फराज को युवाओं का ब्रेनवॉश करने का मिला था टास्क, ATS की पूछताछ में खुलासा
समझें क्या है पूरा मामला
- भोपाल के काजी कैंप से फराज गिरफ्तार किया गया
- ATS को नेटवर्क बनाने के इनपुट मिले हैं
- गरीब और अविवाहित युवाओं को टार्गेट करने का आरोप है
- देवबंद कनेक्शन से विदेशी संपर्क सामने आया
- डिजिटल और फाइनेंशियल जांच जारी है
कौन है मोहम्मद फराज
भोपाल के कांग्रेस नगर इलाके में रहने वाला मोहम्मद फराज एक आम नागरिक जैसा दिखता था। वह 15 साल से काजी कैंप की खुशबू क्लीनिक में कंपाउंडर का काम करता था। पत्नी के साथ मिलकर घर पर ट्यूशन भी चलाता था। हर मंगलवार सुबह कुरआन की कक्षाएं भी होती थीं। मोहल्ले में वह बेहद धार्मिक और शांत इंसान के तौर पर जाना जाता था। लेकिन पर्दे के पीछे उसकी गतिविधियां बिल्कुल अलग थीं।
देवबंद से शुरू हुआ कनेक्शन
फराज ने देवबंद में रहकर धार्मिक शिक्षा ली थी। वहीं उसकी मुलाकात सहारनपुर निवासी नईम अब्दुल्ला से हुई। नईम ने ही फराज को पाकिस्तान में बैठे हैंडलर से जोड़ा। जांच एजेंसियों के मुताबिक नईम एक अहम कड़ी है। ATS ने नईम अब्दुल्ला को उत्तर प्रदेश के देवबंद से गिरफ्तार किया है। दोनों को 16 जून तक रिमांड पर भेजा गया है।
क्या था फराज का टास्क
सूत्रों के अनुसार पाकिस्तानी हैंडलर्स ने फराज को तीन काम सौंपे थे। पहला, मध्यप्रदेश में एक मजबूत कट्टरपंथी नेटवर्क खड़ा करना। दूसरा, गरीब और अविवाहित युवाओं की पहचान कर उनका ब्रेन वॉश करना। तीसरा, सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी विचार फैलाना। हैंडलर्स ने उसे खास हिदायत दी थी कि गरीब तबके के युवाओं को टार्गेट करे। यही लोग आसानी से प्रभावित हो सकते थे।
टेलीग्राम-व्हाट्सएप था हथियार
फराज चार साल से टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर कई ग्रुप्स चला रहा था। इन ग्रुप्स में संदिग्ध वीडियो और कट्टरपंथी सामग्री शेयर की जाती थी। युवाओं को धीरे-धीरे इन ग्रुप्स में जोड़ा जाता था। ATS अब उसके मोबाइल की फोरेंसिक जांच कर रही है। चैट रिकॉर्ड, कॉन्टेक्ट लिस्ट और CDR (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) सभी खंगाले जा रहे हैं।
2047 तक शरिया लागू करने की सोच
पूछताछ में सामने आया कि फराज और नईम एक खास विचारधारा से प्रभावित थे। दोनों मानते थे कि साल 2047 तक देश में शरिया कानून लागू किया जाना चाहिए। कुछ कट्टरपंथी संगठन यह प्रचार करते हैं कि आजादी के बाद से एक समुदाय के साथ अन्याय हुआ है। जांच एजेंसियां इस नेटवर्क के तारों को उन संगठनों से जोड़कर देख रही हैं।
रात 3:30 बजे छत से हुई एंट्री
ATS की टीम ने गुरुवार तड़के 3:30 बजे काजी कैंप स्थित फराज के घर पर दबिश दी। करीब 12 अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम में तीन महिला पुलिसकर्मी भी थीं। पहले घर को चारों तरफ से घेरा गया। फिर छत के रास्ते से अंदर जाकर फराज को हिरासत में लिया। पूरी कार्रवाई पूरी तरह गोपनीय रखी गई। इलाके के लोगों को सुबह ही पता चला।
गिरफ्तारी के बाद सन्नाटा
गिरफ्तारी के बाद से फराज का घर और खुशबू क्लीनिक दोनों पर ताले लटक रहे हैं। परिवार घर छोड़कर चला गया है। क्लीनिक संचालक डॉ. परवेज अली भी कार्रवाई के बाद से क्लीनिक नहीं आए। उनका पक्ष लेने की कोशिश की गई लेकिन वे उपलब्ध नहीं हुए।
बैंकिंग रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में
ATS अब फराज के बैंकिंग रिकॉर्ड भी खंगाल रही है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि उसे विदेशी फंडिंग भी मिल रही थी। इस नेटवर्क से प्रदेश में कितने और लोग जुड़े हैं, यह पता लगाना एजेंसियों की प्राथमिकता है।
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