अरेरा कॉलोनी के नागरिकों की शिकायत पर चुप्पी, व्यापारियों का हित साधने बदल रहे नियम
BHOPAL. अरेरा कॉलोनी में अनाधिकृत व्यावसायिक निर्माण का प्रतिरोध अब और भी तेज हो गया है। आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों से परेशान नागरिक भूमि विकास नियमों में बदलाव से नाराज हैं। नागरिकों ने नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग के नोटिफिकेशन पर आपत्ति दर्ज कराई है।
नागरिकों ने भूमि विकास नियमों के बदलाव को व्यवस्था बिगाड़ने वाला बताया है। वहीं रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के बढ़ने से नागरिकों के हितों पर बुरा असर पड़ने की आशंका जताकर सरकार से पुनर्विचार की मांग की है।
द सूत्र की मुहिम में नागरिकों का साथ
अरेरा कॉलोनी में व्यावसायिक गतिविधियों से मानसिक यातना झेल रहे नागरिकों की परेशानी को द सूत्र लगातार उठा रहा है। अब स्थानीय लोग भी नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग द्वारा व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले नोटिफिकेशन पर मुखर हो रहे हैं।
लोगों का कहना है, विभाग के अधिकारी शिकायत पर कार्रवाई करने कभी आगे नहीं आए। अब रहवासियों की समस्याओं को अनदेखा कर व्यवसायिक निर्माण और गतिविधियों को संरक्षण देने नियम बदलने का रास्ता साफ किया जा रहा है।
कोर्ट के निर्णय से पहले विभाग की जल्दबाजी
अरेरा कॉलोनी बीते एक दशक में आवासीय भूखंडों पर तेजी से व्यवसायिक निर्माण हुआ है। इसके साथ ही घरों की जगह होटल, रेस्टोरेंट, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और दूसरी दुकानों ने ले ली है। इससे राजधानी के सबसे पॉश इलाके अरेरा कॉलोनी की शांति बाजार के शोर ने छीन ली है। इसको लेकर नागरिक नगर निगम, जिला प्रशासन को शिकायत करने के साथ ही कोर्ट की शरण भी ले चुके हैं। जिस पर सुनवाई फिलहाल जारी है।
वहीं सुप्रीम कोर्ट द्वारा आवासीय कालोनियों में व्यावसायिक गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए प्रदेश सरकार को गाइड लाइन के पालन कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके बावजूद अरेरा कॉलोनी में व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक नहीं लग सकी है। नागरिकों ने इसकी शिकायत सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियत की गई एमिकस क्यूरी से भी की है।
नियमों में बदलाव पर नागरिकों की आपत्ति
एमिकस क्यूरी में शिकायत पहुंचने और सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन को अनदेखा कर नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग द्वारा हाल ही में भूमि विकास नियमों में बदलाव के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। अरेरा कॉलोनी के नागरिकों ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई है। इसको लेकर अरेरा कॉलोनी के रहवासियों के संगठन प्रयास जन कल्याण समिति की बैठक में अहम रणनीति तैयार की गई है।
समिति की बैठक में नगरीय प्रशासन विभाग के नोटिफिकेशन पर आपत्ति के लिए 9 मुख्य बिंदुओं पर तथ्यों सहित तर्क रखे हैं।बैठक में पूर्व संभाग आयुक्त कविन्द्र कियावत, सेवानिवृत डीजी {EOW) अरुण गुर्टू, समिति अध्यक्ष अपर्णा वशिष्ठ, जनहित याचिकाकर्ता पूर्णेन्दु शुक्ल, कमल राठी भी शामिल रहे। उन्होंने रहवासियों का मार्गदर्शन भी किया।
इन तथ्यों के जरिए उठाई आपत्ति:
- नागरिकों का कहना है राजधानी में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग(TNCP) एक्ट के तहत 1994 से मास्टर प्लान प्रभावशील है। इसी के तहत भोपाल विकास योजना 2005 में अरेरा कॉलोनी में एक्सटेंशन E -1 E -5 तक आवासीय घोषित है।
- मास्टर प्लान 2005 में अरेरा कॉलोनी के इस हिस्से में भौतिक अधोसंरचना आवश्यक क्षमता के अनुरूप न होने की वजह से आवासीय क्षेत्र का एफएआर 0.75 निर्धारित है। व्यावसायिक गतिविधियों से इसका उल्लंघन हो रहा है। जबकि 12 मीटर ऊंचाई की पाबंदी पर असर पड़ रहा है। जबकि नगर निगम से इन्हीं मानकों के आधार पर भवन अनुज्ञा जारी की जा रही है।
- अरेरा कॉलोनी में E- 1 से E -5 तक भूखंड कलेक्टर भोपाल द्वारा राजस्व नियम के अंतर्गत अभिन्यास के प्रावधानों के आधार पर दिए गए हैं। ये भूखंड नजूल भूमि के पट्टों के रूप में 30 वर्षीय लीज है। इनका अवधि के समापन पर नवीनीकरण किया जाता है, लेकिन इन आवासीय लीज भूखंडों का उपयोग परिवर्तन, आवंटन के समय तय शर्तों, मास्टर प्लान भूमि विकास नियमों की अनदेखी नहीं की जा सकती। जबकि प्रशासन की ढील से लगातार ऐसा हो रहा है।
