बड़ा तालाब पर रसूखदारों के कब्जे: 21 दिनों में खाली नहीं कराए तो अफसरों पर होगी कार्रवाई

Amresh Kushwaha | Jul 31, 2026, 09:40 IST
बड़ा तालाब क्षेत्र पर रसूखदारों के कब्जे
भोपाल के बड़े तालाब में अब भी 72 अतिक्रमण बचे हैं। NGT ने प्रशासन को 21 दिन का अल्टीमेटम दिया है। समय पर कार्रवाई न होने पर एसडीएम और तहसीलदार व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। कब्जेधारियों में विधायक, पूर्व आईपीएस अफसर और कारोबारी भी शामिल हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • भोपाल के बड़े तालाब में अब भी 72 अतिक्रमण बचे हैं।
  • नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने 21 दिन में हटाने का आदेश दिया है।
  • समय पर कार्रवाई न होने पर अफसर जिम्मेदार होंगे।
  • कब्जेधारियों में विधायक, पूर्व आईपीएस अफसर और कारोबारी शामिल हैं।
  • कलियासोत और केरवा वेटलैंड का सीमांकन भी पूरा होगा।

बड़ा तालाब क्यों अहम है

भोपाल के लिए बड़ा तालाब पेयजल का बड़ा स्रोत है। इसे भोज वेटलैंड भी कहा जाता है। यह शहर की पहचान और पर्यावरण दोनों से जुड़ा है। इसी वजह से इसके संरक्षण को लेकर सख्ती लगातार बढ़ रही है।



NGT का सख्त आदेश

बड़े तालाब के फुल टैंक लेवल (FTL) से 50 मीटर के बफर जोन में कई कब्जे हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने बुधवार, 29 जुलाई को इस मामले में सुनवाई की थी। ट्रिब्यूनल ने प्रशासन को तीन हफ्ते यानी 21 दिन का अल्टीमेटम दिया है। तय समय में कार्रवाई नहीं हुई तो सीधी जिम्मेदारी तय होगी। NGT ने साफ कहा कि अब और देरी बर्दाश्त नहीं होगी। यह सुनवाई भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच में हुई। जस्टिस एके सिंह और विशेषज्ञ सदस्य डॉ प्रशांत गर्ग की बेंच ने यह आदेश दिया है।



SDM तहसीलदार पर गाज

NGT ने तय समय सीमा को लेकर सख्ती दिखाई है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि देरी हुई तो जवाबदेही तय होगी। संबंधित एसडीएम (Sub Divisional Magistrate) और तहसीलदार व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माने जाएंगे। प्रशासन को तीन हफ्ते में शपथपत्र सहित रिपोर्ट देनी होगी। इसमें कार्रवाई का पूरा ब्योरा देना अनिवार्य होगा। अगली सुनवाई 31 अगस्त को तय हुई है।



कौन हैं कब्जेधारी

सात गांवों के सर्वे में बड़े तालाब के बफर जोन में 117 कब्जे मिले थे। इनमें से 72 अब भी बचे हैं। ज्यादातर कब्जेधारी रसूखदार बताए जा रहे हैं। इस सूची में विधायक विष्णु खत्री का नाम भी शामिल है। उनका पक्का मकान कोलूखेड़ी इलाके में बताया गया है। पूर्व आईपीएस (Indian Police Service) अधिकारी मैथलीशरण गुप्त का मकान बिशनखेड़ी में है। कारोबारी देवेंद्र जैन की बाउंड्री सेवनिया गोंड़ इलाके में दर्ज है।



सूची में जया नेमानी, मुकेश चौधरी और अशोक गोयल के नाम भी हैं। कुछ मैरिज गार्डन और एक होटल भी इसी सूची में शामिल हैं। याचिकाकर्ता राशिद नूर खान का कहना है कि नए अतिक्रमण लगातार हो रहे हैं।





