। अगर जनता को फायदा नहीं मिल रहा और पैसे खर्च हो रहे हैं, तो जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस काम के लिए स्वतंत्र जांच और सोशल ऑडिट होना जरूरी है।
वकील हर्षवर्धन तिवारी ने कहा कि यह सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं है, सीधे लोगों की सेहत और जीवन के अधिकार से जुड़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो हालात और खराब हो सकते हैं।
NGT ने अगली सुनवाई 20 अगस्त 2026 को रखी है और सभी संबंधित विभागों को विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं।
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