- सुप्रीम कोर्ट आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन को रोकने गाइड लाइन जारी कर देश के सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश भी दे चुका है। जबलपुर हाईकोर्ट ने भी रहवासियों की याचिका पर संज्ञान लेकर व्यवसायिक निर्माण और गतिविधि रोकने के आदेश दे चुका है। लेकिन ऐसी गतिविधियों को रोकने की जगह नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग द्वारा कोर्ट में मामला विचाराधीन होने की अनदेखी कर नोटिफिकेशन जारी किया है।
विभाग की मंशा पर सवाल
- नागरिक संगठन प्रयास जन कल्याण समिति ने भूमि विकास नियमों में बदलाव की एकतरफा कार्रवाई से विभाग की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है अरेरा कॉलोनी में E -1 से E -5 क्षेत्र नजूल पट्टे के रूप में आवासीय उपयोग के लिए है। व्यावसायिक उपयोग की प्रीमियम दर आवासीय भूखंड के मुकाबले डेढ़ गुना ज्यादा है। आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक उपयोग से शासन को करोड़ों के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
- भूमि विकास नियम 2012 के नियम 36 के तहत भूखंड का उपयोग निर्धारित है। यानी आवासीय क्षेत्र में आवास, माध्यम या निम्न घनत्व की अनुमति के आधार पर निर्धारित क्षेत्र में भूतल पर व्यवसायिक और ऊपरी तल पर आवासीय उपयोग किया जा सकता है। जबकि नए संशोधन के बाद पूर्व निर्धारित क्षेत्र में केवल प्रतिबंध 19 गतिविधियों को छोड़कर अन्य सभी व्यवसायिक उपयोग शुरू हो जाएंगे। इससे भूमि विकास नियमों का दुरुपयोग भी होगा।
- बदलाव की वजह से आवासीय क्षेत्रों के रहवासी विशेषकर सीनियर सिटीजन के जीवन, स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा। कालोनियों में अस्पताल, कोचिंग सेंटर, होटल, रेस्टोरेंट, हॉस्टल, व्यावसायिक कार्यालय, गेस्ट हाउस, शोरूम, वितरण केन्द्र, दुकानें, मांस- मछली की दुकानें भी खुल जाएंगी इनसे जनसामान्य की दिनचर्या कोलाहल से प्रभावित हो जाएगी।
- नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग का भूमि विकास नियमों में बदलाव का नोटिफिकेशन और शहरों के नियोजित विकास के लिए लाए जाने वाले मास्टर प्लान के प्रावधानों विरोधाभासी होंगे। इससे शहरों में मूलभूत बुनियादी सुविधाएं पार्किंग, ड्रेनेज, वाटर सप्लाई, पार्क, यातायात व्यवस्था भी ध्वस्त हो जाएगी।
- बुनियादी सुविधाओं पर नए बादलाव अतिक्रमणकारी साबित होंगे। इन व्यवस्थाओं के प्रभावित होने से सड़क, अग्नि दुर्घटनाओं के साथ ही जलभराव हादसों की वजह बनेंगे। अवैध निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और नियमों की छूट की वजह से इसकी निगरानी पर कार्रवाई पर भी सुस्ती आएगी।
ये होंगे दूरगामी प्रभाव
- भोपाल में मेट्रो प्रोजेक्ट की बाहरी सीमा से 500 मीटर के क्षेत्र को "प्राप्ति क्षेत्र " घोषित करने की तैयारी है। बदलाव से इस क्षेत्र पर दबाव बढ़ेगा। इस क्षेत्र में मिक्सड यूज की अनुमति होगा से यह क्षेत्र पूर्णत: कमर्शियल क्षेत्र में बदल जाएगा।
- भोपाल की प्रशासनिक, इन्दौर की व्यावसायिक, उज्जैन शहर धार्मिक गतिविधियों का केंद्र है। इसी तरह शहरों के स्थिति को देखते हुए मास्टर प्लान व भूमि विकास नियम के प्रावधान तय होने चाहिए।प्रस्तावित संशोधन में शहरों की मूल प्रवृत्ति, संस्कृति को अनदेखा कर प्रदेश के लिए एक समान नियम बनाए गए हैं।
नागरिकों में नाराजगी, कोर्ट जाने की तैयारी :
समिति अध्यक्ष अपर्णा वशिष्ठ ने का कहना है सरकार को नागरिकों के हितों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। विभाग का नोटिफिकेशन न केवल नागरिकों को प्रभावित करेगा, बल्कि नगर निगम, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के प्रावधानों के विपरीत भी है।
वहीं पूर्णेंदु शुक्ल ने बताया कि यदि अरेरा कॉलोनी में आवासीय भूखंडों के व्यवसायिक उपयोग से आम नागरिक प्रभावित होंगे और नए बदलाव कॉलोनी की मूल अवधारणा के विरुद्ध होंगे तो रहवासी जनहित याचिका के माध्यम से कोर्ट जाने विवश हो जायेंगे।
यह खबरें भी पढ़ें...
भोपाल की अरेरा कॉलोनी में विधायक-मंत्री से अफसर-व्यापारियों के कॉम्प्लेक्स-कैफे की भरमार, सिस्टम लाचार
भोपाल की अरेरा कॉलोनी में घरों से कारोबार, सरकार की तैयारी पर बवाल
भोपाल की अरेरा कॉलोनी की शांति निगल रहा कमर्शियल कारोबार, घर हुए गायब, हर गली बनी बाजार
रहने के लिए बसी भोपाल की अरेरा कॉलोनी, अब कैफे-कोचिंग का ठिकाना, धड़ल्ले से चल रहा कमर्शियल खेल
भोपाल के अरेरा कॉलोनी