303 में सिर्फ 57 हटे

बड़े तालाब क्षेत्र में कुल 303 अतिक्रमण चिन्हित हुए थे। इनमें से अब तक सिर्फ 57 हटाए जा सके हैं। यानी अभी भी 246 मामलों में कार्रवाई बाकी है। टीटी नगर क्षेत्र में 45 अतिक्रमण हटाए गए हैं। बैरागढ़ में 12 कब्जे हटाए गए हैं। इस अभियान की आखिरी बड़ी कार्रवाई 2 जुलाई को हुई थी। उसके बाद कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है।



हाईकोर्ट की रोक वाले मामले

कुछ मामलों में फिलहाल कार्रवाई संभव नहीं है। 15 मामलों में हाई कोर्ट ने रोक लगा रखी है। इनमें कोहेफिजा का एक मैरिज गार्डन भी शामिल है। लेक व्यू परिसर से जुड़ा मामला भी इसी सूची में है।



इन पर अदालत का फैसला आने के बाद ही एक्शन होगा। इसके अलावा 53 पुराने निर्माण अलग श्रेणी में रखे गए हैं। ये निर्माण 16 मार्च 2022 से पहले के बताए गए हैं। पुराने सर्कुलर के मुताबिक इन पर नई कार्रवाई अभी लागू नहीं होती।



कलियासोत केरवा सीमांकन

सुनवाई में कलियासोत और केरवा वेटलैंड का मुद्दा भी उठा है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि इनका वैज्ञानिक सीमांकन अभी अधूरा है। NGT ने इसे जल्द पूरा करने का निर्देश दिया है। ट्रिब्यूनल ने वेटलैंड संरक्षण को प्राथमिकता बताया है।



पानी की गुणवत्ता पर चिंता

याचिकाकर्ताओं ने पानी की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि वेटलैंड के पास खेती हो रही है। इसमें कीटनाशकों के इस्तेमाल से जल प्रदूषण बढ़ रहा है। इसका सीधा असर पेयजल गुणवत्ता पर पड़ सकता है। NGT ने इस मुद्दे को भी गंभीरता से लिया है।



वेटलैंड में अवैध रेसिंग

सुनवाई में एक और गंभीर मुद्दा सामने आया है। वेटलैंड क्षेत्र में अवैध मड रेसिंग हो रही है। वाहन रेसिंग के खिलाफ भी शिकायतें मिली हैं। इसके खिलाफ प्राथमिकी यानी FIR (First Information Report) दर्ज कराने की जानकारी दी गई।



निगरानी बढ़ाने की मांग भी उठाई गई। करीब 150 हेक्टेयर में प्रस्तावित बॉटनिकल गार्डन का मुद्दा भी उठा। इसके सीमांकन और संरक्षण पर भी चर्चा हुई।



प्रशासन ने मांगा समय

टीटी नगर एसडीएम ने ट्रिब्यूनल को स्थिति बताई। उनके मुताबिक कई अतिक्रमण पहले ही हटाए जा चुके हैं। शेष मामलों में पुलिस बल की कमी बताई गई। कुछ मामलों में हाई कोर्ट की रोक भी वजह बनी है। प्रशासन ने बारिश के बाद कार्रवाई पूरी करने के लिए समय मांगा।



अफसरों का क्या कहना है

नगर निगम भोपाल के चीफ सिटी प्लानर नीरज आनंद लिखार ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हाई कोर्ट वाले मामलों में जल्द अफसर तैनात होंगे। इसके बाद निगम अदालत में अपना पक्ष रखेगा।



उनके अनुसार बड़े तालाब की निगरानी के लिए टास्क फोर्स पहले से बनी है। यह समिति जो फैसला लेगी, उसी आधार पर आगे कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि 16 मार्च 2022 से पहले के मामलों पर सर्कुलर लागू होगा।



आगे क्या होगा

अब मामले की दिशा NGT और टास्क फोर्स के फैसले पर टिकी है। हाई कोर्ट से जुड़े मामलों में अदालती फैसला आना अभी बाकी है। पुराने निर्माणों पर टास्क फोर्स अंतिम निर्णय लेगी। आम लोगों के कब्जे तेजी से हटाए गए हैं। रसूखदारों के मामलों में रफ्तार अब भी धीमी नजर आ रही है। अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी। तब तक प्रशासन को पूरी रिपोर्ट पेश करनी होगी।



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