घर में नहीं चलेगी दुकान, अरेरा कॉलोनी से अब पूरी राजधानी में शुरू हुआ विरोध
समझें क्या है पूरा मामला...
- अरेरा कॉलोनी में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर नागरिक नाराज हैं।
- सुप्रीम कोर्ट में आवासीय कॉलोनी में दुकानें खोलने की सुनवाई जारी है।
- नगर निगम द्वारा दुकान बंद करने की कार्रवाई से लोग संतुष्ट नहीं है।
- अरेरा कॉलोनी के टॉर्च लाइट मार्च में दर्जन भर कॉलोनी के लोग शामिल हुए।
- आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों की शिकायत में भोपाल आगे है।
अरेरा कॉलोनी से शुरू हुआ घरों में होटल, दुकान, रेस्तरा खोलने का विरोध अब तेजी से फैल रहा है। भोपाल में अरेरा कॉलोनी के बाद पहले रचना नगर, गौतम नगर और अब दर्जनभर कॉलोनियां भी शामिल हो गई हैं।
कॉलोनियों में बढ़ते बाजार से लोग कितने परेशान भी है यह भी खुलकर चर्चा कर रहे हैं। आवासीय भूखंडों पर कमर्शियल कॉम्पलेक्स निर्माण पर नगर निगम की चुप्पी को लेकर भी नाराज हैं।
भोपाल के रहवासी क्षेत्रों में बेरोकटोक जारी व्यावसायिक गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई जारी है। इसी बीच अरेरा कॉलोनी के रहवासियों ने टॉर्च लाइट मार्च निकालकर बड़े आंदोलन की शुरूआत कर दी है।
अरेरा कॉलोनी केस का पूरे प्रदेश पर असर
अरेरा कॉलोनी में अनाधिकृत दुकानों का विरोध की चिंगारी अब पूरी राजधानी में नजर आने लगा है। कॉलोनियों पर हावी होते बाजार के मामले में सुप्रीम कोर्ट में जारी सुनवाई का पूरे प्रदेश में असर तय है।
प्रदेश के इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर के अलावा, उज्जैन, रीवा, सतना, सागर में भी कॉलोनियों में अनाधिकृत दुकानें खुल रही हैं।
इसका असर सामान्य जनजीवन पर पड़ रहा है। अरेरा कॉलोनी के मामले को देख अब दूसरे शहरों में भी लोग आवाज उठा रहे हैं।
टॉर्च लेकर निकले लोगों ने जगाई उम्मीद
भोपाल में आवासीय क्षेत्रों में अवैध निर्माण और व्यावसायिक उपयोग के खिलाफ कई कॉलोनियों के रहवासी सड़कों पर उतर चुके हैं। रहवासियों ने टॉर्च मार्च निकालकर नगर निगम से अनाधिकृत होटल, दुकान और रेस्टोरेंट पर तत्काल कार्रवाई की मांग की थी।
अवैध निर्माण और कमर्शियल गतिविधियों के खिलाफ रहवासियों का गुस्सा फूट पड़ा है। संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के नेतृत्व में टॉर्च लाइट मार्च निकाला गया था।
रहवासियों का कहना है सर्वे हो चुका है फिर भी कार्रवाई नहीं हो रही। जबकि मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है।
भोपाल में बुलंद हुई नागरिकों की आवाज
अरेरा कॉलोनी में महावीर द्वार से टॉर्च लाइट मार्च के जरिए नागरिकों ने आवाज बुलंद की है। इस मार्च में व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ लड़ रहे अरेरा कॉलोनीवासियों के अलावा कोलार, शाहपुरा, गुलमोहर, रचना नगर, गौतम नगर सहित दर्जनों कॉलोनी की समितियां शामिल हुई थीं।
निगम पर उठाए सवाल, अफसरों को घेरा
मार्च में शामिल लोगों ने नगर निगम को जिम्मेदार ठहराया है। आरोप है कि आवासीय भूखंडों पर अनाधिकृत निर्माण को नगर निगम द्वारा अनदेखा किया जाता है।
इसी वजह से अरेरा कॉलोनी में एक के बाद एक दर्जनों शॉपिंग कॉम्पलेक्स, होटल, रेस्तरा और दूसरी दुकानें खुली हैं। नगर निगम के सर्वे में भी अवैध निर्माण और अनाधिकृत व्यावसायिक गतिविधियों की पुष्टि हुई है। इसके बावजूद अधिकारियों द्वारा कार्रवाई नहीं की गई।
सर्वे के बाद निगम की चुप्पी पर नाराजगी
टॉर्च मार्च के जरिए नाराजगी जता चुके लोगों का कहना है कि निगम के सर्वे में स्थिति सामने आ चुकी है। इस वजह से दुकानदारों को नोटिस भी जारी हुए थे।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से दो दिन पहले निगम द्वारा बड़ी संख्या में दुकान, कॉम्पलेक्स पर व्यावसायिक उपयोग पर पाबंदी के नोटिस, बैनर चस्पा कराए गए।
इसके बाद भी अनाधिकृत निर्माण और व्यवसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। अब नगर निगम 15 सितम्बर तक दोबारा सर्वे करने की दलील देकर टालमटोल कर रहा है।
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